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Setu Kushwaha· 4 years ago
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भाषा किसे कहते है? कितने प्रकार की होती है?

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Answered on12/26/22

दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि भाषा किसे कहते हैं और यह कितने प्रकार की होती है भाषा में साधन और माध्यम होती है जो सामान्य जीवन में लोग एक दूसरे से बात करने के लिए वार्तालाप करते हैं जैसे कि लिखित रूप से मौखिक रूप से या फिर बोल कर जो भी बातें करते हैं वही भाषा कहलाती है या सीधे शब्दों में कहें तो जिस माध्यम से मनोभावों को व्यक्त करते हैं वही भाषा है।
भाषा के तीन प्रकार होते हैं
• मौखिक भाषा।
• लिखित भाषा।
•संकेतिक भाषा।

मौखिक भाषा-
जब दो या दो से अधिक व्यक्ति आपस में मिलकर जिस भाषा से अपने मनोभाव को प्रकट करते हैं वह मौखिक भाषा कहलाती है।

लिखित भाषा-
जब कोई व्यक्ति अपने मनोभावों को लिखित माध्यम यानी अक्षरों के माध्यम से अपने मनोभाव को प्रकट करता है वही लिखित भाषा कहलाती है।

संकेतिक भाषा-
जब कोई व्यक्ति अपने मनोभावों को वह संकेत के माध्यम से प्रकट करते हैं वह भाषा संकेतिक भाषा कहलाती है।

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Answered on12/24/22

भाषा : जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को लिखकर और बोल कर व्यक्त करता है, उसे भाषा कहते है।

भाषा तीन प्रकार की होती हैं।

मौखिक भाषा

लिखित भाषा

संकेतिक भाषा

मौखिक भाषा: मौखिक भाषा वह भाषा होती है जिसमें कोई व्यक्ति अपने विचारों को बोलकर दूसरे वक्त तक पहुंचाता है वह मौखिक भाषा कहलाती है।

लिखित भाषा: लिखित भाषा उसे कहते हैं जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को लिखकर दूसरों के सामने प्रकट करता है लिखित भाषा कहलाती है।

संकेतिक भाषा: संकेतिक भाषा में भाषा होती है जिसने इशारों के द्वारा एक दूसरे से बात की जाती है उसे संकेतिक भाषा कहते हैं।Article image

Poonam Patel
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Answered on12/27/22

भाषा व्यक्ति के विचारों और भावों को प्रकट करने का एक साधन होती है। जिसके द्वारा व्यक्ति अपने मन की बात किसी दूसरे से कह सकता है। यह भाषा लिखित या मौखिक हो सकती है जिसको व्यक्ति लिखकर या बोलकर बताता है।

भाषा के प्रकार:- लिखित भाषा, मौखिक भाषा, संकेतिक भाषा।

लिखित भाषा में भाषा होती है जिसमें व्यक्ति किसी कागज में लिखकर किसी दूसरे को देता है और अपनी बात कहता है।

मौखिक भाषा में वह भाषा होती है जिसमें व्यक्ति एक दूसरे के आमने सामने खड़े होकर बात करते हैं।

संकेतिक भाषा वह भाषा होती है जिसमें व्यक्ति कुछ इशारों इशारों में ही अपनी बात को कह देते हैं।Article image

preeti  patel
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Answered on04/07/22

आइए आज हम आपको बताते हैं कि भाषा किसे कहते हैं? तो भाषा उसे कहते हैं जिसके द्वारा मनुष्य लिखकर, पढ़कर, बोलकर, या सुनकर अपने मन के भावों या विचारों का आदान प्रदान करता है जिसे हम भाषा कहते हैं।

भाषा तीन प्रकार की होती हैं :-

मौखिक भाषा

लिखित भाषा

सांकेतिक भाषा

मौखिक भाषा:- मौखिक भाषा उसे कहते हैं जिसके द्वारा मनुष्य बोलकर अपने विचारों को प्रकट करता है उसे हम मौखिक भाषा कहते हैं।

