भारत के किस भाग को चिकन नेक के नाम से जाना जाता है ?
दोस्तों बंगाल विभाजन के समय के बाद 1947 में सिलीगुड़ी कॉरिडोर को बनाया गया था इसी सिलीगुड़ी कॉरिडोर को अब चिकन नेक के नाम से जाना जाता है। यह पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित है एवं सिलिगुड़ी कॉरिडोर के माध्यम से ही भारत के पूर्वोत्तर राज्य भारत से जुड़ पाते हैं। भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्य यानी की अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा, सिलीगुड़ी कॉरिडोर के माध्यम से ही भारत से जुड़ पाते हैं।
जिसके कारण इस इलाके की भू राजनीतिक महत्वता बढ़ जाती है। इसके आसपास नेपाल और बांग्लादेश है। भूटान भी इस सिलीगुड़ी कॉरिडोर के उतरी किनारे पर स्थित है। अगर सिलीगुड़ी शहर की बात करें तो यह मुख्य तौर से पश्चिम बंगाल राज्य में ही आता है एवं इसी सिलीगुड़ी शहर के माध्यम से भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, दार्जिलिंग की पहाड़ियां, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत शेष भारत से जुड़े हुए हैं। जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत का विभाजन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच पनपी दुश्मनी का परिणाम था और इसी विभाजन के बाद यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नेक के नाम से भी जाना जाता है वह विशेष रूप से काफी संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है।

विभाजन के बाद पूर्वी बंगाल जिसे हम बांग्लादेश के नाम से भी जानते हैं इसका गठन हुआ और बांग्लादेश के गठन के बाद ही भारत के सभी पूर्वोत्तर भागों में एक भौगोलिक अवरोध बन गया। अब केवल मात्र यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही है जो पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत से जोड़ने में मदद करता है क्योंकि यह एक बिंदु पर लगभग 89 हजार फिट संकीर्ण है जिसके मदद से पूर्वोत्तर भारत शेष भारत से जुड़ पता है। इसके अलावा चिकन नेक के दक्षिण पश्चिम भाग में बांग्लादेश स्थित है एवं उत्तर की तरफ यह चीन के बीच में स्थित है।
जिसके करण सिलीगुड़ी कॉरिडोर के दूसरी तरफ के समुद्र तक जाने के लिए कोलकाता से होकर गुजरना पड़ता है। सिलिगुड़ी कॉरिडोर में एक चुंबी घाटी भी स्थित है जो की एक खंजर जैसा हिस्सा है एवं यह सिक्किम और भूटान के बीच स्थित है। उत्तर में चीन के बीच स्थित होने के कारण चिकन नेक के इस हिस्से में यदि चीन की सेना चाहे तो कुच करके पश्चिम बंगाल, भूटान समेत सभी पूर्वोत्तर भारत के हिस्से काट सकता है। जिसके कारण देश के लगभग 5 करोड लोगों पर प्रभाव पड़ेगा।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर कुल 3 देश बांग्लादेश, भूटान एवं नेपाल के बीच में आता है। जिसके कारण ही यह एक काफी संवेदनशील क्षेत्र है एवं यहां पर सीमा सुरक्षा बल तथा मुख्य तौर पर पश्चिम बंगाल के पुलिस द्वारा देखरेख की जाती है एवं देखरेख में भारतीय सेना भी शामिल होती है।
किंतु चिकन नेक का भूभाग शंकर होने के कारण यह सुरक्षा की दृष्टिकोण से एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र बन जाता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में भारी वर्षा बाढ़ और भूस्खलन जैसी कई प्राकृतिक आपदाओं की संभावना भी रहती है जो यातायात और संचार को बाधित करती है।
खबरों के मुताबिक हाल ही में बांग्लादेशी एवं नेपाली विद्रोहियों ने अवैध तरीके से क्रॉसिंग करने के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर को अपना केंद्र बनाया था। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल यही एक मार्ग है जिसके जरिए भारत अपने पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क कर सकता है।

बांग्लादेश और भारत के बीच अब तक कोई व्यापारिक समझौता नहीं है इसलिए भारत व्यापार के लिए बांग्लादेश की जमीन की मदद नहीं ले सकता इसके अलावा सिलिगुड़ी कॉरिडोर क्षेत्र में नशीले पदार्थ और अवैध हथियारों का व्यापार काफी तेजी से हो रहा है। बांग्लादेश एवं नेपाल के आतंकवादी भाग कर यहीं आकर शरण लेते हैं। जिसके कारण यह इलाका दिन प्रतिदिन खतरे से भरता जा रहा है।
सरल शब्दों में कहे तो नेपाल, भूटान चीन और बांग्लादेश से घिरा एक शंकर भूभाग जो भारत के आठ पूर्वोत्तर क्षेत्र को शेष भारत से जोड़ने में मदद करता है उसे ही चिकन नेक के नाम से जाना जाता है एवं यह भूभाग कुल 22 किलोमीटर चौड़ाई लिए हुए हैं
जिसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहते हैं तथा यह सिलिगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए भू राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद ही महत्वपूर्ण है। इसकी संकरी चौड़ाई ही इसे सुरक्षा की दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील बनाती है एवं भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के साथ भारत को जोड़ने के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही एकमात्र मार्ग है।
जिसकी देखरेख करना हमारे देश की जिम्मेदारी है वरना हमारे देश के साथ पूर्वोत्तर राज्यों का संपर्क एवं व्यापार टूट जाएगा।







