भाषा किसे कहते है? कितने प्रकार की होती है? - letsdiskuss
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Setu Kushwaha

Occupation | पोस्ट किया | शिक्षा


भाषा किसे कहते है? कितने प्रकार की होती है?


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Occupation | पोस्ट किया


भाषा वह माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य विचारों या भावो को बोलकर या लिखकर व्यक्त करता है, वह भाषा कहलाता है।

भाषाए तीन प्रकार की होती है :-
1.लिखित भाषा
2. मौखिक भाषा
3. सांकेतिक भाषा

1.लिखित भाषा:-
लिखित भाषा वह होती है जिसमे कोई अपने विचारों का आदान -प्रदान लिखित तौर पर करता है, उसे लिखित भाषा कहते है।

2. मौखिक भाषा :-
मौखिक भाषा वह भाषा होती है, जिसमे कोई व्यक्ति अपने विचारों को बोलकर दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाता है वह मौखिक भाषा कहलाता है।

3. सांकेतिक भाषा :-
सांकेतिक भाषा  वह भाषा होती है, जिसमे इशारे के द्वारा एक -दूसरे से बात की जाती है, उसे सांकेतिक भाषा कहते है।Letsdiskuss


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आइए आज हम आपको बताते हैं कि भाषा किसे कहते हैं? तो भाषा उसे कहते हैं जिसके द्वारा मनुष्य लिखकर, पढ़कर, बोलकर, या सुनकर अपने मन के भावों या विचारों का आदान प्रदान करता है जिसे हम भाषा कहते हैं।

 भाषा तीन प्रकार की होती हैं :-

 मौखिक भाषा

 लिखित भाषा

 सांकेतिक भाषा

 मौखिक भाषा:- मौखिक भाषा उसे कहते हैं जिसके द्वारा मनुष्य बोलकर अपने विचारों को प्रकट करता है उसे हम मौखिक भाषा कहते हैं।

 लिखित भाषा:- लिखित भाषा उसे कहते हैं जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को लिख कर दूसरों के सामने प्रकट करता है उसे हम लिखित भाषा कहते हैं।

 सांकेतिक भाषा:- सांकेतिक भाषा उसे कहते हैं जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को संकेत करके दूसरों के सामने प्रकट करते हैं उसे हम सांकेतिक भाषा कहते हैं।Letsdiskuss


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आइए अब  आपको बहुत सरल ढंग से बताते है, भाष किसे कहते है। किताबी भाष की तरह नहीं ​बल्कि समझ में आने वाले तरीके से बताने जा रहे हैं—

जब कोई बात कहनी हो बताना हो, मन के विचार बताना हो तो इसे बोलकर या लिखकर कहा जाता है। बोलने और लिखने का तरीका भाषा कहलता है। इस आर्टिकल को जिस भाषा मे आप पढ़ रहे हैं, ये हिन्दी भाषा का रूप है। ये देवनागरी लिपि में लिख गया है। ये भाषा का लिखित रूप है। 

 भाषा के तीन रूप होते हैं— मौखिक भाषा, जब हम बोलकर अपनी बात कहते हैं तो वह मौखिक भाष कहते हैं। भाषण बोलना और सुनना मौखिक भाषा उदाहरा है।
भाष का दूसरा रूप लिखित होता हैं, जब अपने विचार लिखित रूप में व्यक्त करते हैं तो इसे लिखित भाषा कहते हैं— इसके लिए भाषा के ध्वनि का लिखित रूप यानि अल्फाबेट या वर्ण होना जरूरी है और व्याकरण के नियम। अखबार में जब संपादक लिखता है तो ये भाषा का लिखित रूप है।
भाष का तीसरा रूप— सांकेतिक रूप होता  है, इसका ज्यादा महत्व भाषा में नही होता है। इसका उदाहरण ट्रेफिक पुलिसमैन का यातायात को संचालित क​रने के लिए हाथ उठाकर जो संकेत करना, भाषा का सांकेतिक रूप कहलाता है। 

 

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