रामलला की प्राण प्रतिष्ठा (जो 22 जनवरी 2024 को संपन्न हुई थी) में मुख्य यजमान के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उपस्थित थे। हालांकि, कर्मकांड और अनुष्ठान की शुद्धता के लिए देश के कोने-कोने और समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले 15 दंपतियों को 'विशेष यजमान' बनाया गया था।
इन 15 दंपतियों का चयन विशेष रूप से सामाजिक समरसता (Social Harmony) का संदेश देने के लिए किया गया था, जिनमें उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के विभिन्न जातियों के लोग शामिल थे।
इन यजमानों की सूची और उनकी पृष्ठभूमि कुछ इस प्रकार थी:
उत्तर भारत (North India)
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रामचन्द्र खरादी: उदयपुर (राजस्थान) से, जो वनवासी कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं (अनुसूचित जनजाति)।
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राम कुई जेमी: असम के रहने वाले हैं।
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अनिल चौधरी: काशी (वाराणसी) के डोम राजा परिवार से, जो सामाजिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
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हृदय लाल खैरवार: काशी के ही रहने वाले हैं।
दक्षिण भारत (South India)
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लिंगराज वासवराज अप्पा: कर्नाटक के कलबुर्गी से।
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अदल्लरसन: तमिलनाडु से।
पूर्वी भारत (East India)
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अरुण चौधरी: हरियाणा के पलवल से (ओबीसी वर्ग)।
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कौशलेश मिश्रा: काशी से।
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गुरुचरण सिंह गिल: जयपुर से।
अन्य प्रमुख यजमान
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दिलीप वाल्मीकि: लखनऊ से (वाल्मीकि समाज का प्रतिनिधित्व)।
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कृष्ण मोहन: काशी के रमेश जयसवाल परिवार से।
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विट्ठल राव कमनले: महाराष्ट्र के लातूर से।
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रविन्द्र नारायण: बिहार से।
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जतिन लाल: ये भी इस अनुष्ठानिक प्रक्रिया का हिस्सा थे।
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रामदत्त चक्रधर: मेरठ, उत्तर प्रदेश से।
इनका चयन क्यों किया गया था?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंशा थी कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल न बने, बल्कि यह अखंड भारत और सामाजिक एकता का प्रतीक हो। यही कारण था कि यजमानों की सूची में दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग और देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को स्थान दिया गया।
इन दंपतियों ने 16 जनवरी से शुरू हुए अनुष्ठानों में भाग लिया और मुख्य प्राण प्रतिष्ठा के समय भी मौजूद रहे।