वास्को डी गामा जैसा कि हम सभी भारत में अपने स्कूलों में सीख चुके हैं। वास्को डी गामा 1499 में कालीकट के बंदरगाह पर पहुंचे थे। उन्हें अब भारत का संस्थापक माना जाता है। लेकिन बेहतर होगा कि उन्हें एक आक्रमणकारी के रूप में माना जाए। भारत 1499 से पहले नहीं खोया था। सिकंदर ने भारत पर आक्रमण करने से लगभग 800 साल पहले और सिंध पर विजय प्राप्त की थी। यह स्पष्ट है कि वह भारत को जानता था और वह यहां तक कैसे पहुंच सकता है। यहां तक कि मुगलों को भी भारत के बारे में पता था। फिर हम कैसे कह सकते हैं कि वास्को डी गामा ने भारत की खोज की। तो आप मेरा उद्देश्य समझ गए होंगे कि किसी ने भी भारत की खोज नहीं की, लेकिन वे इस स्थान को केवल इसके सोने और महिमा के कारण जानते थे। आक्रमणकारियों ने समय-समय पर भारत पर आक्रमण किया है और इसलिए किसी को भी भारत का संस्थापक नहीं माना जा सकता है क्योंकि यह कई जनजातियों द्वारा दौरा किया गया था और "गोल्डन बर्ड" के रूप में जाना जाता था।
भारत की खोज कब और किसने की थी?
भारत की खोज सर्वप्रथम वास्को डी गामा जी ने 20 मई 1498 ईस्वी में अपने जहाज सैन गेब्रियल और साओ राफयल के माध्यम से किया था।वास्को डी गामा ने भारत की खोज अपने 4नाविकों के साथ मिलकर की थी,वास्को डी गामा भारत समुद्र के जरिये पहुंचे थे तो वास्को डी गामा यूरोप से एशिया समुद्री रास्ते से पहुंचने वाले प्रथम व्यक्ति थे। वास्को डी गामा को यूरोप से एशिया तक का रास्ता खोजने का श्रेय भी वास्को डी गामा को दिया गया है,वास्को डी गामा ने भारत की खोज में अपनी यात्रा 8 जुलाई 1497 लिस्बन से शुरू की थी और भारत की खोज मे वास्को डी गामा के साथ 170 आदमी थे।
“भारत की खोज” का प्रश्न अक्सर पूछा जाता है, लेकिन इसका सही ऐतिहासिक अर्थ समझना जरूरी है। वास्तव में भारत की “खोज” किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं की गई थी, क्योंकि भारत एक प्राचीन सभ्यता है जो हजारों साल पहले से अस्तित्व में है। मानव सभ्यता के शुरुआती काल से ही यहाँ लोग रहते आए हैं और यह सिंधु घाटी सभ्यता जैसी महान सभ्यताओं का केंद्र रहा है।
हालांकि, अगर हम “भारत की खोज” को यूरोपियन दृष्टिकोण से देखें, तो इसका संबंध यूरोपीय यात्रियों और आक्रमणकारियों से जोड़ा जाता है। सबसे पहले यूरोप से भारत आने वाले प्रमुख यात्री वास्को द गामा (Vasco da Gama) थे, जो 1498 ईस्वी में समुद्री मार्ग से भारत के कालीकट (कोझीकोड) तट पर पहुँचे थे। उन्होंने भारत का “आविष्कार” नहीं किया, बल्कि यूरोप के लिए भारत तक पहुँचने का नया समुद्री मार्ग खोजा था।
इसके बाद पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी और ब्रिटिश व्यापारी भारत आए और धीरे-धीरे व्यापारिक संबंध स्थापित किए। विशेष रूप से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में लंबे समय तक शासन किया।
अगर साहित्यिक दृष्टि से बात करें तो भारत को “खोजने” का विचार आधुनिक समय में प्रसिद्ध हुआ। स्वतंत्रता के बाद, भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को समझने के लिए कई लेखकों ने काम किया। इनमें सबसे प्रसिद्ध नाम पंडित जवाहरलाल नेहरू का है, जिन्होंने अपनी पुस्तक “भारत की खोज” (The Discovery of India) में भारत के इतिहास, संस्कृति और सभ्यता का गहराई से वर्णन किया। उन्होंने यह पुस्तक 1942-1946 के बीच जेल में रहते हुए लिखी थी।
नेहरू की यह पुस्तक भारत की आत्मा, विविधता और ऐतिहासिक विकास को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसमें उन्होंने भारत को एक प्राचीन, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से विविध देश के रूप में प्रस्तुत किया है।
निष्कर्ष रूप में, भारत की “खोज” किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं हुई थी क्योंकि भारत एक प्राचीन सभ्यता है। वास्को द गामा ने भारत का समुद्री मार्ग खोजा था, जबकि नेहरू ने भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को समझाने के लिए “भारत की खोज” नामक पुस्तक लिखी थी।
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