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Jul 31, 2023news-current-topics

भारत के इतिहास में सबसे खराब राष्ट्रपति कौन था?

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3 Answers

K
Jun 15, 2019
वैसे भारतीय लोकतंत्र में राष्ट्रपति के लिए कोई ख़ास भूमिका नहीं है पर संविधान उनके नाम से चलता है इसलिए इस पद की गरिमा सबसे ऊपर है। आजादी के बाद भारत में कई महानुभावो ने इस पद पर अपनी भूमिका निभाई है। पर अगर सबसे खराब राष्ट्रपति के बारे में बात की जाए तो दो नाम सामने आते है। एक है फकरुद्दीन अली अहमद का और दूसरा है श्रीमती प्रतिभा पाटिल का।
Article image सौजन्य: जागरण

* फकरुद्दीन अली अहमद इस लिए इस लिस्ट में शामिल है क्यूंकि उन्होंने देश के सबसे काले प्रकरण पर अपनी संमति की मुहर लगाईं थी। जब स्वर्गीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने देश में इमरजेंसी लगाने का प्रस्ताव रखा तो इस महानुभाव ने बिना कोई विरोध किये अपने हस्ताक्षर कर दिए थे।
* श्रीमती प्रतिभा पाटिल केवल एक महिला होने के नाते शायद इस पद के लिए नियुक्त की गई थी क्यूंकि अपने कार्यकाल और उसके बाद भी उन्होंने कुछ कार्य ऐसे किये जिस से उनको काफी विरोध का सामना करना पड़ा। बेफिजूल विदेश की यात्रा, सरकारी जमीन पर कब्जा और रिश्तेदारों के पीछे सरकारी खर्च कुछ ऐसे कार्य थे जिससे उनकी छवि काफी खराब हुई।
वैसे देखा जाए तो और भी कोई राष्ट्रपति ने कुछ ख़ास कार्य नहीं किये पर उन्होंने इस पद की गरिमा का जातां किया था जो की यह दोनों राष्ट्रपति नहीं कर पाए और इसीलिए उनको सबसे ज्यादा खराब राष्ट्रपति का खिताब दिया जा सकता है।

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Jul 29, 2023

आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि भारत के इतिहास में सबसे खराब राष्ट्रपति कौन था और कौन थी वैसे तो ऐसे बहुत से लोग थे जो भारत के इतिहास के खराब राष्ट्रपति थे लेकिन सबसे खराब कौन थी आज हम आपको बताते हैं भारत के इतिहास की सबसे खराब राष्ट्रपति में सबसे पहले नंबर पर आता है प्रतिभा पाटिल का नाम, क्योंकि प्रतिभा पाटिल को विदेशों में यात्रा करने का इतना अधिक शौक था जो कि बेफिजूल खर्च करती थी, इसके अलावा सरकारी जमीनों पर कब्जा करना सबसे गंदी आदत थी प्रतिभा पाटिल जी की।

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V
Jul 30, 2023

दोस्तों भारत के इतिहास से लेकर अभी तक बहुत से राष्ट्रपति बन चुके हैं लेकिन आज इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि भारत के इतिहास में सबसे खराब राष्ट्रपति कौन थे तो भारत के इतिहास में सबसे खराब राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जी थी इन्हें देश विदेश की यात्रा करना बहुत ही पसंद था राष्ट्रपति के कार्यक्रम में इन्होंने 12 विदेशी यात्रा और 22 देशों में भ्रमण किया था जिनका कुल खर्च 205 करो रुपए था। यह इतनी लालची थी कि इन्हें जो भी ट्रॉफी अवार्ड से या उपहार में कुछ भी वस्तुएं मिली थी कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह अपने साथ ही ले गई थी।

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