लिखित भाषा:- लिखित भाषा उसे कहते हैं जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को लिख कर दूसरों के सामने प्रकट करता है उसे हम लिखित भाषा कहते हैं।

सांकेतिक भाषा:- सांकेतिक भाषा उसे कहते हैं जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को संकेत करके दूसरों के सामने प्रकट करते हैं उसे हम सांकेतिक भाषा कहते हैं।Article image

Krishna Patel
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Answered on10/20/23

राष्ट्रगान को गाने में लगने वाला समय, इसे गाए जाने की गति, राष्ट्रगान के संस्करण और छंदों को जोड़ने या हटाने जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। किसी देश के राष्ट्रगान की आमतौर पर एक मानक अवधि होती है, और इसे उचित समय सीमा के भीतर गाना परंपरा और सम्मान का विषय है। राष्ट्रगान गाने के लिए यहां कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं:

1.सम्मानजनक अवधि: राष्ट्रगान गाना एक प्रतीकात्मक और गंभीर कार्य है, और इसे सम्मान और गरिमा के साथ किया जाना चाहिए। अधिकांश राष्ट्रगान कुछ ही मिनटों में गाए जा सकते हैं।

2.मानक छंद: कई राष्ट्रगानों का एक मानक संस्करण होता है जिसमें विशिष्ट संख्या में छंद और एक कोरस शामिल होता है। इन छंदों और कोरस को गाने में आम तौर पर कुछ मिनट लगते हैं।

3.आधिकारिक दिशानिर्देश: कुछ देशों में, राष्ट्रगान के उचित गायन के संबंध में आधिकारिक दिशानिर्देश हैं। ये दिशानिर्देश गाए जाने वाले छंदों की संख्या और इसे जिस गति से निष्पादित किया जाना चाहिए उसे निर्दिष्ट कर सकते हैं।

4. प्रथागत गति: स्पष्ट उच्चारण और अभिव्यक्ति की अनुमति देने के लिए राष्ट्रगान आमतौर पर मध्यम गति से गाए जाते हैं। बहुत जल्दी गाने से राष्ट्रगान की गंभीरता से समझौता हो सकता है।

5.विशेष अवसर: राष्ट्रीय छुट्टियों या आधिकारिक कार्यक्रमों जैसे विशेष अवसरों पर, अक्सर राष्ट्रगान का पूरा संस्करण गाया जाता है, जिससे इसकी अवधि बढ़ सकती है। हालाँकि, इसे आमतौर पर एक उचित समय सीमा के भीतर गाया जाता है।

हालाँकि राष्ट्रगान गाने के लिए कोई निश्चित अधिकतम समय नहीं है, लेकिन इस कार्य को श्रद्धा के साथ करना और राष्ट्रगान के गायन के संबंध में सांस्कृतिक और आधिकारिक रीति-रिवाजों का पालन करना महत्वपूर्ण है। अवधि के बजाय देशभक्ति और प्रतीकात्मक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

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म
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Answered on04/07/22

भाषा वह माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य विचारों या भावो को बोलकर या लिखकर व्यक्त करता है, वह भाषा कहलाता है।

भाषाए तीन प्रकार की होती है :-
1.लिखित भाषा
2. मौखिक भाषा
3. सांकेतिक भाषा

1.लिखित भाषा:-
लिखित भाषा वह होती है जिसमे कोई अपने विचारों का आदान -प्रदान लिखित तौर पर करता है, उसे लिखित भाषा कहते है।

2. मौखिक भाषा :-
मौखिक भाषा वह भाषा होती है, जिसमे कोई व्यक्ति अपने विचारों को बोलकर दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाता है वह मौखिक भाषा कहलाता है।

3. सांकेतिक भाषा :-
सांकेतिक भाषा वह भाषा होती है, जिसमे इशारे के द्वारा एक -दूसरे से बात की जाती है, उसे सांकेतिक भाषा कहते है।Article image

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Mp

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Answered on04/08/22

आइए अब आपको बहुत सरल ढंग से बताते है, भाष किसे कहते है। किताबी भाष की तरह नहीं ​बल्कि समझ में आने वाले तरीके से बताने जा रहे हैं—

