झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम तो आप सभी ने सुना ही होगा। मैं आपको बता दूं कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई अपनी अंतिम सांस तक अंग्रेजों के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने के बाद वीरगति को प्राप्त हो गई। आज अपने सवाल किया है कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के घोड़े का नाम क्या है तो चलिए हम आपको इसकी भी जानकारी देते हैं।
महारानी लक्ष्मी बाई का जन्म काशी में 19 नवंबर 1835 को हुआ था। महारानी लक्ष्मी बाई के माता का नाम भागीरथी था, और उनके पिताजी का नाम मोरोपंत तांबे था जो की चिकनाजी अप्पा के आश्रित थे। और उनके माता-पिता इन्हें बचपन में प्यार से मनु कह कर पुकारते थे। इतना ही नहीं रानी लक्ष्मीबाई ने बहुत ही कम उम्र में तलवारबाजी करना भी सीख गई थी। और फिर रानी लक्ष्मीबाई यानी कि मनु भाई का विवाह गंगाधर राव के साथ कर दिया गया। गंगाधर राव 1838 में झांसी के राजा घोषित किए गए थे। और फिर 21 नवंबर 1853 को झांसी के राजा गंगाधर राव का निधन हो गया। और उनके निधन के बाद झांसी पर अंग्रेजों की नजर आ गई। लेकिन रानी लक्ष्मीबाई ने कह दिया कि वह अपनी झांसी अंग्रेजों को नहीं देंगीं । इसके बाद उन्होंने अंग्रेजों से युद्ध किया। और फिर 23 मार्च 1858 को झांसी का ऐतिहासिक युद्ध प्रारंभ हुआ। जिसमें रानी लक्ष्मीबाई अकेले ही अपनी पीठ के पीछे अपने पुत्र दामोदर राव को कसकर घोड़े पर सवार होकर अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करती रही।
मैं आपको बता दूं कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के पास तीन घोड़े हुआ करते थे। जिनमें से सारंगी बादल, और पवन थे। बादल रानी लक्ष्मी बाई का सबसे प्रिय घोड़ा हुआ करता था और अपने अंतिम युद्ध के समय रानी जी घोड़े पर सवार थी उसका नाम बादल था। बताया जाता है की रानी लक्ष्मीबाई अपने घोड़े पर बैठकर किले की 100 फीट ऊंची दीवार को पार कर गई थी। क्योंकि उनका घोड़ा बदल बहुत ही बहादुर और तेज हुआ करता था।


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