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kisan thakur· 6 years ago
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छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे ?

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Answered on11/24/23

चलिए आज हम आपको बताते हैं छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे?शिवाजी भोंसले उर्फ़ छत्रपति शिवाजी महाराज एक भारतीय शासक और मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे। शिवाजी ने आदिलशाही सल्तनत की अधीनता स्वीकार ना करते हुए उनसे कई लड़ाईयां की थी। शिवाजी को हिन्दूओं का नायक भी माना जाता है। शिवाजी महाराज एक बहादुर, बुद्धिमान और निडर शासक थे।धार्मिक कार्य में उनकी काफी रुचि थी, महाभारत और रामायण का अभ्यास वह बड़े ध्यान से करते थे। वर्ष 1674 में शिवाजी महाराज का राजअभिषेक हुआ और उन्हें छत्रपति का खिताब मिला। छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 जनवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था।इनके पिता का नाम शाहजी भोसले और माता का नाम जीजाबाई था। उनकी माता ने उनका नाम शिवाय के नाम पर शिवाजी रखा। उनकी माता भगवान शिवाय से स्वस्थ संतान के लिए प्रार्थना किया करते थे। उन्होंने शिवाजी और जीजाबाई को दादोजी कोणदेव के पास छोड़ दिया। दादोजी ने शिवाजी को बुनियादी लड़ाई तकनीको के बारे में जैसे की- घुड़सवारी,तलवारबाजी और निशानेबाजी सिखाई थी।Article image

Poonam Patel
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Updated on02/19/20

#_सिसोदिया___वंश के प्रतापी शुरवीर #__छत्रपति____शिवाजी___महाराज की जयंती पर उन्हे शत् शत् नमन् ??


क्षत्रपति शिवाजी राजे भोंसले का जन्म 19 फ़रवरी 1630 को पश्चिमी महाराष्ट्र के शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। उनके पिता शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई थी जो जाधव(यदुवंशी राजपूत) वंश के क्षत्रियोँ की पुत्री थीं !! जिन्होंने महाराष्ट्र में कई सदियोँ तक राज किया था। भोंसले वंश मराठा देश के क्षत्रियो का प्रमुख वंश है जिसका निकास मेवाड़ के गहलोत/सिसोदिया वंश से हुआ है।


इस तरह भारत के दो महान सुपुत्र और क्षत्रियों के गौरव महाराणा प्रताप और शिवाजी राजे एक ही वंश से संबंध रखते हैँ। शिवाजी राजे के पिता शाहजी राजे दक्षिण भारत के एक शक्तिशाली सामंत थे और उनकी माता जीजाबाई एक आदर्श क्षत्राणी और असाधारण महिला थी। उनका बचपन अपनी माता के संरक्षण में ही बीता। शिवाजी महाराज बचपन से ही बहुत तेज दिमाग और प्रतिभाशाली थे। उनकी माता जिजाऊ ने एक आदर्श क्षत्राणी की तरह उनमे देशभक्ति और बलिदान की भावना कूट कूट कर भर दी थी।


बचपन से ही शिवाजी राजे के ह्रदय में स्वतंत्रता की लौ प्रज्वलित हो गई थी और विदेशी शाशन की बेड़िया तोड़ने का उन्होंने संकल्प ले लिया था। उन्होंने कम उम्र में ही विदेशियों से अपनी मातृभूमि को मुक्त कराने का अभियान छेड़ दिया और जीवन भर संघर्ष करते हुए अपनी शूरवीरता और बुद्धिमता के बल पर दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य के बाद पहला स्वतंत्र हिन्दू राज्य स्थापित कर लिया। उन्होंने मराठा देश के सभी क्षत्रियोँ को ही नहीँ बल्कि सभी हिन्दू जातियों के लोगो को संगठित कर के विशाल और अपराजेय सेना का निर्माण किया। हालांकि उन्हें बचपन में कोई ख़ास शिक्षा नही मिली लेकिन दादा कोंडदेव उनके राजनितिक गुरु थे ! और राजे शुक्राचार्य और कौटिल्य की नीतियों को आदर्श मानते थे।