जब कोई बात कहनी हो बताना हो, मन के विचार बताना हो तो इसे बोलकर या लिखकर कहा जाता है। बोलने और लिखने का तरीका भाषा कहलता है। इस आर्टिकल को जिस भाषा मे आप पढ़ रहे हैं, ये हिन्दी भाषा का रूप है। ये देवनागरी लिपि में लिख गया है। ये भाषा का लिखित रूप है।

भाषा के तीन रूप होते हैं— मौखिक भाषा, जब हम बोलकर अपनी बात कहते हैं तो वह मौखिक भाष कहते हैं। भाषण बोलना और सुनना मौखिक भाषा उदाहरा है।
भाष का दूसरा रूप लिखित होता हैं, जब अपने विचार लिखित रूप में व्यक्त करते हैं तो इसे लिखित भाषा कहते हैं— इसके लिए भाषा के ध्वनि का लिखित रूप यानि अल्फाबेट या वर्ण होना जरूरी है और व्याकरण के नियम। अखबार में जब संपादक लिखता है तो ये भाषा का लिखित रूप है।
भाष का तीसरा रूप— सांकेतिक रूप होता है, इसका ज्यादा महत्व भाषा में नही होता है। इसका उदाहरण ट्रेफिक पुलिसमैन का यातायात को संचालित क​रने के लिए हाथ उठाकर जो संकेत करना, भाषा का सांकेतिक रूप कहलाता है।

Every district will have its own language in Jharkhand - हर जिले की होगी  अपनी भाषा, पास करने पर ही नौकरी

Rinki Pandey
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Answered on03/17/26

आज हम जानेंगे कि भाषा क्या होती है और इसके कितने प्रकार माने जाते हैं। भाषा वह माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचार, भावनाएं और जानकारी दूसरों तक पहुंचाता है। यह संचार का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिसके बिना आपसी समझ और संपर्क संभव नहीं होता।

भाषा के माध्यम से हम बोलकर, लिखकर या संकेतों के जरिए अपनी बात व्यक्त कर सकते हैं।

भाषा के प्रमुख प्रकार:

1. Oral Language (मौखिक भाषा)

जब हम बोलकर अपनी बात व्यक्त करते हैं, उसे मौखिक भाषा कहते हैं।

2. Written Language (लिखित भाषा)

जब हम लिखकर अपने विचार व्यक्त करते हैं, उसे लिखित भाषा कहते हैं।

3. Sign Language (संकेत भाषा)

जब हम इशारों या संकेतों के माध्यम से अपनी बात बताते हैं, उसे संकेत भाषा कहते हैं।

भाषा के ये प्रकार हमें अलग-अलग तरीकों से संवाद करने में मदद करते हैं और समाज में संचार को आसान बनाते हैं।

Tara Verma
Ten years in the classroom, shaping minds — bringing the same clarity and purpose to every piece she writes about education.
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Tara Verma is a practising teacher and education content writer with over 10 years of classroom experience across primary and secondary levels. She holds a Master's degree in Education (M.Ed.) from Delhi University and a Bachelor of Education (B.Ed.) from Jamia Millia Islamia — qualifications that ground her writing in both pedagogical theory and the day-to-day realities of teaching in India. Her content covers exam preparation strategies, learning methodologies, curriculum guidance, student mental health, career counselling for students, and the evolving state of school and higher education in India. Her work has appeared on platforms including TeacherVision India, Jagran Josh, and Careers360, where she writes for students, parents, and fellow educators who need content built on actual teaching experience — not theory alone. Over a decade of working directly with students across age groups and learning levels has given Tara a practical understanding of how education content should be written — clearly, accessibly, and with genuine awareness of the challenges students and teachers face on the ground. She has taught 1,000+ students, contributed to school curriculum development initiatives, and published 250+ articles on education across digital platforms. She is an active member of the National Council of Teachers of English (NCTE) India. Across all her writing, every recommendation is classroom-tested, every insight comes from direct teaching experience, and every article is held to the same standard she applies in her own classroom — accuracy, clarity, and genuine usefulness for the reader.

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