बंधुआ मजदूर वह व्यक्ति होता है जो किसी कर्ज, दबाव या मजबूरी के कारण किसी मालिक के लिए लंबे समय तक काम करने के लिए मजबूर होता है। ऐसे मजदूर अक्सर अपनी मर्जी से काम छोड़ नहीं पाते क्योंकि उन पर कर्ज चुकाने या किसी समझौते को पूरा करने का दबाव होता है। कई बार उन्हें बहुत कम मजदूरी मिलती है और काम की परिस्थितियां भी कठिन होती हैं।
बंधुआ मजदूरी को एक प्रकार का शोषण माना जाता है, क्योंकि इसमें मजदूर की स्वतंत्रता सीमित हो जाती है। भारत में बंधुआ मजदूरी को कानूनन अपराध माना गया है और इसे समाप्त करने के लिए सरकार ने विशेष कानून भी बनाए हैं। इसका उद्देश्य मजदूरों को शोषण से बचाना और उन्हें स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन देना है।

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