उनकी सफलता में उनकी बुद्धिमता और कूटनीति का बहुत बड़ा योगदान था। चाहे अफजल खान से भिड़ंत हो या आगरा के दरबार में नजरबन्द होने के बाद वहॉ से निकलना या फिर अनेको किलो को बिना रक्त बहाए जीतना या विशाल सेनाओ के विरुद्ध छापामार शैली में लड़कर जीतना,इस तरह के शिवाजी राजे की बुद्धिमता और कूटनीति के अनेको उदाहरण है।


इतिहास में शिवाजी राजे जैसा बुद्धिमान और कूटनीतिज्ञ शाशक शायद ही कोई रहा होगा जिन्होंने बहुत कम संसाधनों के साथ अपने से कहीँ विशाल साम्राज्यो से संघर्ष करते हुए बुद्धि और कूटनीति के बल पर एक विशाल और ताकतवर साम्राज्य स्थापित किया। शिवाजी राजे महान सेनानायक के साथ ही एक कुशल और प्रबुद्ध सम्राट के रूप में भी जाने जाते है। प्रशाशन की बागडोर वो सीधे अपने हाथो में ही रखते थे। राज्याभिषेक होने के बाद उन्होंने हिन्दू शास्त्रो के आधार पर एक सुदृढ़ प्रशासनिक और न्याय तंत्र विकसित किया। वो एक कट्टर हिन्दू थे लेकिन उन्होंने सहिष्णुता की नीती अपनाई। हिन्दू स्वराज स्थापित करने के बाद भी मुसलमानो को पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता दी।


~~भोंसले वंश के क्षत्रियत्व का प्रमाण~~ शिवाजी राजे के राज्याभिषेक की प्रक्रिया जब शुरू हुई तो महाराष्ट्र के ब्राह्मणो ने मुगलो के धमकी के कारण शिवा जी महाराज के क्षत्रित्व पर प्रश्न चिन्ह उठाया । शिवा जी महाराज का वंशावली पर संदेह व्यक्त किया और राज्यभिषेक करने से मना कर दिया ! लेकिन फिर आग्रह पर वाराणसी के प्रकांड विद्वान विशेश्वर भट्ट उर्फ गागा भट्ट ने वंशावली देखकर कहा क्षत्रपति शिवाजी शुद्ध क्षत्रिय है !! जिनका सम्बंध मेवाड़ के सिसोदिया वंश से है। और इस प्रकार पंडित गंगा भट्ट की वंशावली और शिवा जी महाराज के पास की वंशावली एक हुई ! जो प्रमाणिकता और सिध्द की !! फिर हर जगह हर्षोल्लास छा गया, 5000 ब्राह्मणो ने भोज किया स्वयं विशेश्वर भट्ट ने राज्याभिषेक किया था। जो पहले राजपुताना के कई राजाओं का राजाभिषेक करवाये थे। इन प्रमाणो के अनुसार महाराष्ट्र के भोंसले राजवंश का उद्भव राजस्थान के मेवाड सिसोदिया राजवंश से ही हुआ है ! मेवाड़ के महाराणा हमीर सिंह प्रथम (1326 से 1364) ईस्वी के कनिष्ठ पुत्र महाराजकुमार सज्जन सिंह (1366 से 1392 ईस्वी) महाराष्ट्र चले गये , जहा उनके वंशजों से कठिन परिश्रम के बाद भोंसले राजवंश की स्थापना की !!


राष्ट्र-प्रेम और स्वतंत्रता की अखंड ज्योति जागृत करने वाले मेवाड़ के महाराणा प्रताप ने मुगलो के विरुध्द जिस अभियान को शुभारम्भ किया था , उसे महाराष्ट्र मे छत्रपति शिवाजी राजे (1700से 1714 ईस्वी ) एवं उनके पुत्र छत्रपति शम्भाजी राजे (1714 से 1760 ईस्वी) ने प्राण-प्रय से आगे बढाया !!


