आइए चर्चा करते हैं कि जीरो बजट फार्मिंग फार्मूला क्या है। दोस्तों जीरो बजट फार्मिंग फार्मूला उसे कहते हैं जिसने प्राकृतिक रूप से खेती की जाती है यानी की खेती करने के लिए किसी भी जैविक खाद पदार्थों का इस्तेमाल न करके गाय का गोबर इस्तेमाल करके खेती करना ताकि इसमें आप की लागत ना लगे और आपको अच्छी से अच्छी फसल भी प्राप्त हो सके। इस प्रक्रिया को करने से खेतों से पोषक तत्व नष्ट नहीं होते और फसलों का उत्पादन भी अच्छा होता है। इस खेती को करने के लिए आपको केवल गाय का गोबर और मूत्र की आवश्यकता पड़ेगी।
जीरो बजट फार्मिंग फार्मूला क्या है
जीरो बजट खेती वह खेती होती है जिसमें व्यक्ति अपने खेतों पर प्राकृतिक रूप से खेती करता है। इसमें व्यक्ति अपने गाय का गोबर खेतों पर डालता है। जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति अच्छी हो जाती है क्योंकि बाहर की खाद डालने से धरती पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है और धरती बंजर हो जाती है। गाय का गोबर खेती पर डालने से अधिक पैसे भी नहीं लगते हैं। जो किसानों के लिए अधिक लाभदायक हो जाता है।
दोस्तों इस पोस्ट में हम आपको जीरो बजट फार्मिंग फार्मूला क्या है बताएंगे जीरो बजट फार्मिंग एक प्राकृतिक खेती है जिसमें बिना किसी लागत की खेती होती है कुल मिलाकर पूरी तरह से यह खेती केवल प्राकृतिक रूप से होती है जीरो बजट प्राकृतिक खेती में एक गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग होता है इसमें 30 एकड़ में केवल एक गाय का गोबर और गोमूत्र की आवश्यकता पड़ती है। जीरो बजट फार्मिंग में बहुत गौपालन का महत्व होता है। क्योंकि इस समय गौवंश के गोबर तथा गोमूत्र जीवामृत, धन जीवामृत और जामुन बीजामृत बनाया जाता है।

जीरो बजट फार्मूला क्या है?
जीरो बजट फार्मूला खास तौर पर कृषि उत्पाद के लिए किया जाता है। इस फार्मूले के अंतर्गत बिना पैसे खर्च कर फसलों का उत्पादन किया जाता है। फसलों के उत्पादन के लिए बाजार की खाद का प्रयोग ना करके किसान गाय के गोबर व मूत्र का इस्तेमाल करते हैं। जिससे फसलों उत्पादन अच्छा होता है साथ ही खेतों के पोषक तत्व नष्ट नहीं होते हैं। 30 एकड़ जमीन पर खेती के लिए केवल एक गाय के गोबर और मूत्र की आवश्यकता होती है ।1970 में इसकी शुरुआत हुई थी । शून्य आधारित बजट में बजट अनुमान शून्य से प्रारंभ किये जाते हैं । शून्य आधारित बजट में गत वर्षों के व्यय सम्बन्धी आंकड़ों को कोई महत्व नहीं दिया जाता है । इस प्रणाली में कार्य इस आधार पर शुरू किया जाता है कि अगली अवधि के लिए बजट शून्य है ।

शून्य आधारित बजट बहुत ही खर्चीली होती है । इसमें पुरानी योजना की समीक्षा करने और नई योजना को शुरु करने में बहुत समय लग जाता है । इस बजट के लाभ की बात करें तो आने वाली लागत के बराबर होती है ।

यह बजट शॉर्ट टर्म को बढ़ावा देता है । यह नियोजन और पलटन प्रक्रिया के तहत काम करती है । शून्य-आधारित बजटिंग कंपनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली एक तकनीक है, लेकिन इस प्रकार के बजट का उपयोग व्यक्तियों और परिवारों द्वारा किया जा सकता है।