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Updated on Jun 3, 2026education

शब्द कृपा,कृपया और कृप्या में क्या अंतर है?

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Ten years in the classroom, shaping minds — bringing the same clarity and purpos...
Updated on Jun 3, 2026

हिंदी भाषा में “कृपा”, “कृपया” और “कृप्या” तीनों शब्द सुनने में समान लगते हैं, लेकिन इनके अर्थ और प्रयोग अलग-अलग होते हैं। इन शब्दों का सही उपयोग जानना भाषा की शुद्धता के लिए बहुत जरूरी है।

1. कृपा (Kripa):
“कृपा” का अर्थ होता है दया, रहम या अनुग्रह। जब कोई व्यक्ति किसी पर दया दिखाता है या मदद करता है, तो उसे कृपा कहा जाता है। उदाहरण के लिए—“भगवान की कृपा से सब ठीक है।” यहाँ कृपा का मतलब दया और आशीर्वाद से है। यह एक संज्ञा (noun) शब्द है।

2. कृपया (Kripaya):
“कृपया” का अर्थ होता है “कृपा करके” या “please”। यह एक निवेदन करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला शब्द है। जब हम किसी से विनम्रता से कुछ करने का अनुरोध करते हैं, तो हम “कृपया” शब्द का उपयोग करते हैं। उदाहरण—“कृपया यहाँ बैठिए” या “कृपया दरवाज़ा बंद कर दीजिए।” यह एक शिष्टाचार सूचक शब्द है और बातचीत में विनम्रता दिखाता है।

3. कृप्या (Kripya):
“कृप्या” शब्द वास्तव में गलत रूप माना जाता है। यह “कृपया” की गलत वर्तनी (spelling mistake) है। सही शब्द “कृपया” ही होता है। इसलिए लिखित हिंदी में “कृप्या” का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

हिंदी भाषा में शुद्ध शब्दों का प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर परीक्षा, लेखन और औपचारिक पत्राचार में। गलत वर्तनी से अर्थ बदल सकता है या भाषा अशुद्ध हो सकती है

 
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ABOUT THE AUTHORTara Verma

Tara Verma is a practising teacher and education content writer with over 10 years of classroom experience across primary and secondary levels. She holds a Master's degree in Education (M.Ed.) from Delhi University and a Bachelor of Education (B.Ed.) from Jamia Millia Islamia — qualifications that ground her writing in both pedagogical theory and the day-to-day realities of teaching in India. Her content covers exam preparation strategies, learning methodologies, curriculum guidance, student mental health, career counselling for students, and the evolving state of school and higher education in India. Her work has appeared on platforms including TeacherVision India, Jagran Josh, and Careers360, where she writes for students, parents, and fellow educators who need content built on actual teaching experience — not theory alone. Over a decade of working directly with students across age groups and learning levels has given Tara a practical understanding of how education content should be written — clearly, accessibly, and with genuine awareness of the challenges students and teachers face on the ground. She has taught 1,000+ students, contributed to school curriculum development initiatives, and published 250+ articles on education across digital platforms. She is an active member of the National Council of Teachers of English (NCTE) India. Across all her writing, every recommendation is classroom-tested, every insight comes from direct teaching experience, and every article is held to the same standard she applies in her own classroom — accuracy, clarity, and genuine usefulness for the reader.

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Updated on May 28, 2026

शब्द "कृपा", "कृपया" और "कृप्या" में क्या अंतर है?

हिंदी भाषा में एक ही शब्द के अलग-अलग अर्थ होते हैं, तो कई बार वे शब्द अलग अलग प्रकार से भी लिखे जाते हैं। तब भी उनके अर्थ अलग-अलग हो सकते हैं, तो वहीं कुछ शब्द ऐसे भी होते हैं। जिनके लेखन में त्रुटि होती है। लेकिन हम अमूमन उन शब्दों को हमारे लेखन में प्रयोग करते हैं। कुछ ऐसे ही शब्द है कृपया, कृप्या और कृपा-

कृपया(Kripaa):- जब हम किसी व्यक्ति से अपने किसी काम को कराने के लिए अनुरोध करते हैं तब इस शब्द कृपया का प्रयोग किया जाता है। कृपया शब्द यह दर्शाता है कि हम किसी व्यक्ति से पोलाइट रिक्वेस्ट कर रहे हैं। यह अंग्रेजी के प्लीज शब्द की याचना करता है। इस शब्द को वाक्य में से हटा लेने पर पूरे वाक्य का ही अर्थ बदल जाता है।

जैसे- 'कृपया पानी लाइए' इसमें सविनय निवेदन की भावना उत्पन्न हो रही है । तो वही दूसरे वाक्य जैसे- 'पानी लाइए' में आग्रह की भावना उत्पन्न हो रही है। इस प्रकार से इस शब्द का प्रयोग वाक्य में करने से वाक्य का पूरा अर्थ ही बदल जाता है।

कृपा (Kripaa): इस शब्द कृपा को अंग्रेजी भाषा में Grace कहा जाता है। इस शब्द का प्रयोग वहां किया जाता है। जहां किसी से उपकार करने का निवेदन करना हो। इसके अतिरिक्त जब दया की भावना उत्पन्न हो तब भी इस शब्द का प्रयोग किया जाता है।

कृप्या : यह हिंदी भाषा में कोई शब्द नहीं है यह भाषा के लेखन में त्रुटि है। इस शब्द को हम कभी-कभी कृपया के स्थान पर प्रयोग करते हैं। लेकिन यह गलत है। हिंदी भाषा में ऐसा कोई शब्द ही नहीं होता है। हिंदी भाषा में इसके अलावा ऐसे ही बहुत सारे शब्द हैं, जिनका कोई अर्थ नहीं होता है और उनका प्रयोग करना भाषा में त्रुटि उत्पन्न करता है ।

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Answered on Mar 20, 2026

ये तीनों शब्द सुनने में मिलते-जुलते हैं, लेकिन इनके अर्थ और प्रयोग अलग-अलग होते हैं।

कृपा का अर्थ होता है दयालुता, अनुग्रह या मेहरबानी।

उदाहरण: भगवान की कृपा से सब ठीक है।

कृपया का अर्थ होता है please (कृपापूर्वक)।

यह विनम्रता से कुछ कहने या अनुरोध करने के लिए इस्तेमाल होता है।

उदाहरण: कृपया बैठ जाइए।

कृप्या शब्द सामान्य हिंदी में गलत या अशुद्ध रूप माना जाता है।

सही रूप कृपया ही होता है, कृप्या का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

कृपा एक संज्ञा (noun) है, जबकि कृपया विनम्र निवेदन के लिए प्रयोग होने वाला शब्द है। इन शब्दों का सही उपयोग भाषा को शुद्ध और प्रभावी बनाता है।

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