कुम्भ 2019 की क्या खास बात है, यह किन्नर के लिए क्यों महत्व रखता है ? - letsdiskuss
Official Letsdiskuss Logo
Official Letsdiskuss Logo

भाषा


Medha Kapoor

B.A. (Journalism & Mass Communication) | पोस्ट किया |


कुम्भ 2019 की क्या खास बात है, यह किन्नर के लिए क्यों महत्व रखता है ?


2
0




Content writer | पोस्ट किया


15 जनवरी से 4 मार्च तक प्रयागराज में चलने वाला कुम्भ मेला बहुत ही ख़ास होता हैं, यह ना केवल आस्था और विश्वास का संगम हैं, बल्कि कुम्भ मेले से अनोखी गाथाएं भी जुडी हुई हैं| कुम्भ मेला धार्मिक मेला हैं जिसमें करोड़ो की तादाद में श्रद्धालु आते हैं, और गंगा स्नान करते हैं| कुंभ में अखाड़ों के नागा साधु और सन्यासी सभी के आकर्षण का केन्द्र होते है, साथ ही आपको कुम्भ मेले में गाय के दूध से बना शुद्ध देशी घी का  खाना मिलता हैं|



Letsdiskuss(courtesy - भास्कर)



लेकिन आपको बता दे की साल 2019 का कुम्भ किन्नरों के लिए बहुत ख़ास हैं क्योंकि, हमेशा से कुम्भ में 13 अखाड़े भाग लेते थे लेकिन इस बार के कुंभ मेले में 13 अखाड़ों की जगह पूरे 14 अखाड़ों ने भाग लिया है। जिसमें से 14 वें अखाड़े के रूप में किन्नर अखाड़े को मान्यता दी गई है, यह ना केवल उनके लिए सामान अधिकार का रूप हैं बल्कि देश और समाज को बदलने के लिए भी एक बड़ी पहल हैं, और इस अखाड़े में देश के कई किन्नरों नें भाग लिया है। आपको बता दे की किन्नर भी विवाह करते हैं, इतना ही नहीं बल्कि बल्कि किन्नर समाज में भी उनके जन्म से मृत्यु तक कई सारी रश्में निभाई जाती हैं|  



(courtesy-timesnownews )


लेकिन आपको बता दे की किन्नर समाज का अंश बहुत पुराना हैं, क्योंकि जब भगवान राम अयोध्या से जाने लगे थे तब उनकी प्रजा और किन्नर समाज उनके पीछे दौड़ा और जब प्रभु श्री राम वापस लौटे अयोध्या तो उन्होंने देखा की वहां से उनकी प्रजा जा चुकी थी लेकिन सभी किन्नर वही उनका इंतज़ार कर रहे थे, तब भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया की उनका आशीर्वाद बहुत फलित माना जाएगा, तब से किन्नर विवाह और बच्चे के जन्म जैसी रश्मो में आशीर्वाद देने लगे जिसे शुभ माना जाता हैं|  

इतना ही नहीं बल्कि किन्नर समुदाय के भी गुरु होते हैं, वह भी स्वयं किन्नर होते हैं, और सबसे ख़ास बात यह हैं की किन्नरों के गुरु को एहसास हो जाता हैं की उनके कौन से शिष्य की मृत्यु कब होने वाली हैं, साथ ही आपको बता दे की किन्नरों की मृत्युओं के बाद उसकी शव यात्रा को दिन में नहीं बल्कि रात में निकाली जाती हैं| कुम्भ मेले में किन्नरों के अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी हैं|


0
0

Picture of the author