जो गठिया(वात रोग) होता है उसे आस्टियो आर्थराइटिस कहते है तथा जोड़ों में सूजन या प्रदाह के कारण उत्पन्न गाठिया को रियुमेटॉयड आर्थराइटिस कहते हैं । जोड़ो में यूरिक अम्ल के जमा हो जाने के कारण उत्पन्न गाठिया को गाऊटी आर्थराइटिस कहते है। हिमोफिलिया में रक्तस्त्राव में जोड़ों में खून के थक्के जम जाने के कारण उत्पन्न गठिया को एक्यूट आर्थराइटिस कहते हैं। इस रोग में कंधों में जकड़न वाली मांसपेशियों में सूजन आ जाती है, कंधे स्वाभाविक रूप से हिल - डुल नहीं सकते। अल्ट्रासोनिक किरणों से सेंकने पर दर्द में लाभ मिलता है ।
>>वात रोग की घरेलू चिकित्सा -
सुबह जल्दी एकपुटीया लहसुन आधा किलो दूध में डालकर गरम करे, जब दूध आधा रह जाये तो छानकर ठंडा करके पी लें । अगले दिन 2 एकपुटीया लहसुन ले और उसी विधि से पिएँ। ऐसे करके 12 दिन तक एक - एक लहसुन की पोथी बढ़ाते जाएं और तेरहवें दिन से एक - एक पोथी की संख्या कम करते जाएं।
अश्वगंध, चोपचीनी, पीपलामूल, सोंठ का समान मात्रा में पिसा हुआ एक चम्मच चूर्ण दूध के साथ सुबह शाम पियें ।
रात को सोते समय 10 ग्राम दानामेथी के साबुत दाने निगल ले और पानी पीकर सो जाएं।
नीम की नयी पत्तियां (डेढ़ तोला) सुबह खाली पेट चबाएं और रात में सोते समय 50 ग्राम गुड़ और 1 तोला शुद्ध घी का सेवन करें. इसके तुरंत बाद पानी ना पिए।