सूर्य मंदिर ओडिशा के शहर पूरी में स्थित है। कोर्णांक कस्बे में सूर्य मंदिर का निर्माण गंग वंश के राजा नरसिंहदेव ने 13वीं शताब्दी में बनवाया था। कोर्णाक कस्बे में होने की वजह से इसमं कोर्णाक सूर्य मंदिरकहा गया। यह मंदीर विश्व धरोहर स्थल है।
- मंदिरको एक विशाल रथ के आकार का बनाया गया है। यह मंदिर सूर्य देव भगवान की आराधना के लिए बनाया गया था।
- कोर्णाक सूर्य मंदिर के दोनो और 12 -12 पहिये है । लोगो कहना है कि यह पहिये 12+12 =24 घंटे के समान है। लेकिन कई लोगो का यह भी कहना है कि यह 12 महीने का प्रतिक है।
- सात घोड़ो को सप्ताह के सात दिनों का प्रतिक माना गया है।
- भारत और दुनिया के कई कोनो लाखो पर्यटक सूर्य मंदिर को देखने आते है। इसकी बनावट और भव्य कालाकृति देखने में अद्भुत है। सूर्य मंदिरको देखने के साथ पर्यटक इसका इतिहास जानने मे भी दिलचस्पी रखते है।
- मंदिरकी चुम्बकीय शक्ति की वजह से समुद्री जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो जाते थे इसलिए इसे ब्लैक पैगेडो भी कहा जाता था।
- इस मंदिरकी वस्तुकला को बनाने में लगभग 1200 कलाकारो की मेहनत है और यह 12 साल मे बनकर तैयार हुआ था।
- यहाँ सूर्य भगवान की पूजा की जाती है। इस मंदिर की ऐसी बनावट है कि मंदिर के ऊपरी हिस्से में जो चुंबक है उसके द्वारा मंदिरकी प्रमुख प्रतिमा हवा में तैरती हुई दिखाई दे।
- मंदिरके मुख्य द्वार पर दो शेर की मूर्ति बनी हुई है। शेर के पैरो तले दो हथियो है। और उन हथियो के नीचे मनुष्य की प्रतिमा बनी हुई है।
- मंदिर मे चुम्बको के द्वारा जैसे ही सुबह की पहली सूर्य किरण मंदिरमें पड़ती है प्रतिमा की जगह हीरे जैसी चमकने लगती है।
- ब्रिटिश सरकार ने इन चुम्बकीय पत्थरो को हथियाने के कारण इन चुम्बको को निकलवा दिया था।
- कोर्णाक सूर्य मंदिरमें हर हिस्से मे देवी देवता, संस्क्रति , को दर्शाया गया है। यह चित्र आकर्षित और अद्भुत है।