महाराणा प्रताप जी व शिवा जी महाराज की वंशावली !!


महाराणा प्रताप जी की वंशावली


भगवान प्रभू श्री राम चंद्र जी के 270 वंशज हुये - 270 - महाराणा हमीर सिंह ( प्रथम ) - 1326 -1364 ई. 271 - महाराणा क्षेत्र सिंह ( 1366 - 1382 ) ईस्वी 272 - महाराणा लाखा सिंह ( 1382 - 1421 ) ईस्वी 273 - महाराणा मोकल सिंह ( 1421- 1433) ई. 274 - महाराणा कुम्भा ( 1433 - 1468 ) ई. 275 - महाराणा उदय सिंह (प्रथम) - (1468-1473)ई. 276 - महाराणा रायमल ( 1473 -1509 ) ईस्वी 277 - महाराणा संग्राम सिंह ( महाराणा सांगा) प्रथम ( 1509 - 1527 ) ईस्वी 278 - महाराणा रत्न सिंह द्वितीय ( 1527 -1531 ) ई 279 - महाराणा विक्रमादित्य द्वितीय ( 1531 - 1536)ई 280 - महाराणा उदय प्रताप सिंह द्वितीय (1537-1572) 281 - महाराणा प्रताप सिंह ( 1572 - 1597 ) ईस्वी ?


शिवा जी महाराज की वंशावली -


जैसा कि भगवान प्रभू श्री राम चंद्र जी के 270 वे महाराणा हमीर सिंह जी के 1 पुत्र से महाराणा प्रताप की वंशावली चली व दुसरे कनिष्ठ पुत्र से शिवा जी महाराज की वंशावली चली !! 270 - महाराणा हमीर सिंह (प्रथम) - (1326- 1364 )ई. 271 - महाराजकुमार सज्जन सिंह ( 1366-1392 )ईस्वी 272 - महाराजकुमार दिलीप सिंह 273 - महाराजकुमार शिवा जी प्रथम 274 - महाराजकुमार भोस जी 275 - महाराजकुमार देवराज जी 276 - महाराजकुमार उग्रसेन सिंह 277 - महाराजकुमार माहुलजी राजे 278 - महाराजकुमार खेलोजी राजे 279 - महाराजकुमार जानको जी राजे 280 - महाराजकुमार सम्भाजी राजे 281 - महाराजकुमार बाबाजी राजे 282 - महाराजकुमार मालोजी राजे 283 - महाराजकुमार शाह जी राजे 284 - महाराज छत्रपति शिवाजी राजे ( द्वितीय) कर्नाटक में मूढोल रियासत के घोरपोडे परिवार के पास आज भी वो फ़ारसी फरमान सुरक्षित है जिनमे भोंसले और घोरपोड़े वंशो को मेवाड़ के सिसोदिया वंश से निकला हुआ बताया गया है।


मूढोल के घोरपोडे पहले राणा उपाधी लगाते थे। यहाँ तक की शिवाजी महाराज से भी पहले उनके पिता शाह जी खुद को सिसोदिया राजपूतो का वंशज बताते थे। शिवाजी राजे के राज्याभिषेक से भी बहुत पहले शाहजी राजे के दरबारी कवि जयराम ने उनको राजा दलीप का वंशज और धरती पर सब राजाओं में श्रेष्ठ हिंदुआ सूरज मेवाड़ के महाराणाओं के परिवार में पैदा होना बताया है। वो लिखते है- महिच्या महेंद्रामध्ये मुख्य राणा।दलिपास त्याच्या कुळी जन्म जाणा।। त्याच्या कुळी माल भूपाळ झाला।जळाने जये शंभू सम्पूर्ण केला।। उस समय के कई यूरोपीय और अन्य रिकॉर्ड में शिवाजी राजे को राजपूत लिखा गया है जिससे ये पता चलता है कि उस समय उत्तर भारत के क्षत्रियो की तरह मराठा देश के क्षत्रियो को भी राजपूत कहा जाने लगा था।



