दोस्तों क्या आप जानते हैं कि मनुष्य की लार में कौन सा एंजाइम पाया जाता है शायद आपको मालूम नहीं होगा तो कोई बात नहीं चलिए हम आपको बताते हैं कि मनुष्य की लार में कौन सा एंजाइम पाया जाता है दोस्तों मनुष्य की लार में टाइलिन नामक एंजाइम पाया जाता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि लार का काम भोजन को लुग्धी बनाने का है तभी हम भोजन को निगल पाते हैं। इसके अलावा टाइलिंग एंजाइम का काम स्टार्च को शर्करा में तोड़ने का होता है। जो आगे चलकर हमारे भोजन को पचाने का कार्य करता है।

मानव की लार में कौन सा एंजाइम पाया जाता है?
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दोस्तों आज उसमें हम आपको बताएंगे कि मानव की लार में कौन सा एंजाइम पाया जाता है तों मानव के लार में टाइलिन नाम का एंजाइम पाया जाता है। लार का काम भोजन को लुगदी करना होता है जिससे भोजन आसानी से निकला जा सके टायलिन एंजाइम का काम स्टार्स को शर्करा में तोड़ने का होता है लार ग्रंथि के कारण ही भोजन का मुंह में ही पचाना शुरू करना होता है। टायलिन एंजाइम का एक प्रमुख कार्य बैक्टीरिया को जमने से रोकना है।

मानव की लार में कौन सा एंजाइम पाया जाता है?
मानव की लार में विभिन्न प्रकार के एंजाइम पाए जाते हैं जो खाद्य पदार्थों को पचाने और अलग करने में मदद करते हैं। उनमें से एक महत्वपूर्ण एंजाइम अमिलेज होता है, जो कार्बोहाइड्रेट्स को पचाने में मदद करता है।
1.अमिलेज एंजाइम:- अमिलेज एंजाइम का उत्पादन मुख्य रूप से पैंक्रिएटिक लेप और जीवन रक्त में कीटोसायडोसिस के समय कर बैक्टीरियों द्वारा किया जाता है। अमिलेज के अलावा, लार में अन्य एंजाइम भी होते हैं जैसे की लिपेज जो वसा को तोड़ता है, और प्रोटेज की जो प्रोटीन को पचाने में मदद करता है।
- कैलिकेरिन एंजाइम (Salivary kallikrein)
वैसोडिलेटर का उत्पादन करने में मदद करता है, जो रक्त वाहिकाओं को पतला करने में मदद करता है। इस प्रकार, यह शरीर में रक्त प्रवाह को संतुलित रखता है।
लेकिन, आमतौर पर, लार में कैलिकेरिन की मात्रा बहुत कम होती है। कुछ स्थितियों में, जैसे कि बुखार और अत्यधिक थकान, इस एंजाइम की मात्रा बढ़ सकती है। इसलिए, यह एक सामान्य तौर पर शरीर में वैसोडिलेशन के लिए उपयोग नहीं किया जाता है।

- लार में एमाइलेज (Amylase) एंजाइम होता है,
जो स्टार्च को माल्टोज़ और डेक्सट्रिन जैसे सरल शर्करा में रूपांतरित करने में सक्षम होता है। यह अन्य शर्कराओं में रूपांतरित किए जाने से पहले छोटी आंत में जाता है। इस प्रक्रिया में स्टार्च को माल्टोज़, डेक्सट्रिन और अन्य सरल शर्करों में टूट दिया जाता है, जो शरीर के लिए उपयोगी होते हैं। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो शरीर के पाचन प्रक्रिया का हिस्सा होती है।
- लाइपेस एंजाइम (Lingual lipase) :- एक एंजाइम होता है जो ट्राइग्लिसराइड्स को फैटी एसिड और ग्लिसराइड में तोड़ता है और इस प्रकार आपके शरीर में फैट पाचन करता है।
लाइपेस का महत्व :- नवजात शिशुओं को उनकी मां के दूध में मौजूद फैट को पचाने में मदद करता है। यह बच्चों के शरीर के विकास के लिए आवश्यक होता है। लेकिन, जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं, उनके पाचन तंत्र के अन्य अंग पाचन क्रिया में मदद करने लगते हैं जिससे लार में लाइपेस की मात्रा कम होती जाती है।
मानव शरीर में पाचन की क्रिया मुंह से ही शुरू हो जाती है, और इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हमारी लार (Saliva) निभाती है। मानव की लार में मुख्य रूप से टायलिन (Ptyalin) नामक एंजाइम पाया जाता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में लार एमाइलेज (Salivary Amylase) भी कहते हैं। इसके अलावा लार में एक और महत्वपूर्ण एंजाइम होता है जिसे लाइसोसोम (Lysozyme) कहा जाता है।
इन दोनों एंजाइमों के कार्य और महत्व नीचे विस्तार से समझाए गए हैं:
1. लार एमाइलेज या टायलिन (Salivary Amylase / Ptyalin)
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मुख्य कार्य: यह एंजाइम हमारे भोजन में उपस्थित जटिल कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च या मांड) को सरल शर्करा (मॉल्टोज़ और डेक्सट्रिन) में तोड़ने का काम करता है।
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पाचन की शुरुआत: जब हम रोटी या चावल चबाते हैं, तो कुछ समय बाद वे हमें मीठे लगने लगते हैं। ऐसा इसी टायलिन एंजाइम के कारण होता है, जो स्टार्च को ग्लूकोज/मॉल्टोज में बदल देता है। हमारे भोजन का लगभग 30% स्टार्च मुंह के भीतर ही पच जाता है।
2. लाइसोसोम (Lysozyme) - सुरक्षा कवच
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मुख्य कार्य: यह एक जीवाणुरोधी (Anti-bacterial) एंजाइम है।
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कीटाणुओं का नाश: जब हम भोजन करते हैं, तो हवा या हाथों के माध्यम से कई हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीव भी हमारे मुंह में प्रवेश कर जाते हैं। लाइसोसोम एंजाइम इन बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति को नष्ट करके उन्हें मुंह में ही मार डालता है, जिससे हम कई तरह के संक्रमणों और बीमारियों से बच जाते हैं।
लार के अन्य घटक
लार में केवल एंजाइम ही नहीं होते, बल्कि इसमें 99% पानी, बलगम (Mucus), और कुछ खनिज लवण (इलेक्ट्रोलाइट्स) भी होते हैं, जो भोजन को गीला, चिकना और निगलने योग्य बनाते हैं।
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