तुलसी कौन थी ? - Letsdiskuss
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ashutosh singh

teacher | पोस्ट किया 11 Jul, 2020 |

तुलसी कौन थी ?

rudra rajput

phd student | पोस्ट किया 01 Aug, 2020

तुलसी ऐक देवी थी जिनका आज भी पुजा किया जाता है 

vivek pandit

आचार्य | पोस्ट किया 30 Jul, 2020

तुलशी हिन्दू धर्म कि एक पवित्र देवी है जिनके पौधे को पुजा जाता है

abhi singh

teacher | पोस्ट किया 29 Jul, 2020

तुलशी एक राक्षस कि पत्नी थी लेकिन भगवान विष्णु के द्वारा मिले आशीर्वाद के वजह से पुजा जाता है

amit singh

student | पोस्ट किया 20 Jul, 2020

माता तुलसी हिन्दू धर्म कि पवित्र पौधा है जीन्हे देवी के रूप मे पुजा जाता है

vivek pandit

आचार्य | पोस्ट किया 20 Jul, 2020

तुलसी हिन्दू धर्म कि पवित्र देवी है जिनका पुजा तुलसी के पौधे के रूप मे होता है

Awni rai

student | पोस्ट किया 20 Jul, 2020

हिंदू वेदों में, तुलसी ("अतुलनीय") को वैष्णवी ("विष्णु से संबंधित"), विष्णु वल्लभ ("विष्णु का प्रिय"),  हरिप्रिया ("विष्णु का प्रिय"), विष्णु तुलसी के रूप में जाना जाता है। हरी पत्तियों वाली तुलसी को श्री-तुलसी ("भाग्यशाली तुलसी") कहा जाता है; श्री लक्ष्मी, विष्णु के प्रमुख संघ का भी एक पर्याय हैं। इस किस्म को राम-तुलसी ("उज्ज्वल तुलसी") के रूप में भी जाना जाता है; राम भी विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक हैं। गहरे हरे या बैंगनी रंग की पत्तियों और बैंगनी तने वाली तुलसी को श्यामा-तुलसी ("डार्क तुलसी") या कृष्णा-तुलसी ("डार्क तुलसी") कहा जाता है; कृष्ण भी विष्णु के एक प्रमुख अवतार हैं। इस किस्म को कृष्ण के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसका बैंगनी रंग कृष्ण के गहरे रंग के समान है



kisan thakur

student | पोस्ट किया 18 Jul, 2020

 तुलसी (पवित्र तुलसी) या कभी-कभी वृंदा ,हिंदू मान्यता में एक पवित्र पौधा है। हिंदू इसे देवी तुलसी / वृंदा की सांसारिक अभिव्यक्ति के रूप में मानते हैं; उन्हें लक्ष्मी के अवतार के रूप में माना जाता है, और इस प्रकार भगवान विष्णु की पत्नी। विष्णु और उनके अवतार जैसे कृष्ण और विठोबा की पूजा में इसकी पत्तियों की पेशकश अनिवार्य है।
कई हिंदुओं के घर के पास या उनके आस-पास तुलसी के पौधे उगते हैं, अक्सर विशेष बर्तनों या एक विशेष चिनाई संरचना में जिसे तुलसी वृंदावन कहा जाता है क्योंकि यह उनकी संस्कृति से संबंधित है। परंपरागत रूप से, तुलसी को हिंदू घरों के केंद्रीय आंगन के केंद्र में लगाया जाता है। पौधे की खेती धार्मिक उद्देश्यों के लिए, और इसके आवश्यक तेल के लिए की जाती है।


ashutosh singh

teacher | | अपडेटेड 13 Jul, 2020



तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था.

वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी.

एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा –

स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प

नही छोडूगी। जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये।
सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि – वृंदा मेरी परम भक्त है में उसके साथ छल नहीं कर सकता ।

फिर देवता बोले – भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है।
भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे

ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए,जैसे ही उनका संकल्प टूटा, युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया,उनका सिर वृंदा के महल में गिरा जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पडा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है?
उन्होंने पूँछा – आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गये पर वे कुछ ना बोल सके,वृंदा सारी बात समझ गई, उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, और भगवान तुंरत पत्थर के हो गये।
सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगे और प्रार्थना करने लगे यब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे

सती हो गयी।
उनकी राख से एक पौधा निकला तब

भगवान विष्णु जी ने कहा –आज से

इनका नाम तुलसी है, और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और में

बिना तुलसी जी के भोग

स्वीकार नहीं करुगा। तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे। और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में

किया जाता है.देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है !
????इस कथा को कम से कम दो लोगों को अवश्य सुनाए आप को पुण्य  अवश्य मिलेगा।