ऐसा कोई सपना जिसको सोचते ही व्यक्ति अपना आपा खो देता है और बहुत ज्यादा घबराने लगता है। जिसके कारण उसके दिमाग में उस सपने को लेकर एक डर सा बैठ जाता है। इसके अलावा ऐसे कई बच्चे होते हैं कि जिन्हे एग्जाम के रिजल्ट से डर लगता है कि वह फेल होंगे या पास होंगे उनके मम्मी पापा उनके साथ क्या करेंगे उसी बारे में सोचना और उस सोच को अपने दिमाग में हावी कर लेना इसको भी एक प्रकार का डर कहते हैं। इसके अलावा जब बच्चा कोई गलती करता है तो उसे इस बात का डर रहता है कि उसको कौन सी सजा दी जाएगी।
डर किसे कहते हैं?
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दोस्तों इस पोस्ट में हम बात करने वाले हैं डर की। डर किसे कहते हैं डर क्या होता है डर एक नकारात्मक भावना होती है भावना हमेशा अनुकूलित नहीं होती है। यह एक अच्छी भावना नहीं है डर के दो प्रकार होते हैं काल्पनिक और वास्तविक। काल्पनिक अंधविश्वासी चीजों का भय होता है। जब हम किसी कार्य को करने जाते हैं और उसमें हमें एक ही डर रहता है कि हम उस कार्य में सफलता मिलेगी या नहीं। या फिर जब बच्चा स्कूल में फेल हो जाता है तो वह अपनी रिपोर्ट कार्ड अपने मम्मी पापा को दिखाने से डरता है। फिर जब आप कोई हॉरर मूवी देखते हैं तो कुछ समय के लिए आपको डर लगता है।

डर एक ऐसा वहम होता है जो इंसान को अंदर से एकदम कमजोर कर देता है जो व्यक्ति अपने अंदर डर उत्पन्न कर लेता वह अपने जीवन में आगे नहीं बढ़ सकता है। दरअसल डर एक यैसी नकारात्मक शक्ति होती है जिसके कारण से ना तो इंसान अच्छे से सो पाता और ना ही उसे कोई काम करने में भावुक इच्छा जागृत नहीं होती है डर के कारण वह कुछ भी कार्यों को लेकर असफल रहता है.।.jpeg&w=750&q=75)
दरअसल मे यदि किसी के दिमाग़ मे किसी चीज को लेकर डर बैठ जाता है, उसके दिमाग़ से डर निकालना बहुत ही मुश्किल होता है। क्योंकि बहुत से ऐसे लोग होते है, जो किसी ना किसी चीज से डरते है, जैसे कि बहुत से लोग भूत, चुड़ैल से डरते है, उनको रात मे सोते समय कोई बुरा सपना आ जाता है, तो वह उठ कर बैठ जाते है और जो सपने मे उन्होंने देखा है उसी बात को आपने मन मे बैठा लेते है, और उस सपने को सच समझकर डरने लगते है। लेकिन सच कहे तो ऐसा कुछ नहीं होता है, सिर्फ लोगो के मन का वहम होता है, डर जैसी कोई चीज होती ही नहीं है। 
पहले तो ये समझ लेते है की वाइफ स्वैपिंग होती क्या ह ?
स्वैप करने का मतलब होता है अदला-बदली करना. वाइफ स्वैपिंग में या तो दो पुरुष या पुरुषों का समूह आपस में मिलकर अपनी पत्नियों की अदला बदली करता है. ये अधिकतर एक रात या दिन का अरेंजमेंट होता है. इसके बाद इसका ज़िक्र भी कोई नहीं करता. पहले एक हाई क्लास सोसाइटी का सीक्रेट मानी जाने वाली ये प्रैक्टिस अब मिडल क्लास तक भी पहुंच गई है. इसके बारे में ज्यादा जानकारी अवेलेबल नहीं है, सिवाय चंद ख़बरों के.

