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Updated on Sep 6, 2023education

तुलसी कौन थी ?

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11 Answers

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Answered on Sep 5, 2023


दोस्तों आज इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि तुलसी कौन थी तुलसी पहले जन्म में वृंदा के नाम की एक लड़की थी जिनका विवाह राक्षस कुल में जालंधर के साथ संपन्न हुआ एक बार जालंधर युद्ध के लिए गया था उसे युद्ध के दौरान जालंधर की मृत्यु हो गई थी वृंदा इस वियोग को सहन नहीं कर पाए और भस्म में हो गई उनकी राख से जो पौधा जन्म वही पौधा आज तुलसी के नाम से जाना जाता है हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे का विशेष महत्व है। वेदों और ग्रंथो में तुलसी का वर्णन किया गया है।

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Answered on Sep 16, 2022

तुलसी (पौधा) पिछले जन्म मे एक कन्या थी, जिनको वृंदा नाम से जाना जाता था। इनका जन्म एक राक्षस कुल में हुआ था लेकिन यह जन्म से ही भगवान विष्णु की बड़ी भक्त थी। बड़ी होने के बाद वृंदा का विवाह राक्षस कुल के दानव राज जलंधर से संपन्न हुआ।
भगवान विष्णु भक्त होने के कारण जब इनका जन्म दोबारा हुआ तो यह एक तुलसी माता के रूप मे पूजी जाने लगी। तुलसी को लोग अपने घर आंगन में लगाते हैं और उसकी पूजा करते हैं। पुरातन ग्रंथ वेदों के अनुसार तुलसी बहुत ही गुणकारी हैं। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा लगा होता है वहां भगवान विष्णु वास करते हैं।Article image

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Answered on Sep 16, 2022

आज है पर हम आपको बताएंगे कि तुलसी कौन थी। दोस्तों तुलसी एक कन्या थी जिसका नाम वृंदा था, वृंदा का जन्म राक्षस कुल में हुआ था। वृंदा भगवान विष्णु की सबसे बड़ी भक्त थी। वृंदा के बड़े होने पर उनका विवाह राक्षस कुल के दानव राज जालंधर के साथ संपन्न हुआ था। हमारे हिंदू धर्म में तुलसी को एक पवित्र पौधा माना जाता है जिसकी पूजा की जाती है भगवान विष्णु को तुलसी अति प्रिय है इसलिए जब भी उनकी पूजा की जाती है तो उन्हें तुलसी के पत्ते अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा भगवान विष्णु के आशीर्वाद के कारण तुलसी की पूजा की जाती है।Article image

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Answered on Aug 1, 2020
तुलसी ऐक देवी थी जिनका आज भी पुजा किया जाता है
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Answered on Jul 30, 2020
तुलशी हिन्दू धर्म कि एक पवित्र देवी है जिनके पौधे को पुजा जाता है
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Society & Culture Writer
Answered on Jul 29, 2020
तुलशी एक राक्षस कि पत्नी थी लेकिन भगवान विष्णु के द्वारा मिले आशीर्वाद के वजह से पुजा जाता है
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Answered on Jul 20, 2020
माता तुलसी हिन्दू धर्म कि पवित्र पौधा है जीन्हे देवी के रूप मे पुजा जाता है
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Answered on Jul 20, 2020
तुलसी हिन्दू धर्म कि पवित्र देवी है जिनका पुजा तुलसी के पौधे के रूप मे होता है
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Awni rai
Answered on Jul 20, 2020

हिंदू वेदों में, तुलसी ("अतुलनीय") को वैष्णवी ("विष्णु से संबंधित"), विष्णु वल्लभ ("विष्णु का प्रिय"), हरिप्रिया ("विष्णु का प्रिय"), विष्णु तुलसी के रूप में जाना जाता है। हरी पत्तियों वाली तुलसी को श्री-तुलसी ("भाग्यशाली तुलसी") कहा जाता है; श्री लक्ष्मी, विष्णु के प्रमुख संघ का भी एक पर्याय हैं। इस किस्म को राम-तुलसी ("उज्ज्वल तुलसी") के रूप में भी जाना जाता है; राम भी विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक हैं। गहरे हरे या बैंगनी रंग की पत्तियों और बैंगनी तने वाली तुलसी को श्यामा-तुलसी ("डार्क तुलसी") या कृष्णा-तुलसी ("डार्क तुलसी") कहा जाता है; कृष्ण भी विष्णु के एक प्रमुख अवतार हैं। इस किस्म को कृष्ण के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसका बैंगनी रंग कृष्ण के गहरे रंग के समान है



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Answered on Jul 18, 2020
तुलसी (पवित्र तुलसी) या कभी-कभी वृंदा ,हिंदू मान्यता में एक पवित्र पौधा है। हिंदू इसे देवी तुलसी / वृंदा की सांसारिक अभिव्यक्ति के रूप में मानते हैं; उन्हें लक्ष्मी के अवतार के रूप में माना जाता है, और इस प्रकार भगवान विष्णु की पत्नी। विष्णु और उनके अवतार जैसे कृष्ण और विठोबा की पूजा में इसकी पत्तियों की पेशकश अनिवार्य है।
कई हिंदुओं के घर के पास या उनके आस-पास तुलसी के पौधे उगते हैं, अक्सर विशेष बर्तनों या एक विशेष चिनाई संरचना में जिसे तुलसी वृंदावन कहा जाता है क्योंकि यह उनकी संस्कृति से संबंधित है। परंपरागत रूप से, तुलसी को हिंदू घरों के केंद्रीय आंगन के केंद्र में लगाया जाता है। पौधे की खेती धार्मिक उद्देश्यों के लिए, और इसके आवश्यक तेल के लिए की जाती है।


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Updated on Jul 13, 2020


तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था.

वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी.

एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा –

स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प

नही छोडूगी। जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये।
सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि – वृंदा मेरी परम भक्त है में उसके साथ छल नहीं कर सकता ।

फिर देवता बोले – भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है।
भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे

ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए,जैसे ही उनका संकल्प टूटा, युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया,उनका सिर वृंदा के महल में गिरा जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पडा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है?
उन्होंने पूँछा – आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गये पर वे कुछ ना बोल सके,वृंदा सारी बात समझ गई, उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, और भगवान तुंरत पत्थर के हो गये।
सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगे और प्रार्थना करने लगे यब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे

सती हो गयी।
उनकी राख से एक पौधा निकला तब

भगवान विष्णु जी ने कहा –आज से

इनका नाम तुलसी है, और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और में

बिना तुलसी जी के भोग

स्वीकार नहीं करुगा। तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे। और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में

किया जाता है.देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है !
????इस कथा को कम से कम दो लोगों को अवश्य सुनाए आप को पुण्य अवश्य मिलेगा।


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