देश और राज्य में काफी अंतर होता है. वैसे देश और राज्य एक दूसरे के पूरक होते हैं. राज्यों के समूह से मिलकर देश बनता है और देश की गोद में राज्य पलते बढ़ते और फलते फूलते हैं. सरल शब्दों में समझे तो राज्य शरीर है और देश उसकी आत्मा. आत्मा के बिना शरीर मिट्टी है अर्थात उसका कोई अर्थ नहीं है.
अगर देश और राज्य के शाब्दिक अर्थों पर चर्चा की जाए तो इसके कई सारे गूढ़ और निहित भावार्थ और शब्दार्थ निकाल सकते हैं लेकिन हम इसके प्रायोगिक पक्ष पर चर्चा कर रहे हैं.
राज्यों के विकास से ही देश का विकास होता है. सभी राज्यों की अलग अलग संस्कृतियां मिल कर ही देश की बहुआयामी संस्कृति का निर्माण होता है. अलग अलग राज्यों की जनसंख्या और क्षेत्रफल मिलकर एक देश की संपूर्ण जनसंख्या और क्षेत्रफल का गठन करते हैं. किसी भी राज्य का अलग संविधान नहीं होता, वह देश के संविधान के तहत चलता है.
Answered By Sardar Simranjeet
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