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Asha Hire· 5 साल पहले
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किस विटामिन की कमी से नींद नही आती है

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ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया04/17/23

शरीर मे विटामिन बी 12 की कमी होने से नीद नहीं आती है, इस विटामिन की कमी से नीद न आने के कारण डिप्रेशन भी हो सकता है और डिप्रेशन मे जाने के कारण हम कई बीमारियों का शिकार भी हो जाते है।


शरीर मे विटामिन बी 12 की कमी क़ो पूरा करने के लिए रोजाना दूध, पनीर, अंडा, दही आदि का सेवन करने से विटामिन बी 12 कमी पूरी हो जाती है और हमें अच्छी नीद आने लगती है।

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जवाब दिया गया01/21/23

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि एक अच्छी नींद हमारी स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी है लेकिन आज के समय में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें नींद ना आने की समस्या रहती है इसकी मुख्य वजह आपके खानपान सही तरीके से ना होने की वजह से भी हो सकता है और साथ ही कुछ विटामिंस जैसे विटामिन डी और विटामिन B6 की कमी होने की वजह से रात को नींद नहीं आती है।

इसलिए विटामिन डी की प्राप्ति के लिए आप धूप की सहायता ले सकते हैं या फिर मछली अंडा के सेवन से विटामिन डी की कमी को पूरा किया जा सकता है।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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जवाब दिया गया09/20/21

भोज्य पदार्थों में करीबन 50 रासायनिक पदार्थों का समावेश होता है। जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है। साथ ही यह शरीर में होने वाली विभिन्न क्रियाओं एवं परिवर्तनों में भाग लेते हैं, क्योंकि यह तत्व हमारे शरीर का पोषण करते हैं। इसलिए इन्हें पौष्टिक तत्व या पोषण तत्व कहा जाता है।

यह तत्व मुख्यतः छः है।

  • प्रोटीन,
  • कार्बोहाइड्रेट,
  • वसा,
  • खनिज,
  • लवण,
  • विटामिन और जल।

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विभिन्न भोज्य पदार्थों फलो सब्जियों आदि में इन पौष्टिक तत्वों की मात्रा भिन्न-भिन्न होती है। किसी में किसी तत्व की मात्रा अधिक होती है, तो किसी में किसी दूसरे की प्रत्येक पौष्टिक तत्व का शरीर में महत्वपूर्ण कार्य होता है। हमारे शरीर के लिए भोजन के यह तत्व एक निश्चित मात्रा में आवश्यक होते हैं।

विटामिन- डी अगर कम है, तो केवल नींद के गति को खराब करती है और जितना नींद चाहिए उसे भी कम करती है विटामिन- डी कोशिकाओं (रिसेहटरो) हो जो शरीर की सभी कोशिकाओं में पाए जाते हैं। विटामिन- डी की कमी से सोने और जागने की जो दिनचर्या है उसको प्रभावित करती है।

उदाहरणः बच्चों को शारीरिक वृद्धि और विकास के लिए प्रोटीन की ज्यादा आवश्यकता होती है। जबकि वृद्ध पुरुषों के लिए प्रोटीन की बहुत ही कम मात्रा चाहिए क्योंकि उनमें वृद्धि की आवश्यकता न के बराबर होती है। इसी तरह कार्य की प्रकृति के अनुपात में परिवर्तन होता है।

जैसे- सभी विटामिन सभी व्यक्तियों के लिए एक जैसा आवश्यक नहीं होता है भोजन के पौष्टिक तत्वों की मात्रा अलग - अलग व्यक्ति के लिए अलग - अलग हो सकती है अतः जब किसी व्यक्ति की उम्र, ऊंचाई, वजन कार्य की प्रकृति, लिंग आदि को ध्यान में रखकर उसका भोजन निर्धारित करते हैं तो ऐसा भोजन संतुलित आहार कहलाता है।

ठीक तरह से निद्रा भी ना आना सही आहार न लेने का ही एक कारण है।

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