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Ram kumar

Updated on Jun 4, 2026education

शून्य (Zero) का आविष्कार कब और किसने किया?

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Updated on Jun 4, 2026

शून्य (Zero) का आविष्कार गणित के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक माना जाता है। शून्य केवल एक अंक नहीं है, बल्कि यह आधुनिक गणित, विज्ञान और कंप्यूटर तकनीक की नींव है।

शून्य की अवधारणा सबसे पहले प्राचीन भारत में विकसित हुई थी। लगभग 5वीं शताब्दी ईस्वी में भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट ने स्थान मूल्य प्रणाली (place value system) में शून्य जैसी अवधारणा का उपयोग किया था। हालांकि उन्होंने शून्य को एक स्वतंत्र अंक के रूप में पूरी तरह परिभाषित नहीं किया, लेकिन उनके कार्य ने आगे की गणितीय प्रगति की नींव रखी।

शून्य को एक पूर्ण अंक के रूप में स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का श्रेय ब्रहमगुप्त (Brahmagupta) को दिया जाता है। उन्होंने लगभग 628 ईस्वी में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “ब्रह्मस्फुट सिद्धांत” में शून्य के नियम बताए। उन्होंने बताया कि किसी संख्या में शून्य जोड़ने या घटाने पर संख्या वही रहती है, और शून्य से संबंधित गणितीय नियम भी दिए। इसी कारण उन्हें शून्य का वास्तविक आविष्कारक माना जाता है।

भारत में विकसित शून्य की अवधारणा धीरे-धीरे अरब देशों तक पहुँची। अरब गणितज्ञों ने इसे अपनाया और इसे “सिफर” (sifr) कहा। बाद में यह यूरोप पहुँचा, जहाँ इसे “zero” नाम मिला। इस तरह शून्य पूरी दुनिया में फैल गया और आधुनिक गणित का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

शून्य का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह संख्या प्रणाली को पूरा करता है। इसके बिना स्थान मूल्य प्रणाली (जैसे 10, 100, 1000) संभव नहीं होती। इसके अलावा, शून्य ने गणना, बीजगणित (algebra), कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग के विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।

आज के डिजिटल युग में भी शून्य का उपयोग हर जगह होता है—कंप्यूटर की बाइनरी भाषा (0 और 1), गणितीय समीकरण, और वैज्ञानिक गणनाओं में।

निष्कर्ष रूप में, शून्य का विकास प्राचीन भारत में हुआ और इसे एक पूर्ण अंक के रूप में स्थापित करने का श्रेय ब्रह्मगुप्त को जाता है। यह खोज मानव सभ्यता की सबसे महान उपलब्धियों में से एक है, जिसने आधुनिक विज्ञान और तकनीक की दिशा ही बदल दी।

यहां एक और रोमांचक चर्चा पढ़ें: चाय का आविष्कार कब और कहाँ हुआ?

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Updated on May 27, 2026

आपको इस बात को जान कर हैरानी होगी मगर यह सच है शून्य का अविशगकार किसने किया यह बात एक रहस्य बनी हुई है | तो चलिए आपको बतातें है अगर ऐसा सच सच है तो यह कब और कैसे आविष्कार किया गया | मगर भारतीय ‌गणितज्ञ वर्षों से ये दावा करते रहे हैं कि शून्य का अविष्कार भारत में किया गया था कहा जाता है की शून्य का आविष्कार भारत में पांचवीं शताब्दी के मध्य में शून्य का आविष्कार आर्यभट्ट जी ने किया उसके बाद ही यह दुनिया में प्रचलित हुई लेकिन अमेरिका के एक गणितज्ञ कहना है कि शून्य का आविष्कार भारत में नहीं हुआ था। अमेरिकी गणितज्ञ आमिर एक्जेल ने ‌सबसे पुराना शून्य कंबोडिया में खोजा है।

इतना ही नहीं बल्कि सर्वनन्दि नामक दिगम्बर जैन मुनि द्वारा मूल रूप से प्रकृत में रचित लोकविभाग नामक ग्रंथ में शून्य का उल्लेख सबसे पहले मिलता है। इस ग्रंथ में दशमलव संख्या पद्धति का भी उल्लेख है और यह उल्लेख सन् 498 में भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलवेत्ता आर्यभट्ट ने आर्यभटीय ([ सङ्ख्यास्थाननिरूपणम् ]) में कहा है और सबसे पहले भारत का ‘शून्य’ अरब जगत में ‘सिफर’ (अर्थ – खाली) नाम से प्रचलित हुआ लेकिन फिर लैटिन, इटैलियन, फ्रेंच आदि से होते हुए इसे अंग्रेजी में ‘जीरो’ (Zero) कहते हैं।

मगर सोचने वाली बात है की इतने वर्षों बाद भी यह बात भारत के लिए एक रहस्य बना हुआ है की क्या सच में जीरो भारत का अविष्कार है या किसी और का।

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Henry Hoe
Answered on Jan 20, 2020
शून्य का आविष्कार किसने और कब किया यह आज तक यह जानकारी छुपी हुई है लेकिन भारतीय ‌गणितज्ञ वर्षों से ये दावा करते रहे हैं कि शून्य का अविष्कार भारत में किया गया था कहा जाता है की शून्य का आविष्कार भारत में पांचवीं शताब्दी के मध्य में शून्य का आविष्कार आर्यभट्ट जी ने किया उसके बाद ही यह दुनिया में प्रचलित हुई लेकिन
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