वेदव्यास के पिता महर्षि पराशर (Maharishi Parashara) थे। वे प्राचीन भारत के महान ऋषियों में से एक माने जाते हैं और वैदिक ज्ञान, ज्योतिष तथा पुराणों के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। वेदव्यास की माता सत्यवती (Satyavati) थीं। महर्षि पराशर और सत्यवती के पुत्र के रूप में जन्म लेने वाले वेदव्यास का मूल नाम कृष्ण द्वैपायन (Krishna Dvaipayana) था।

महर्षि पराशर ने अपने ज्ञान और तपस्या से भारतीय ऋषि परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त किया। उनके पुत्र वेदव्यास ने चारों वेदों का संकलन और विभाजन किया, इसलिए उन्हें "वेदव्यास" कहा गया। उन्होंने महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की तथा 18 प्रमुख पुराणों के संकलन का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में पिता-पुत्र दोनों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
वेदव्यास का जन्म यमुना नदी के एक द्वीप पर हुआ था, इसलिए उन्हें द्वैपायन कहा गया। उनका वर्ण श्याम होने के कारण उन्हें कृष्ण द्वैपायन भी कहा जाता है। आगे चलकर वे अपने अद्वितीय ज्ञान, लेखन और वेदों के विभाजन के कारण विश्वभर में वेदव्यास के नाम से प्रसिद्ध हुए। महर्षि पराशर द्वारा प्रदान की गई शिक्षा और आध्यात्मिक परंपरा ने वेदव्यास के व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संक्षेप में
यदि परीक्षा में पूछा जाए "वेदव्यास के पिता कौन थे?", तो इसका सही उत्तर है:
उत्तर: महर्षि पराशर (Maharishi Parashara)।
FAQ
1. वेदव्यास के पिता कौन थे?
वेदव्यास के पिता महर्षि पराशर थे।
2. वेदव्यास की माता कौन थीं?
वेदव्यास की माता सत्यवती थीं।
3. वेदव्यास का मूल नाम क्या था?
वेदव्यास का मूल नाम कृष्ण द्वैपायन था।
4. वेदव्यास को "वेदव्यास" क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उन्होंने चारों वेदों का संकलन और विभाजन किया था, इसलिए उन्हें वेदव्यास कहा गया।
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स्रोत (Sources)
