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Sumil Yadav· 6 years ago
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वात रोग को जड़ से खत्म करने का उपचार क्या है?

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वात रोग को जड़ से खत्म करने के कुछ घरेलू उपायो को अपना सकते है -

• बढ़ते उम्र के साथ अक्सर बुजुर्गो के जोड़ो या शरीर के किसी भी अंग मे वात पकड़ लेता है, जिस वजह से उनको बहुत सी परेशनीयों का समाना करना पड़ता है। ऐसे मे वात रोग को जड़ से ख़त्म करने के लिए हल्दी और सोंठ का पाउडर बनाकर लगातार 1-2हप्ते तक पीने से वात काफ़ी हद तक ठीक हो जाता है।

• जिन लोगो को वात हो जाता है, वह वात रोग से छुटकारा पाने के लिए लहसुन को भून कर खाने से वात रोग ठीक हो जाता है।

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S
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Mp

Answered on02/15/22
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जो गठिया(वात रोग) होता है उसे आस्टियो आर्थराइटिस कहते है तथा जोड़ों में सूजन या प्रदाह के कारण उत्पन्न गाठिया को रियुमेटॉयड आर्थराइटिस कहते हैं । जोड़ो में यूरिक अम्ल के जमा हो जाने के कारण उत्पन्न गाठिया को गाऊटी आर्थराइटिस कहते है। हिमोफिलिया में रक्तस्त्राव में जोड़ों में खून के थक्के जम जाने के कारण उत्पन्न गठिया को एक्यूट आर्थराइटिस कहते हैं। इस रोग में कंधों में जकड़न वाली मांसपेशियों में सूजन आ जाती है, कंधे स्वाभाविक रूप से हिल - डुल नहीं सकते। अल्ट्रासोनिक किरणों से सेंकने पर दर्द में लाभ मिलता है ।

>>वात रोग की घरेलू चिकित्सा -

सुबह जल्दी एकपुटीया लहसुन आधा किलो दूध में डालकर गरम करे, जब दूध आधा रह जाये तो छानकर ठंडा करके पी लें । अगले दिन 2 एकपुटीया लहसुन ले और उसी विधि से पिएँ। ऐसे करके 12 दिन तक एक - एक लहसुन की पोथी बढ़ाते जाएं और तेरहवें दिन से एक - एक पोथी की संख्या कम करते जाएं।

अश्वगंध, चोपचीनी, पीपलामूल, सोंठ का समान मात्रा में पिसा हुआ एक चम्मच चूर्ण दूध के साथ सुबह शाम पियें ।

रात को सोते समय 10 ग्राम दानामेथी के साबुत दाने निगल ले और पानी पीकर सो जाएं।

नीम की नयी पत्तियां (डेढ़ तोला) सुबह खाली पेट चबाएं और रात में सोते समय 50 ग्राम गुड़ और 1 तोला शुद्ध घी का सेवन करें. इसके तुरंत बाद पानी ना पिए।


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A
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Answered on05/22/20
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वात रोग के निदान में मदद के लिए टेस्ट में शामिल हो सकते हैं:

  • संयुक्त द्रव परीक्षण। आपका डॉक्टर आपके प्रभावित जोड़ से तरल पदार्थ खींचने के लिए एक सुई का उपयोग कर सकता है। एक खुर्दबीन के नीचे तरल पदार्थ की जांच होने पर यूरेट क्रिस्टल दिखाई दे सकते हैं।
  • रक्त परीक्षण। आपका डॉक्टर आपके रक्त में यूरिक एसिड और क्रिएटिनिन के स्तर को मापने के लिए रक्त परीक्षण की सिफारिश कर सकता है। रक्त परीक्षण के परिणाम भ्रामक हो सकते हैं, हालांकि। कुछ लोगों में यूरिक एसिड का स्तर अधिक होता है, लेकिन कभी भी गाउट का अनुभव नहीं होता है। और कुछ लोगों में गाउट के लक्षण और लक्षण होते हैं, लेकिन उनके रक्त में यूरिक एसिड का असामान्य स्तर नहीं होता है।
  • एक्स-रे इमेजिंग। जोड़ों की सूजन के अन्य कारणों का पता लगाने के लिए संयुक्त एक्स-रे सहायक हो सकते हैं।
  • अल्ट्रासाउंड। मस्कुलोस्केलेटल अल्ट्रासाउंड एक संयुक्त या एक टॉफस में यूरेट क्रिस्टल का पता लगा सकता है। यह तकनीक संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में यूरोप में अधिक व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
  • दोहरी ऊर्जा सीटी स्कैन। इस तरह की इमेजिंग एक संयुक्त में यूरेट क्रिस्टल की उपस्थिति का पता लगा सकती है, तब भी जब यह तीव्रता से सूजन नहीं है। यह परीक्षण खर्च के कारण नैदानिक ​​अभ्यास में नियमित रूप से उपयोग नहीं किया जाता है और व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है।
इलाज
गाउट के लिए उपचार में आमतौर पर दवाएं शामिल होती हैं। आपके और आपके चिकित्सक द्वारा चुनी गई दवाएं आपके वर्तमान स्वास्थ्य और आपकी अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर होंगी।
 
