पृथ्वी पर “पहला धर्म कौन सा था” यह प्रश्न इतिहास और आस्था दोनों से जुड़ा हुआ है, और इसका कोई एक निश्चित, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उत्तर नहीं है। धर्म (Religion) मानव समाज के विकास के साथ धीरे-धीरे विकसित हुआ, इसलिए इसे किसी एक व्यक्ति या समय से जोड़ना कठिन है।
धर्म की शुरुआत मानव सभ्यता के बहुत प्रारंभिक काल में मानी जाती है, जब आदिम मानव प्राकृतिक शक्तियों जैसे सूर्य, चंद्रमा, आग, वर्षा और पेड़ों की पूजा करने लगे थे। उस समय लोग प्रकृति को ही ईश्वर मानकर उसकी पूजा करते थे। इसे “प्रकृति पूजा” या “प्राकृतिक धर्म” का प्रारंभिक रूप माना जाता है।
ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो दुनिया के प्राचीनतम संगठित धर्मों में से एक हिंदू धर्म को माना जाता है, जिसे कई विद्वान “सनातन धर्म” भी कहते हैं। यह धर्म हजारों वर्षों से निरंतर चलता आ रहा है और इसके किसी एक संस्थापक का नाम निश्चित रूप से नहीं मिलता। इसी कारण कुछ लोग इसे विश्व का सबसे प्राचीन जीवित धर्म मानते हैं।
इसके अलावा प्राचीन काल में मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन की सभ्यताओं में भी अलग-अलग प्रकार की धार्मिक मान्यताएँ और पूजा-पद्धतियाँ मौजूद थीं। वहाँ लोग देवताओं, आत्माओं और प्रकृति की शक्तियों की पूजा करते थे। इसलिए यह कहना कि केवल एक ही धर्म सबसे पहले था, पूरी तरह सही नहीं होगा, क्योंकि धर्म का विकास अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग रूपों में हुआ।
समय के साथ मनुष्य ने अपने अनुभव, भय और विश्वासों के आधार पर धार्मिक विचारों को विकसित किया। बाद में बौद्ध धर्म, जैन धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम जैसे संगठित धर्मों का विकास हुआ, जिनके स्पष्ट नियम और सिद्धांत निर्धारित किए गए।
निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि पृथ्वी पर “पहला धर्म” निश्चित रूप से बताना संभव नहीं है, लेकिन प्रारंभिक मानव में प्रकृति पूजा सबसे पुराना धार्मिक रूप माना जाता है, और हिंदू धर्म को दुनिया के सबसे प्राचीन संगठित धर्मों में से एक माना जाता है। धर्म मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जो उसे नैतिकता, आस्था और जीवन जीने की दिशा प्रदान करता है।
यहां एक और दिलचस्प विषय है जिसका आप आनंद ले सकते हैं: हिन्दू धर्म के प्रमुख त्यौहार कौन से हैं,और इनकी क्या खास बात हैं ?





