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Ravi Gupta· 3 hours ago
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रक्षाबंधन की पूजा विधि और राखी बांधने का सही समय क्या है?

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Answered on08/25/26

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अपनापन का त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती है। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसके प्रति अपने प्यार और सहयोग का भाव व्यक्त करता है। लेकिन रक्षाबंधन की पूजा विधि और राखी बांधने का सही समय जानना भी पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

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रक्षाबंधन की पूजा विधि कैसे की जाती है?

रक्षाबंधन की रस्म परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। सामान्य रूप से सबसे पहले राखी की थाली तैयार की जाती है। इसमें राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल और मिठाई रखी जा सकती है। Incredible India भी Rakhi, सिंदूर/वर्मिलियन, चावल, मिठाई, दीपक और अगरबत्ती को पारंपरिक थाली से जोड़ता है।

राखी बांधने की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. भाई को साफ स्थान पर बैठाएं।

  2. उसके माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाएं।

  3. परिवार की परंपरा के अनुसार आरती करें।

  4. भाई की कलाई पर राखी बांधें।

  5. उसे मिठाई खिलाएं।

  6. भाई अपनी बहन को उपहार और शुभकामनाएं दे।

  7. अंत में परिवार के साथ समय बिताएं और भोजन करें।

इन रस्मों का मुख्य उद्देश्य किसी एक कठोर नियम का पालन करना नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते को प्रेम और सम्मान के साथ मनाना है।

राखी बांधने का सही समय कैसे तय होता है?

राखी बांधने का सही समय हर साल हिंदू पंचांग के आधार पर निर्धारित किया जाता है। रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और शुभ समय तय करते समय पूर्णिमा तिथि तथा भद्रा जैसे पंचांग संबंधी समय को ध्यान में रखा जाता है। Drik Panchang के अनुसार, रक्षाबंधन की रस्म भद्रा के दौरान नहीं करनी चाहिए और उपलब्ध शुभ समय स्थान के अनुसार देखा जाना चाहिए।

इसलिए पूरे भारत के लिए एक ही समय बताना सही नहीं होगा। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग की गणना के कारण समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

रक्षाबंधन 2026 का शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। नई दिल्ली के लिए Drik Panchang वर्तमान में राखी बांधने का समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बता रहा है। इसी स्रोत के अनुसार इस दिन भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है।

ध्यान रखें कि यह नई दिल्ली का स्थानीय समय है। उदाहरण के लिए, अन्य शहरों के लिए शुरुआती समय अलग दिया गया है, जबकि 9:48 AM पूर्णिमा तिथि के समाप्त होने के समय से जुड़ा है। इसलिए अगर आप दिल्ली के बाहर रहते हैं, तो अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखना बेहतर है।

पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

रक्षाबंधन को लेकर परिवारों की अपनी-अपनी परंपराएं होती हैं। इसलिए पूजा या राखी की रस्म करते समय अपने घर की परंपरा का सम्मान करना सबसे अच्छा है। यदि परिवार शुभ मुहूर्त का पालन करता है, तो राखी बांधने से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करें।

साथ ही, केवल मुहूर्त पर ध्यान देने के बजाय त्योहार की भावना को भी महत्व दें। भाई-बहन का साथ बैठना, एक-दूसरे को शुभकामनाएं देना और परिवार के साथ समय बिताना इस त्योहार को खास बनाता है।

निष्कर्ष

रक्षाबंधन की पूजा विधि में तिलक, आरती, राखी बांधना, मिठाई खिलाना और उपहार देना प्रमुख रस्में हैं। राखी बांधने का सही समय स्थान और पंचांग के अनुसार बदल सकता है। 2026 में नई दिल्ली के लिए वर्तमान शुभ समय 28 अगस्त को सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक है।

सबसे जरूरी बात यह है कि रक्षाबंधन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, भरोसे और साथ को मनाने का अवसर है।

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Decoding the ancient language of the stars — with six years of practice, study, and thousands of consultations behind every word.
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Madhav Sharma is a professional astrologer with over 6 years of practice in Vedic astrology. He holds a Jyotish Visharad certification from the Indian Council of Astrological Sciences (ICAS), New Delhi — one of India's most recognised credentials in the field — and has studied under senior practitioners with decades of lineage in classical Vedic traditions. His content covers Vedic astrology, birth chart analysis, planetary transits, kundli matching, horoscope predictions, and the practical application of astrological principles in daily life. His work has been published on platforms including AstroSage, GaneshaSpeaks, and Boldsky Astrology, where he writes for readers seeking guidance grounded in classical astrological texts and consistent interpretive practice. Over six years, Madhav has conducted 2,000+ individual consultations and published 200+ articles on astrology, covering everything from beginner guides to in-depth analyses of rare planetary combinations. He is a practising member of the Indian Astrology Federation and has been a featured voice at astrology conferences and spiritual wellness events across India. Across all his writing, his approach remains consistent — classical knowledge, disciplined interpretation, and content that respects both the tradition of Vedic astrology and the intelligence of the reader.

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