ईस्ट इंडिया कंपनी के 28 नवंबर1659 के एक लेख के अनुसार- "Sevagy, a great Rashpoote issues forth from his fort Rayguhr to strike blows on the Emperor, Duccan, Golconda and the Portuguese." जयपुर आर्काइव में सुरक्षित उस समय के एक लेख में शिवाजी राजे के राजपूती स्वभाव और आचरण की तारीफ़ करी है। उसके अनुसार- "Shivaji is very clever; he speaks the right word, after which nobody need say anything on the subject. He is a good genuine Rajput....and says appropriate things marked by the spirit of a Rajput."


कृष्णाजी अनंत सभासद जो शिवाजी राजे की सेवा में थे, उन्होंने सभासद बाखर नामक ग्रन्थ में आँखों देखा हाल लिखा है। उसमे लिखा है की राजा जय सिंह ने शिवाजी राजे को राजपूत माना और राजपूत होने के नाते धर्मांध औरंगजेब के सामने उनका सहयोग करने का वचन दिया। इसके अलावा इस ग्रन्थ में शिवाजी राजे द्वारा खुद को राजपूत कहने का वर्णन भी मिलता है। जब शाइस्ता खान ने विशाल सेना के साथ आक्रमण किया तो शिवाजी ने अपने सभी कारकूनो, सरनोबत और महत्वपूर्ण लोगो को रायगढ़ बुलाकर उनकी राय लेनी चाही। सभी लोगो ने मुग़लो से संधि करने की राय दी क्योंकि उनके अनुसार उनके पास मुग़लो की विशाल सेना का सामना करने की क्षमता नही है। शिवाजी राजे उनसे सहमत नही हुए और उन्होंने कहा की- " If peace is decided on, there is no influential Rajput, (with the Khan) as would, (considering the fact that) we are Rajputs and he too is a Rajput, protect the Hindu religion and guard our interests. Saista Khan is a Mahomedan, a relation of the Badshah ; bribe and corruption cannot be practised on him. Nor will the Khan protect us. If I meet him in peace, he will bring about (our) destruction. It is injurious to us."


इस तरह भोंसले वंश का सिसोदिया वंश से निकास और असली क्षत्रिय वंश होना प्रमाणित होता है। प्रौढप्रताप पुरंदर क्षत्रिय कुलावतांश सिंहासनाधीश्वर महाराजाधिराज छत्रपति शिवाज़ीमहाराज़ !!!! राजाधिराज महाराज शिवराय राज श्री छत्रपती कर्तव्यदक्ष सिंहासिनाधीश्वर छत्रपती शिवराय दुर्गपती गज अश्व पती ! सुवर्ण रत्न श्रीपती ! अष्टावधान प्रेष्टीत ! अष्टप्रधान वेष्टित ! राजनीती धुरंदर ! प्रौढप्रताप पुरंदर ! क्षत्रिय कुलावतंस सिहासानाधीश्वर महाराजाधिराज छत्रपती शिवाजी महाराज कि जय!


सन्दर्भ- 1.चिन्तामण विनायक वैद्य की शिवाजी-दी फाउंडर ऑफ़ मराठा स्वराज पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक ६ से १०

2.कोल्हापुर राजपरिवार का इतिहास।

3.मेवाड़ राजपरिवार का इतिहास।

4.कर्नल टॉड द्वारा लिखित इतिहास।

5 . डाॅ. जितेंद्र सिंह जी द्वारा लिखित श्री राम की अयोध्या !




