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Updated on May 21, 2026astrology

वास्तु शाश्त्र मे लो-शु वर्ग और यिन-यांग का क्या अर्थ है ?

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Updated on May 21, 2026
वास्तु शाश्त्र का ज्ञान अधिकतर लोगो को है और बहुत से लोग इसको मानते भी है | घर बनवाने से लेकर घर मे रखने वाली चीजों के स्थान को भी वास्तु शाश्त्र के आधार पर मानते है | यहाँ तक के घर मे फर्नीचर कौन से रंग का हो ,पर्दे कौन से कलर के हो ये तक आज कल वास्तु के हिसाब से ही होता है | क्योर्स कहा लगाना है घर मे क्या रखना है ये सब वास्तु शास्त्र के आधार पर निर्धारित होता है |
 
लो -शु वर्ग क्या है :-
यह एक शक्ति शाली यन्त्र है | इसमें एक से नौ तक नंबर केवल एक बार प्रयोग होते है | इसका वर्क 3 x 3 मे बटा हुआ होता है | और सब जगह का जोड़ 15 ही आता है | इसको पर्श मे रखना या घर के मुख्य द्वार पर लगाना शुभ होता है |
 
छेत्र :-
1-करियर ,2-विवाह ,3-परिवार,4-ज़मीन और जायदाद,5-सेहत और पैसा,6-दोस्त और सलाहकार,7-बच्चो की तरफ से खुसी,
8-पढाई,9-सफलता |
 
यिन - यांग :-
ये यन्त्र दो विपरीत शक्तियों को मिलता है | जैसे पति - पत्नी ,सुख -दुःख ,रात -दिन , सूर्य -चन्द्रमा आदि | ये यन्त्र अपनी लाइफ मे एक अच्छा नियंत्रण बनाकर रखता है | वास्तु शाश्त्र मे इसको पानी की तरह बताया गया है | पानी जब पिया जाये तो वो किसी अमृत से कम नहीं परन्तु यही पानी अगर बाढ़ का रूप ले ले तो सब कुछ तबाह कर देता है |
 
जैसे :- आप अगर घर बनवाते हो तो अगर आपके घर की दीवार का कलर डार्क है तो आप फर्नीचर हल्के रंग के ही लाओगे |
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Answered on May 13, 2026

लो-शु वर्ग और यिन-यांग की मान्यताएँ मुख्य रूप से चीनी फेंगशुई से जुड़ी मानी जाती हैं, लेकिन कई लोग इन्हें वास्तु शास्त्र के साथ भी जोड़कर देखते हैं। लो-शु वर्ग एक विशेष अंक व्यवस्था मानी जाती है, जिसमें अंकों को दिशाओं और ऊर्जा संतुलन से जोड़ा जाता है। कुछ लोग इसका उपयोग जीवन, भाग्य और स्वभाव को समझने के लिए करते हैं।

वहीं यिन-यांग का अर्थ विपरीत शक्तियों के संतुलन से होता है, जैसे अंधकार-प्रकाश, शांत-ऊर्जावान या स्त्री-पुरुष ऊर्जा। इसका मुख्य विचार यह है कि जीवन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। बहुत लोग इन मान्यताओं को सकारात्मकता और मानसिक शांति से जोड़कर मानते हैं।

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