महर्षि वेद व्यास कौन थे, क्यों उन्हें गुरुओं का गुरु और पुराणों के रचयिता कहा जाता है ? - letsdiskuss
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Satindra Chauhan

| पोस्ट किया | शिक्षा


महर्षि वेद व्यास कौन थे, क्यों उन्हें गुरुओं का गुरु और पुराणों के रचयिता कहा जाता है ?


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महर्षि "वेदव्यास" वह है जिन्होंने बहुत से वेदो और महान कथाओं की की है जिनमे महाभारत भी शामिल है। महर्षि वेदव्यास के माता का नाम "सत्यवती" था और यह अपनी माता की वजह से महाभारत में एक पात्र की भूमिका निभाते है। महर्षि वेदव्यास ने अपने जीवन में बहुत सारे वेदो की रचना करते हुए उन्हें कहानियों के रूप में बताया है इसी वजह से उनका नाम वेदव्यास पड़ गया।

 
जब महर्षि वेदव्यास महाभारत की रचना कर रहे तब उन्हें किसी ऐसे बुद्धिमान व्यक्ति की तलाश थी जो उनके सोचने और बोलने की गति से बिना रुके उसे लिख सके। क्योकि अगर वह बिच में रुके तो वह अपने कहे छंद को भूल जायेंगे और वह ग्रन्थ को कभी पूरा नहीं कर पाएंगे। उनकी इस समस्या का समाधान के लिए ब्रह्मा जी ने उनकी सहायता की और उनको कैलाश पर्वत जाने की लिए कहा। उन्होंने महर्षि वेदव्या को बताया की आपकी इस कामस्य का समाधान शिव जी के पास है। 
 
उसके बाद जब महर्षि वेदव्यास महादेव के पास पहुंचे तो उन्होंने महर्षि वेदव्यास के ग्रन्थ को पूरा करने के लिए अपने पुत्र गणेश को चुनना। जिसके बाद श्री गणेश जी ने ग्रन्थ लिखते वक्त महर्षि वेदव्यास से एक शर्त रखी थी कि आप ग्रन्थ को बिना रुके और बिना सास लिए कहते रहेंगे इसी पर महर्षि वेदव्यास जी ने श्री गणेश जी से शर्त रखी थी कि आप छंद को तब लिखेंगे जब वह आपको समज में आजाये। उन्होंने ऐसा इसीलिए कहा ताकि जब वह थक जाये तब वह साँस ले सके। 
 
महर्षि वेदव्यास के द्वारा रचना किये गए महाभारत को श्री गणेश जी के द्वारा पूरी हुई। जब श्री गणेश महर्षि वेदव्यास के माध्यम के महाभारत को लिख रहे थे। तब लिखने के दौरान उनके कलम की नोक टूट गयी थी जिसके बाद गणेश जी को लगा कि अब यह ग्रन्थ इस तरह पूरा नहीं हो पायेगा। तब उन्होंने अपने एक दन्त का बलिदान दिया और उन्होंने अपने उस दन्त की मदद से महाभारत का पूरा ग्रन्थ तैयार कर दिया।
 
 
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महर्षि वेदव्यास महाभारत ग्रंथ के रचयिता है। ऋगवेद, अर्थवेद, यजुरवेद और सामवेद इन चारो वेदो के विभाजन के कारण ही महर्षि  वेद व्यास नाम से विख्यात हुए। 

वेद ने निहित ज्ञान  के अत्यन्त गूढ़ और शुष्क होने के कारण वेद जी ने पांचवे वेद के रूप मे पुरणो की रचना की। 

जिसमे वेद के ज्ञान को रोचक कथाओ के रूप मे बताया गया। 

वह वेदो मे निपूर्ण थे इसीलए उन्हे पुराणो का रचयिता कहा जाता था और वह पुराण उन्होंने अपने शिष्य रोम हर्षण को पडाया । फिर व्यास जी के शिष्यो ने उन्हे अपनी बुध्दि के अनुसार उन पुरणो की शाखा तथा उपशाखा बना दी। Letsdiskuss


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