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Answered on11/27/23

छत्रपति शिवाजी महाराज,जिन्हे शिवाजी भी कहा जाता हैं। शिवाज महाराज का जन्म19 फरवरी 1630को हुआ था। उनका जन्म शिवनेरी के नौकरशाह के परिवार में हुआ था। वह भारत के महान मराठ साम्राज्य के संस्थापक थे। वह 17वीं शताब्दी के सबसे बहादुर और अद्भुद शासको में से एक थे।

शिवाजी महाराज, कुलीनो के वंशज थे, वह बहादुर थे और उन्होंने भारत को मजबूत करने के लिए कई युध्य लडे। उस समय भारत मुस्लिम शासको के अधीन था और विभाजित था। वह हिंदुओ की उत्पिडन से दुखी था और 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने खुद को हिंदुओ की स्वतंत्रता का कारण बनने के लिए मना लिया। यह दृड निश्चय उन्होंने जीवन भर कायम रखा। शिवाजी ने शक्तिशाली नौसेना का निर्माण किया था। वह युध्य की रणनीति बनाने में माहिर थे। वह महिलाओ के सम्मान के कट्टर समर्थक थे। शिवाजी गोरिल्ला युध्य के प्रस्थापक थे। उनकी खासियत यह थी के वह अपने राज्य के लिए बादमे लड़ते थे। Article image

komal Solanki
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Answered on11/26/23

क्षत्रपति शिवाजी राजे भोंसले का जन्म 19 फ़रवरी 1630 को पश्चिमी महाराष्ट्र के शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। उनके पिता शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई थी जो यदुवंशी राजपूत वंश के क्षत्रियोँ की पुत्री थीं Article imageशिवा जी महाराज का वंशावली पर संदेह व्यक्त किया और राज्यभिषेक करने से मना कर दिया ! लेकिन फिर आग्रह पर वाराणसी के प्रकांड विद्वान विशेश्वर भट्ट उर्फ गागा भट्ट ने वंशावली देखकर कहा क्षत्रपति शिवाजी शुद्ध क्षत्रिय है !! जिनका सम्बंध मेवाड़ के सिसोदिया वंश से है। और इस प्रकार पंडित गंगा भट्ट की वंशावली और शिवा जी महाराज के पास की वंशावली एक हुई ! जो प्रमाणिकता और सिध्द की !! फिर हर जगह हर्षोल्लास छा गया, 5000 ब्राह्मणो ने भोज किया स्वयं विशेश्वर भट्ट ने राज्याभिषेक किया था। जो पहले राजपुताना के कई राजाओं का राजाभिषेक करवाये थे। इन प्रमाणो के अनुसार महाराष्ट्र के भोंसले राजवंश का उद्भव राजस्थान के मेवाड सिसोदिया राजवंश से ही हुआ है

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Answered on10/20/23

राष्ट्रगान को गाने में लगने वाला समय, इसे गाए जाने की गति, राष्ट्रगान के संस्करण और छंदों को जोड़ने या हटाने जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। किसी देश के राष्ट्रगान की आमतौर पर एक मानक अवधि होती है, और इसे उचित समय सीमा के भीतर गाना परंपरा और सम्मान का विषय है। राष्ट्रगान गाने के लिए यहां कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं:

1.सम्मानजनक अवधि: राष्ट्रगान गाना एक प्रतीकात्मक और गंभीर कार्य है, और इसे सम्मान और गरिमा के साथ किया जाना चाहिए। अधिकांश राष्ट्रगान कुछ ही मिनटों में गाए जा सकते हैं।

2.मानक छंद: कई राष्ट्रगानों का एक मानक संस्करण होता है जिसमें विशिष्ट संख्या में छंद और एक कोरस शामिल होता है। इन छंदों और कोरस को गाने में आम तौर पर कुछ मिनट लगते हैं।

