जैसा कि आप जानते हैं कि हरे पेड़-पौधे की पत्तियां होती हैं। आपने अपने स्कूल के पाठ्यक्रम में बहुत पहले पढ़ा होगा कि पत्तियां ही पेड़-पौधों के लिए भोजन बनाती हैं। इन पत्तियों में ही प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस प्रोसेस) द्वारा भोजन पौधों के लिए तैयार होता है। लेकिन कुछ ऐसे पौधे होते हैं, जिनमें एक भी पत्तियां नहीं होती हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि थार मरुस्थल में पाए जाने वाले कई पौधे हैं, जो एक प्रकार के कैक्टस होते हैं, इनमें पत्तियां नहीं पाई जाती हैं।

इसी तरह का एक पौधा है, जो मरुस्थली क्षेत्र में पाया जाता है, जिसका नाम करील (करीर), इसमें पत्तियां नहीं होती है।
आपको बता दें कि मरुस्थली जगह पर कांटेदार पेड़-पौधे की पत्तियां गद्देदार- मोटे रूप में परिवर्तित होकर कांटे की तरह बन जाता है। मरुस्थल में पानी की कमी होती है इसलिए कांटेदार वृक्ष वहां पाए जाते हैं, जिनमें पत्तियां नहीं होती है। यह होती है तो बहुत कम और छोटी होती है।
दोस्तों कई ऐसे कैक्टस हैं, जिन्हें हम अपने घरों में भी लगाते हैं, उनमें भी पत्तियां नहीं होती है बल्कि पत्तियों का रूपांतरण उसके तने या शाखाओं के रूप में हो जाता है। नागफनी पौधा बिना पत्ती वाला कैक्टस है। आपको बता दें जितने भी कैक्टस हैं, बिना पानी के महीनों जीवित रह सकते हैं।
दुनिया का सबसे छोटा पौधा जिसमें फूल होता है लेकिन एक भी पत्तियां नहीं होती उसका नाम क्या है?
एराइजा (Wolffia arrhiza) नाम का या छोटा पौधा है जिसमें फूल होता है लेकिन एक भी पत्तियां नहीं होती है।
अगर देखा जाए तो कुछ ब्रायोफाइट्स कैटेगरी के पौधे जिनके ना तो जड़ होते हैं, ना तना और ना ही पत्तियां होती है। ब्रायोफाइट्स श्रेणी चाहिए मार्केन्शिया (Marchantia), फ्यूनेरिया (Funaria), एन्थोसिरोस, (Anthoceros), रिक्सिया (Riccia) यह कुछ पौधों के उदाहरण हैं जिनमें पत्तियां, तना और जड़े नहीं होती है। इनकी पूरी संरचना एक थैली जैसी होती है, जिसे थैलस कहते हैं।

कैक्टस में पत्तियां क्यों नहीं होती है?
आपको बता दें राजस्थान जैसे मरुस्थली स्थान पर ऐसे बहुत से कैक्टस पाए जाते हैं जिनमें पत्तियां नहीं होती है। इसका कारण यह है कि इन क्षेत्रों में पानी की बहुत कमी होती है इसलिए पानी की आवश्यकता को दूर करने के लिए कुदरत से इनकी पत्तियों को काँटों में बदल देता है।