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Updated on May 9, 2026news-current-topics

पेरिस समझौते से क्यों अलग हुआ अमेरिका?

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Answered on Dec 29, 2017

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते से अमेरिका को अलग करने के फैसले की आज घोषणा की. उन्होंने कहा कि ओबामा प्रशासन के दौरान 190 देशों के साथ किए गए इस समझौते पर फिर से बातचीत करने की जरुरत है.

ट्रंप ने कहा कि कुछ सालों में अमेरिका पर वित्तीय बढ़त हासिल कर लेगा भारत, चीन और भारत जैसे देशों को पेरिस समझौते से सबसे ज्यादा फायदा होने की दलील देते हुए ट्रंप ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर समझौता अमेरिका के लिए अनुचित है क्योंकि इससे उद्योगों और रोजगार पर बुरा असर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि भारत को पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने के लिए अरबों डॉलर मिलेंगे और चीन के साथ वह आने वाले कुछ साल में कोयले से संचालित बिजली संयंत्रों को दोगुना कर लेगा. ट्रंप ने कहा कि भारत, अमेरिका पर वित्तीय बढ़त हासिल कर लेगा.

अमेरिका के कारोबारियों की हितों की रक्षा के लिए लिया फैसला- व्हाइट हाउस के रोज गार्डन से इस फैसले की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें पिट्सबर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित किया गया है ना कि पेरिस का. उन्होंने कहा कि वह अमेरिका के कारोबारी और कामगारों के हितों की रक्षा करने के लिए यह निर्णय ले रहे हैं.

ट्रम्प ने कहा कि मैं देश के अच्छे लोगों के लिए लड़ रहा हूं:- राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं हर दिन इस देश के अच्छे लोगों के लिए लड़ रहा हूं. इसलिए अमेरिका और उसके नागरिकों की रक्षा करने के अपने गंभीर कर्तव्य को पूरा करने के लिए अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते से हटेगा लेकिन उन शर्तों के साथ पेरिस समझौते या पूरी तरह से नए समझौते पर बातचीत शुरू करेगा जो अमेरिका, उसके उद्योगों, कामगारों, लोगों और करदाताओं के लिए उचित हों.’’

अमेरिकी नागरिकों के भले से पहले किसी और चीज के बारे में नहीं सोच सकता:- ट्रंप ने कहा, ‘‘हम इससे बाहर हो रहे हैं लेकिन फिर से बातचीत शुरू करेंगे और हम देखेंगे कि क्या हम एक ऐसा समझौता कर सकते हैं जो उचित हो. अगर हम कर सकें तो यह अच्छा होगा और अगर नहीं कर सकें तो भी कोई बात नहीं. राष्ट्रपति के तौर पर मैं अमेरिकी नागरिकों के भले से पहले किसी और चीज के बारे में नहीं सोच सकता.’’

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Answered on May 9, 2026

Paris Agreement एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जिसका उद्देश्य दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन को रोकना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। इस समझौते में लगभग सभी देशों ने हिस्सा लिया था, लेकिन United States ने दो बार इसमें से अलग होने या हटने का फैसला लिया, जो काफी चर्चा में रहा।

सबसे पहले 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति Donald Trump ने घोषणा की कि अमेरिका पेरिस समझौते से बाहर होगा। उनका तर्क था कि यह समझौता अमेरिका की अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर नकारात्मक असर डालता है। उनका मानना था कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए लगाए गए नियमों से कोयला, तेल और गैस जैसे उद्योगों पर भारी दबाव पड़ेगा, जिससे नौकरियों में कमी आ सकती है।

इसके अलावा ट्रंप प्रशासन का यह भी कहना था कि चीन और भारत जैसे बड़े विकासशील देशों पर उतना सख्त दबाव नहीं है जितना अमेरिका पर है, इसलिए यह समझौता अमेरिका के लिए “असंतुलित” है।

हालांकि 2021 में नए राष्ट्रपति Joe Biden ने अमेरिका को फिर से इस समझौते में शामिल कर लिया, क्योंकि उनका मानना था कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक संकट है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।

इसके बावजूद, 2025 के आसपास फिर से राजनीतिक बहस तेज हुई और कुछ नीतिगत बदलावों के कारण अमेरिका की भागीदारी को लेकर सवाल उठते रहे। यह दिखाता है कि पेरिस समझौता सिर्फ पर्यावरण नहीं बल्कि राजनीति और अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।

अगर आसान भाषा में समझें तो अमेरिका के पेरिस समझौते से हटने की मुख्य वजहें थीं—आर्थिक दबाव, उद्योगों की चिंता, नौकरियों पर असर और अंतरराष्ट्रीय नियमों में असमानता की धारणा।

आज भी यह विषय दुनिया भर में ट्रेंडिंग रहता है क्योंकि जलवायु परिवर्तन एक बड़ी समस्या है और हर देश अपनी आर्थिक स्थिति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

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