एक अप्रैल को हर कोई अपने दोस्तों , रिश्तेदारों और जानने वालों के साथ मज़ाक करताऔर उन्हें उल्लू बनाने की कोशिश करता है है सतह ही वह खुद मूर्ख बनने से भी बचता है, और पूरी दुनिया में एक अप्रैल की तारीख को April fool 's Day के रूप में मनाया जाता है | लेकिन हम में से ज्यादातर लोग इस बात को नहीं जानते होंगे की हम ये दिन क्यों मनाते है |
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ऐसा बताया जाता है 19 वी शताब्दी के पहले से ही अप्रैल फूल बनाने का प्रचलन चला आ रहा है, और इसके पीछे यह वजह है की इंग्लिश साहित्य के बड़े ज्ञानकार ज्योति चौसर की पहली ग्रन्थ कैंटरबरी टेल्स
में 1 अप्रैल और बेवकूफी के बीच संबंध स्थापित किया गया था इसीलिए इस दिन अफवाहें फैला कर शरारत कर के दुसरे लोगों को मूर्ख बना कर और फिर अपनी शरारत को बता कर चिल्ला कर कहते अप्रैल फूल बनाया कुछ इस तरह से इस दिन को मनाया जाता है ।
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अप्रैल फूल को कई देशों में एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है और बताया जाता है की इस दिन को मनाने की प्रेरणा रोमन त्योहार हिलेरिया से ली गई है , और भारतीय त्योहार होली और मध्यकाल का फीस्ट ऑफ फूल (बेवकूफों की दावत) भी हिलेरिया से ही प्रभावित है |
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इसके अलावा इस दिन को मानाने का एक कारण यह भी माना जाता है कि साल 1539 में फ्लेमिश कवि एडवर्ड डे डेने ने एक ऐसे ऑफिसर के बारे में एक किताब लिखी जिसने अपने नौकरों को एक बेवकूफी की यात्रा पर 1 अप्रेल को भेजा था और साल 1968 में जॉन औब्रे ने मूर्खों का छुट्टी का दिन कहा क्योंकि इस दिन बहुत सारे लोगो को बेवकूफ बना कर लंदन के टॉवर पर एकत्रित कर दिया गया था ।
इन्ही कुछ कारणों की वजह से एक अप्रैल को April fools day के रूप में मनाया जाता है |