Updated on Jun 6, 2026astrology

यमराज कौन है और उनका साम्राज्य कैसे चलता है ?

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Answered on Jun 21, 2023

अक्सर लोगों को इस बात की जानकारी लेने में काफी दिलचस्प होती है कि यमराज कौन है और उनका साम्राज्य कैसे चलता है चलिए आज हम आपको यमलोक से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि यमराज के महल को कालित्री महल के नाम से जाना जाता है। पुराणों में बताया गया है कि यमलोक पृथ्वी से 1200000 किलोमीटर दूरी पर है कहते हैं कि यमलोक बहुत ही डरावना होता है यहां लोगों के साथ जीवो की तरह बर्ताव किया जाता है यमलोक में 4 दरवाजे पाए जाते हैं। जहां लोगों के कर्मों पर आधारित किया जाता है कि किसी पुण्य के दरवाजे पर भेजा जाए और किसे पाप के दरवाजे पर भेजा जाए।

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Astrology Insights Expert
Updated on Feb 17, 2019

यमराज कौन है, ये सभी जानते हैं। इंसान के मरने के बाद यमराज के दूत उन्हें यमलोक ले जाते हैं, जहाँ पर मरने वाले का सारा लेखा जोखा होता है। मानव जीवन की ज़िंदगी का आखरी पड़ाव यमलोक होता है। गरुड़ पुराड़ में इंसान के मरने के बाद उसकी सभी यात्राओं का विवरण होता है। गरुड़ पुराण के अनुसार यमराज के महल को कालित्री महल कहा जाता है, जहाँ सिर्फ अँधेरा होता है।


आइये जानते हैं यमराज का साम्राज्य कैसा है -

- पुराणों के अनुसार यमलोक पृथ्वी से लगभग 12 लाख किलोमीटर दूर है।


- यमलोक में बहुत अधिक यातनाएं दी जाती है और यह बहुत ही डरावना होता है।

- गरुड़ पुराण के आधार पर यमलोक के 4 दरवाजे हैं -

पहला दरवाजा पूर्वी तरफ होता है जो सर्फ अच्छी आत्मा और धर्मात्मा के लिए खुलता है।

पश्चिम तरफ का दरवाजा दान पुण्य करने वाले लोगों के लिए खुलता है।

साधु संत के लिए उत्तरा की तरफ का दरवाजा खुलता है।

दक्षिण तरफ खुलने वाला दरवाजा पापियों और बुरे लोगों के लिए खुलता है।

- यमराज की सेवा करने वाले उनके यमदूत कहलाते हैं, जो कि मर्त इंसान की आत्मा को यमराज तक लेकर आते हैं। ऋग्वेद के अनुसार यमराज के दूत कबूतर और उल्लू बताएं गये हैं। वहीं गरुण पुराण में
कौआ को यमदूत बताया गया।

- यमलोक के द्वारपाल को धर्मध्वज कहा जाता है। यमराज के लोक में उनके द्वार पर दो विशाल कुत्ते पहरा देते हैं।

- लोगों के जीवन का लेखा-जोखा चित्र गुप्त रखते हैं, जिसके आधार पर यमराज मृत्यु के बाद लोगों की सज़ा को निर्धारित करते हैं।

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