चलिए हम आपको जानकारी देते हैं कि सुवर्ण मत्स्य कौन थी:-
थाईलैंड की रामकियेन रामायण और कंबोडिया की रामकेर रामायण में रावण की बेटी का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार रावण की तीन पत्नियों में सात बेटे थे। जिनमें से पहली पत्नी मंदोदरी से दो बेटे मेघनाथ और अक्षय कुमार थे। और दूसरी पत्नी धन्य मालिनी से अतिकाय और त्रिशिरा नाम के दो बेटे थे। और तीसरी पत्नी से प्रहस्थ, नरान्तक, देवांतक, नाम के तीन बेटे थे दोनों रामायण में बताया गया है कि साथ बेटों के अलावा रावण की एक बेटी भी थी। जिसका नाम सुवर्णमछा था। जिसे स्वर्ण जलपरी भी कहा जाता है। बताया जाता है कि सुवर्णमत्स्य का शरीर सोने की तरह दमकता था। इसी वजह से उसे सुवर्णमछा कहा जाता था। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है सोने की मछली। बताया जाता है कि इसी वजह से थाईलैंड और कंबोडिया में सुनहरी मछली को पूजा जाता है।
चलिए जानते हैं कि सुवर्णमछा को कैसे हुआ हनुमान जी से प्रेम :-
रामायण में लिखा गया है कि जब वानर सेवा की ओर से डाले जाने वाले पत्थर गायब होने लगे तो हनुमान जी ने समुद्र में उतर कर देखा कि आखिर यह चट्टानी कहां जा रही है उन्होंने देखा कि पानी के अंदर रहने वाले लोग पत्थर और चट्टानों को कहीं उठा कर ले जा रहे हैं उन्होंने उनका पीछा किया तो देखा कि एक मत्स्य कन्या उनको इस कार्य के लिए निर्देश दे रही है। इसके अलावा कथा में यह भी कहा गया है कि सुवर्ण मछा ने जैसे ही हनुमान जी को देखा उसे उनसे प्रेम हो गया ।
और हनुमान जी तुरंत ही सुवर्णमछा के मन की स्थिति को भाप गए। और फिर हनुमान जी सुवर्ण मछा को समुद्र तल पर ले गए पूछा कि आप कौन है देवी। और उन्होंने बताया कि वह रावण की बेटी है।