3.आधिकारिक दिशानिर्देश: कुछ देशों में, राष्ट्रगान के उचित गायन के संबंध में आधिकारिक दिशानिर्देश हैं। ये दिशानिर्देश गाए जाने वाले छंदों की संख्या और इसे जिस गति से निष्पादित किया जाना चाहिए उसे निर्दिष्ट कर सकते हैं।

4. प्रथागत गति: स्पष्ट उच्चारण और अभिव्यक्ति की अनुमति देने के लिए राष्ट्रगान आमतौर पर मध्यम गति से गाए जाते हैं। बहुत जल्दी गाने से राष्ट्रगान की गंभीरता से समझौता हो सकता है।

5.विशेष अवसर: राष्ट्रीय छुट्टियों या आधिकारिक कार्यक्रमों जैसे विशेष अवसरों पर, अक्सर राष्ट्रगान का पूरा संस्करण गाया जाता है, जिससे इसकी अवधि बढ़ सकती है। हालाँकि, इसे आमतौर पर एक उचित समय सीमा के भीतर गाया जाता है।

हालाँकि राष्ट्रगान गाने के लिए कोई निश्चित अधिकतम समय नहीं है, लेकिन इस कार्य को श्रद्धा के साथ करना और राष्ट्रगान के गायन के संबंध में सांस्कृतिक और आधिकारिक रीति-रिवाजों का पालन करना महत्वपूर्ण है। अवधि के बजाय देशभक्ति और प्रतीकात्मक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

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Answered on11/26/23

क्या आपने शिवाजी राजे भोसले के बारे में कभी पढ़ा है। शायद नहीं पढ़ा होगा तो कोई बात नहीं चलिए आज हम आपको शिवाजी राजे भोसले के बारे में बताते हैं। शिवाजी राजे भोंसले एक हिंदू राजा थे। जो बहुत ही बहादुर और निडर हुआ करते थे।छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 जनवरी सन 1630 को हुआ था। शिवाजी महाराज के माता का नाम जीजाबाई और पिता का नाम साहिब जी भोसले था। शिवाजी राजे भोसले भले ही हिंदू राजा थे लेकिन यह हमेशा सभी धर्म का सम्मान करते थे। इसके अलावा शिवाजी को महाभारत और रामायण पढ़ने में काफी रुचि थी।हम आपको बता दें कि शिवाजी ने 15 साल की उम्र में पहला युद्ध लड़ा था। शिवाजी ने तोरना किले में हमला किया था और उसे जीत लिया था। इस प्रकार शिवाजी राजे एक बहुत ही महान योद्धा थे।

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Aanya  Singh
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Answered on11/25/23

चलिए आज हम आपको बताते हैं छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे।छत्रपति शिवाजी महाराज एक भारतीय शासक और मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे। शिवाजी ने आदिलशाही सल्तनत की अधीनता स्वीकार ना करते हुए उनसे कई लड़ाईयां की थी।शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई थी जो जाधव(यदुवंशी राजपूत) वंश के क्षत्रियोँ की पुत्री थीं।जिन्होंने महाराष्ट्र में कई सदियोँ तक राज किया था।शिवाजी महाराज एक बहादुर, बुद्धिमान और निडर शासक थे।धार्मिक कार्य में उनकी काफी रुचि थी, महाभारत और रामायण का अभ्यास वह बड़े ध्यान से करते थे। वर्ष 1674 में शिवाजी महाराज का राजअभिषेक हुआ और उन्हें छत्रपति का खिताब मिला।शिवाजी महाराज बचपन से ही बहुत तेज दिमाग और प्रतिभाशाली थे। उनकी माता जिजाऊ ने एक आदर्श क्षत्राणी की तरह उनमे देशभक्ति और बलिदान की भावना कूट कूट कर भर दी थी।दादोजी ने शिवाजी को बुनियादी लड़ाई तकनीको के बारे में जैसे की- घुड़सवारी,तलवारबाजी और निशानेबाजी सिखाई थी।Article image

Kanchan  Patel
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