नई दिल्लीः देश की राजधानी दिल्ली में wife-swapping के खेल बडे पैमाने पर खेला जा रहा है। युवा कपल इस काले खेल के प्रति आकर्षित भी तेजी से होते जा रहे है। एक स्टिंग ऑपरेशन में इस काले खेल का खुलासा हुआ हैं। जिसमें पति की रजामंदी से एक-दूसरे की वाइफ के साथ संबंध बनाए जाते है। कपल स्वैपिंग के इस खेल में देशभर के करीब 15 से 20 हजार कपल शामिल है।
wife-swapping का यह खेल कुछ बड़ी पार्टियों में भी खेला जाता हैं। इस पार्टी में पार्टनर सेलेक्ट करने का तरीका भी अनोखा होता है। पार्टी के सारे मर्द अपनी गाड़ियों की चाबी एक बाउल में डाल देते हैं। इसके बाद सभी महिलाएं आंखों पर पट्टी बांधकर बाउल से चाबी निकालती है। महिला के पास जिस पुरूष की गाड़ी की चाबी आती हैं, उसे उस पुरूष के साथ wife-swapping का यह खेल खेलना होता है।
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आइए आज हम आपको बताते हैं कि डर किसे कहते हैं। डर यानी कि है हर एक व्यक्ति को किसी ना किसी चीज का डर रहता है। किसी व्यक्ति को रात में अंधेरे में रहने से डर लगती है। व्यक्ति को भूत प्रेत के से डर लगती है, तो किसी व्यक्ति को गहरे पानी से डर लगती है इस तरह डर लगने के कई कारण हो सकते हैं। तो किसी व्यक्ति को ऊंचाइयों से डर लगती है क्योंकि उसे लगता है कि कहीं वह उचाई से गिरकर मर ना जाए इस प्रकार हमारे मन के अंदर डर बैठ जाता है।
डर अथवा भय का महत्वः
डर का महत्व विभिन्न संवेगों में डर एक महत्वपूर्ण संवेग है। अपने स्वाभाविक रूप में यह एक लाभप्रद संवेग है। यह हमें खतरों से बचने के लिए तैयार करता है। परंतु मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से डर सबसे अधिक विनाशकारी संवेग है। इससे शरीर के अंग ऐंठ जाते हैं और रुधिर का प्रवाह रुक जाता है। इस प्रकार मनुष्य की जीवनी शक्ति कम हो जाती है। अमेरिका के प्राकृतिक चिकित्सा के प्रसिद्ध डॉक्टर लिन्हडर का कथन है कि -- जो व्यक्ति भय की अनुभूति बार-बार करता है उसकी पाचन शक्ति भी नष्ट हो जाती है। गले में कुछ गिल्टियाँ होती है,
जिनसे एक प्रकार का रस स्त्रवित होता है जो शरीर की वृद्धि करता है और उसे पुष्ट बनाता है। जब इस रस की कमी होने लगती है, तो शरीर में इतनी क्षमता नहीं रहती कि वह बाहरी बीमारियों के कीटाणुओं का सामना कर सके। भय की अवस्था में ये गिल्टियाँ रस का उत्पादन बंद कर देती है।
डर अथवा भय का विकासः
जन्म के समय यह संवेग अपनी सुप्त अवस्था में होता है। एक छोटा सा शिशु किसी बात से भयभीत नहीं होता। विषैले सांप तथा बिच्छू भी उसमें किसी प्रकार के भय का संचार नहीं करते, इसके विपरीत वह उन्हें पकड़कर खेलना चाहता है। जैसे-जैसे बालक बड़ा होता है उसमें भय की मात्रा बढ़ती जाती है। बड़े व्यक्ति छोटे बालकों की अपेक्षा अधिक भयभीत होते हैं।
डर क्या है? ये प्रश्न आपके मन में कभी ना कभी तो आया ही होगा? इस दुनिया में रहने वाले लगभग सभी लोगों को किसी ना किसी चीज का तो डर अवश्य होता ही है। किसी चीज से डर होने के पीछे कहीं ना कहीं हमारी मानसिकता जुड़ी हुई होती है। जैसे कुछ लोग ऐसे होते हैं जो ऊंचाई से डरते हैं, ऊंचाई से डरने के पीछे लोगों की ये मानसिकता होती है कि वे इस ऊंचाई से गिरकर कहीं घायल या मर ना जाए। इसके अलावा अपनी बीती हुई जिंदगी में कुछ लोग किन्ही चीजो के द्वारा बुरा महसूस किए हुए होते हैं इसलिए वह अपनी आगे की जिंदगी में भी उन्ही चीजो से डरते हैं। कुछ लोगों को भूत प्रेतों से बहुत डर लगता है। डर लगने की एक वजह ये हो सकती है कि बचपन में घर वालों के द्वारा डरावनी कहानियां सुनाई जाती हैं जिससे मन में डर बैठ जाता है और वो डर हमेशा रहता है।
परंतु डर से विजय भी पाई जा सकती है। डर से विजय पाने के लिए मानसिकता बदलनी आवश्यक होगी। 



