वेद व्यास सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथों के रचयिता के नाम से प्रसिद्ध है | वेद व्यास जी ने ही महाभारत ग्रंथ कि रचना की थी |
वेद व्यास जी का जन्म यमुना नदी के द्वीप पर हुआ था उनके पिता का नाम महर्षि पराशर था| उनकी माता सत्यवती विवाह के पूर्व ही महर्षि पराशर के साथ थी इसलिए उनकी संतान वेद व्यास जी का नाम कानीन भी हुआ |
वेद व्यास जी का रंग सांवला होने के कारण उनका एक नाम कृष्णद्वैपायन भी था | प्राचीन ग्रंथों मे यह लिखा गया है कि ऋषि वेद व्यास स्वयं विष्णु भगवान का अवतार थे |
महर्षि वेद व्यास को हिन्दू धर्म ग्रंथों मे बहुत ही ऊंचा स्थान प्राप्त है उन्हे त्रिकालज्ञ भी कहा गया है | उन्हे विशेष दिव्य दृष्टि प्राप्त थी जिससे उन्हे यह ज्ञात हो गया था कि कलियुग मे धर्म क्षीण हो जाएगा जिसके कारण मानव धर्म को ना मानने वाला , अति अल्पायु ओर अपने कर्तव्यों से विमुख होने वाला बन जाएगा | इसी विचार धारा को अपने मन मे रख कर वेद व्यास जी ने वेदों को चार भागों मे विभाजित कर दिया | जिससे मनुष्य को इसे स्मरण रखने मे कोई समस्या ना आए | वह चारों वेदों का अध्ययन अपनी इच्छा से ओर कम समयावधि मे कर सके |
चार वेद - ऋगवेद , यजुर्वेद ,सामवेद ओर अथर्ववेद | इन्ही चारों वेदों कि रचना ओर उनके विभाजन के कारण इनका नाम वेद व्यास पड़ा | इसके अलावा वेद जी ने ब्रह्मसूत्रों कि भी रचना कि थी | कवि वाल्मीकि के बाद वेद व्यास को संस्कृत कवियों कि श्रेणी मे दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है |
वेद व्यास कि विवाह अरुणी नामक कन्या से हुआ था जिससे उनको एक पुत्र शुकदेव हुआ था | शुकदेव बड़े ही ज्ञानी थे | इन्होंने महाभारत जैसे महाकाव्य का प्रचार एवं वाचन किया था जिससे इसे कई लोगों को सुनाया जा सके | धृतराष्ट , पांडु ओर विदुर भी इन्ही के पुत्र माने जाते है | इनको वेद जी ने नियोग विधि से उत्पन्न किया था |
वेद व्यास जी का मंदिर काशी से 5 मिल दूर स्थित व्यासपुरी मे है | व्यास जी का एक मंदिर महाराज काशी नरेश के रामनगर दुर्ग मे भी है | लेकिन वेद व्यास जी के किसी कारणवंश श्राप देने कि वजह से विशेश्वर द्वारा वेद व्यास जी को काशी से निकाल दिया गया था जिसकी वजह से वह लोलर्क मंदिर के तट पर विराजमान हुए |
महर्षि वेद व्यास जी जयंती कि रूप मे आज भी गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है |



