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Updated on Jul 22, 2023news-current-topics

कृष्ण को लड्डू गोपाल बोलने की प्रथा का शुरुआत कब हुआ?

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Answered on Aug 19, 2022

श्री कृष्ण के अनगिनत नाम है, जैसे -माधव, बंशीधर, गोपाल, कन्हैया इत्यादि उनके हर गुणों को दर्शाता हुआ उनका नाम बहुत ही प्यारा है। ‌ प्रश्न यह है कि श्री कृष्ण का नाम लड्डू गोपाल कैसे पड़ा इसके पीछे की प्रथा क्या है इसके बारे में हम आपको बताने जा रहे है।

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श्री कृष्ण का नाम लड्डू गोपाल कैसे पड़ा?

इसके बारे में एक कथा है कि ब्रजभूमि में उनके एक बहुत बड़े भक्त कुम्भनदास रहते थे। उनका रघुनंदन नाम का एक पुत्र भी था। ‌ कुंभन दास जी के पास बांसुरी बजाते हुए श्री कृष्ण की एक मूर्ति भी थी जिसकी वे पूजा करते और प्रभु की भक्ति में लीन रहते थे।

कुंभनदास को भागवत कथा करने के लिए वृंदावन से निमंत्रण आया। लेकिन वे वहां जाने से मना कर दिए। लेकिन लोगों न उन्हें समझाया कि भागवत कथा करने के बाद वे अपने घर आ जाया करें।‌ अपने घर में पूजा पाठ भी कर ले, इस तरह से नियम टूटेगा नहीं।

भगवत कथा सुनाने के लिए वृंदावन जाते तो वे अपने बेटे को यह कहकर जाते कि हमने ठाकुर जी के लिए भोग बना दिया है। समय से भोग लगा देना। पुत्र ने वैसा ही किया। भोजन की थाली ठाकुर जी के सामने रखी। सहज मन से उन्होंने ठाकुर जी को भोग लगाया। आपको बता दें कि कूंभनदास के बेटे रघुनंदन बहुत छोटे थे।

बालक रघुनंदन ने सोचा कि भगवान अपने हाथ से भोजन करेंगे, जैसे हम लोग खाते हैं। रघुनंदन ने बार-बार ठाकुर जी से निवेदन किया। लड्डू जस का तस रखा रहा, भगवान ठाकुर जी ने नहीं खाया। बालक रघुनंदन रोते-रोते उदास हो गए और बोलने लगे ओ ठाकुर जी! ओ ठाकुर जी! भोग तो लगाओ! तब ठाकुर जी ने बालक का रूप धारण किया और भोजन करने बैठ गए, यह देख रघुनंदन बहुत प्रसन्न हो गए।

रात को जब कूंभनदास भागवत कथा कहकर वापस लौटे तो उन्होंने बेटे से कहा कि बेटे क्या तुमने ठाकुर जी को भोग लगाया था।

बालक रघुनंदन ने प्रसन्नता से कहा, "हां लगाया था।"

तब उन्होंने प्रसाद मांगा तो पुत्र ने कहा कि ठाकुर जी ने पूरा प्रसाद खा लिया‌ ।

उन्होंने सोचा कि बेटे को भूख लगी रही होगी इसलिए बालक ने प्रसाद खा लिया होगा। ‌

हर दिन यही सिलसिला होने लगा। बालक रघुनंदन भोग लगाते और बाल रूप में ठाकुर जी आकर भोग खा जाते, तब पिता फिर अपने पुत्र से पूछते कि भोग लगाया तो प्रसाद लाओ। रघुनंदन वही बात बता देता कि ठाकुर साहब पूरा भोग खा गए।

हर दिन यही बात सुनते सुनते कूंभनदास को शक हुआ कि कहीं उनका पुत्र झूठ तो नहीं बोल रहा है। ‌ ‌ एक दिन उन्होंने सोचा कि छुप कर देखेंगे आखिर बात क्या है।

जब रघुनंदन भोग लगाया तो देखा बालक रूप में ठाकुर जी लड्डू खा रहे हैं, वे तुरंत दौड़ते-दौड़ते आए और बालक रूप में प्रकट हुए ठाकुर जी के पैर पर गिर गए। इसी समय बालक ठाकुर जी के हाथ में एक लड्डू और दूसरा लड्डू उनके मुंह में था। इसके बाद वे अंतर्ध्यान हो गए। इसी प्रतिरूप का पूजा होने लगी और उनका नाम पड़ गया लड्डू गोपाल।

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Answered on Jul 21, 2023

दोस्तों आप सभी को पता है कि कृष्ण भगवान को लड्डू गोपाल भी बोला जाता है पर क्या आप जानते हैं कि कृष्ण भगवान को लड्डू गोपाल बोलने की प्रथा का शुरुआत कब हुआ नहीं जानते हैं तो चलिए हम आपको बताते हैं रघुनंदन ने भगवान के लिए थाली परोसी उस थाली में खाने के लिए लड्डू रखे हुए थे तब भगवान बाल रूप में प्रकट होकर उन लड्डू को खाया। और एक बार जब भगवान फिर से लड्डू खा रहे एक हाथ में लड्डू और एक मुंह में लड्डू तो इतने में रघुनंदन आ गए और भगवान के चरणों में अपना सिर झुकाया तभी भगवान वहीं पर भगवान स्थित हो गए उन्हें पहले ही गोपाल कहा जाता था लेकिन उनके एक हाथ में लड्डू था इसीलिए फिर उनका नाम लड्डू गोपाल पड़ गया और तभी से भगवान श्री कृष्ण को लड्डू गोपाल बोला जाने लगा।

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Answered on Jul 22, 2023

क्या आप जानते हैं कि नटखट भगवान श्री कृष्ण जी का नाम लड्डू गोपाल कैसे पड़ा यदि आप नहीं जानते हैं तो चलिए हम आपको इसकी जानकारी देते हैं ब्रजभूमि में भगवान श्री कृष्ण की एक परम भक्त कुंभन दास रहते थे जिनका 1 पुत्र रघुनंदन था कुंभन दास हर वक्त भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे और पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते थे वह हर वक्त भगवान श्री कृष्ण के पास बैठे रहते थे वे उन्हें छोड़कर कहीं नहीं जाते थे। हर रोज की तरह रघुनंदन भगवान श्री कृष्ण को थाली में भोग परोस कर रखते थे और फिर गोपाल यानी भगवान श्री कृष्ण को बुलाते थे लेकिन एक दिन उन्होंने थाली में लड्डू रखा और भगवान श्री कृष्ण को भोग के लिए बुलाया तो भगवान श्री कृष्ण बाल रूप में आकर लड्डू का भोग लगाने लगे तभी से ही रघुनंदन दास ने भगवान श्री कृष्ण का नाम लड्डू गोपाल रख दिया।

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