गाउट दवाओं का उपयोग तीव्र हमलों के इलाज और भविष्य के हमलों को रोकने के लिए किया जा सकता है। दवाएं भी गाउट से जटिलताओं के जोखिम को कम कर सकती हैं, जैसे कि यूरेट क्रिस्टल जमा से टोफी का विकास।
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A
Awni rai Author
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Updated on05/28/26
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वात रोग (Vata disorder) आयुर्वेद में शरीर के वात दोष के असंतुलन से होने वाली स्थिति मानी जाती है। इसमें मुख्य रूप से जोड़ों, हड्डियों और नसों में दर्द, अकड़न और सूजन जैसी समस्याएँ होती हैं।

वात रोग पूरी तरह “एक दिन में खत्म होने वाली बीमारी” नहीं है, लेकिन सही जीवनशैली और उपचार से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

वात रोग के मुख्य लक्षण

  • जोड़ों में दर्द और अकड़न
  • शरीर में सूखापन
  • कमर और घुटनों में दर्द
  • कमजोरी और थकान
  • ठंड से दर्द बढ़ना

जड़ से नियंत्रण के उपाय

1. सही आहार (Diet)

  • गर्म और ताजा भोजन करें
  • दूध, घी और सुपाच्य भोजन लें
  • ठंडी चीजों जैसे कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम से बचें
  • हरी सब्जियाँ और फल शामिल करें

2. आयुर्वेदिक उपचार

  • आयुर्वेद में तेल मालिश (Abhyanga) बहुत लाभकारी मानी जाती है
  • तिल के तेल से मालिश करने से दर्द कम होता है
  • डॉक्टर की सलाह से हर्बल दवाएँ ली जा सकती हैं

3. योग और व्यायाम

  • हल्का योग जैसे भुजंगासन, पवनमुक्तासन
  • रोज़ हल्की वॉक
  • शरीर को सक्रिय रखना बहुत जरूरी है

4. जीवनशैली सुधार

  • पर्याप्त नींद लें
  • तनाव कम करें
  • ठंड से बचाव करें
  • लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें

5. फिजियोथेरेपी (जरूरत पड़ने पर)

  • गंभीर दर्द में फिजियोथेरेपी से राहत मिलती है

यह भी पढ़ें: कौनसा फल हमे किस रोग से बचाता है?

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Dr. Aarav GuptaBridging clinical medicine and everyday wellness — helping readers make informed decisions about their health and appearance.
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Dr. Aarav Gupta is a practising physician with over 8 years of clinical experience, specialising in general medicine and dermatology-adjacent wellness. He holds an MBBS from All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), New Delhi, and an MD in General Medicine from the same institution — credentials that place his health and beauty writing on a foundation of verified medical knowledge. His content covers evidence-based skincare, preventive health, nutrition, mental wellness, and the science behind beauty trends that are too often reported without clinical context. His work has been published on platforms including HealthShots, OnlyMyHealth, and Lybrate, where he contributes medical reviews, explainers, and practical health guidance grounded in current clinical evidence. With 8+ years of patient-facing practice behind his writing, Dr. Gupta brings a perspective that is rarely found in health and beauty content — one shaped by real clinical encounters, not just research papers. He is a registered member of the Indian Medical Association (IMA) and has spoken on health literacy and responsible medical communication at platforms including the India Health Summit. Across all his work, his standard remains consistent — every claim is grounded in medical evidence, every recommendation is one he would make to a patient, and no trend is reported without clinical scrutiny.

Updated on06/05/26
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