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komal Solanki's avatar
Mar 14, 2026education

बंधुआ मजदुर किसे कहते है?

8 Answers
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@setukushwaha4049Oct 12, 2021

वह व्यक्ति जो किसी से ऋण के तौर पर कुछ पैसे लेते है और सही समय पर ऋण नहीं चूका पाते है तो उसके बदले मे ऋणदाता के रूप मे श्रम करते थे जिसे बधुआ मजदूर या बंधक मजदूर भी कहलाते है। पिछले ज़माने मे लोग बहुत ही गरीब होते थे उनके पास अपनी लड़की की शादी करने तक के लिए पैसे नहीं होते थे तो वह गाँव के मुखिया से ऋण के तौर पर पैसे लेते थे यदि समय रहते ऋण चूका नहीं पाते थे तो उनको अपने घर, खेत पर बंधुवा मजदूर बना कर खेती करवाते थे और ऋण की भरपाई करवा लेते थे । इसके अलावा ऋण कि भरपाई ना होने पर मजदूरो के घर जमीन सब कुछ गिरबी रख लेते थे।Article image

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@msrajputms5996Oct 13, 2021

मेरे समझ के हिसाब से बंधुआ मजदूर का मतलब होता है । कि जब किसी भी गरीब किसान या मजदूर को कुछ पैसे को जरूरत पड़ती है । तो वह किसी अमीर आदमी से कुछ पैसे उधार लेता है । और किसी भी बजह से बह पैसे समय पर नहीं दे पाता है तो उसे इसके बदले में जिससे उसने पैसे लिए थे उसके लिए उसे काम करना पड़ता है । मेरे समझ से मंधुआ मजदूर का यही मतलब होता है ।Article image

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@krishnapatel8792Jan 4, 2022

बंधुआ मजदूर उसे कहते हैं जो व्यक्ति किसी से ऋण लेता है और उस ऋण को चुका नहीं पाता है तो वह ऋण दाता के घर में श्रम करता है और उसका ऋण चु काता है। इन्हें हम अनुबद्ध श्रमिक या बंधक मजदूर भी कहते हैं। पहले के जमाने में लोग बहुत गरीब हुआ करते थे उनके पास खाने के लिए अन्न नहीं होता था तो तो वे दूसरों के घर से ऋण में पैसे लेते थे और जब वह पैसे को चुका नहीं पाते थे तो उनके घर में काम करके ऋण को चूकाया करते थे। यह रिवाज पीढ़ी दर पीढ़ी से चली आ रही है Article image

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@preetipatel2612Jan 5, 2022

* देश में बहुत से ऐसे व्यक्ति होते हैं जो काफी गरीब होते हैं और वह हमारे गांव के साहूकारो से कुछ पैसे ऋण के रूप में लेते हैं लेकिन वह उन पैसों को समय से नहीं चुका पाते हैं इसीलिए अपना ऋण चुकाने के लिए उनको ऋणदाता के लिए उन्हें काम करना पड़ता है उसी को ही बँधुआ मजदूर कहा जाता है । बंधुआ मजदूर को कई नामों से जाना जाता है जैसे - अनुबद्ध श्रमिक और बंधक मज़दूर ।Article image

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@aanchalsingh1985Jan 6, 2022

बंधुआ मजदूर उस व्यक्ति को कहा जाता जो किसी से ऋण लेते हैं और सही तौर पर समय से नहीं चुका पाते हैं तो उस ऋण को चुकाने के लिए वह ऋण दाता के लिए श्रम करते हैं और उन्हें सेवाएं देते हैं जिन्हें बंधुआ मजदूर कहा जाता है। पहले के जमाने में देखा जाता था कि गरीब लोग के पास पैसे ज्यादा नहीं होते थे जिससे वह अपने घर का पालन पोषण सही तरीके से नहीं कर पाते थे और लड़कियों के शादी के लिए ऋण दाता से ऋण लिया करते थे और इस ऋण सही समय पर ना चुकाने पर वह उन्हीं के यहां काम करने लगते थे कहीं खेत में काम या उनका श्रम बंधुआ के रूप में काम किया करते थे। क़ी हम उनके ऋण का भरपाई कर सकें। दूसरे शब्दों में यह कहा जाता है ऋण को चुकाने के लिए दूसरे के यहां दिन-रात श्रम करना उनको सेवाएं देना बंधुआ मजदूर कहलाता है.।Article image

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@poonampatel5896Dec 21, 2022

बंधुआ मजदूर : वह व्यक्ति जो लिए हुए ऋण चुकाने के बदले ऋण दाता के लिए श्रम करता है या सेवाएं देता है उसे बंधुआ मजदूर कहते हैं। इन्हें अनुबंध श्रमिक या बंधक मजदूर भी कहते हैं। कभी-कभी बंधुआ मजदूर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलती रहती है प्राचीन यूनान में बंधुआ मजदूर बहुत प्रचलित थी।वर्तमान समय में अनुबंध श्रम सबसे अधिक दक्षिण एशिया होता है। बंधुआ मजदूरी समाप्त करने के उद्देश्य से भारत में सन् 1976 में कानून बनाकर इसे अवैध घोषित किया गया।Article image

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@vandnadahiya7717Dec 21, 2022

दोस्तों आप ने बंधुआ मजदूर तो सुना हीं होगा पर क्या जानते है कि बंधुआ मजदूर किसे कहते है यदि नहीं जानते है तो चलिये हम आपको बताते है। वह व्यक्ति जो ऋण देने के बदले ऋणदाता के यहाँ पर श्रम करता है उसे हीं बंधुआ मजदूर कहा जाता है कभी कभी तो ऋण न चुका पाने के कारण यह एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी तक चलती है यूनान में बंधुआ मजदूरी बहुत अधिक प्रचलित थी। और भारत में इसे सन 1976 के कानून में अवैध माना गया था।

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@priyaagrawal8776Mar 14, 2026

बंधुआ मजदूर वह व्यक्ति होता है जो किसी कर्ज, दबाव या मजबूरी के कारण किसी मालिक के लिए लंबे समय तक काम करने के लिए मजबूर होता है। ऐसे मजदूर अक्सर अपनी मर्जी से काम छोड़ नहीं पाते क्योंकि उन पर कर्ज चुकाने या किसी समझौते को पूरा करने का दबाव होता है। कई बार उन्हें बहुत कम मजदूरी मिलती है और काम की परिस्थितियां भी कठिन होती हैं।

बंधुआ मजदूरी को एक प्रकार का शोषण माना जाता है, क्योंकि इसमें मजदूर की स्वतंत्रता सीमित हो जाती है। भारत में बंधुआ मजदूरी को कानूनन अपराध माना गया है और इसे समाप्त करने के लिए सरकार ने विशेष कानून भी बनाए हैं। इसका उद्देश्य मजदूरों को शोषण से बचाना और उन्हें स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन देना है।

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