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Updated on Jul 20, 2024others

कैबिनेट मिशन भारत में क्यों आया था ?

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Answered on Jul 20, 2024

कैबिनेट मिशन भारत में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना थी जो 1946 में हुई थी। यह मिशन भारत की स्वतंत्रता और विभाजन के इतिहास में एक अहम मोड़ साबित हुआ। आइए इस मिशन के बारे में विस्तार से जानें:

 

कैबिनेट मिशन भारत में क्यों आया था ?

 

कैबिनेट मिशन का गठन और उद्देश्य:
कैबिनेट मिशन का गठन ब्रिटिश सरकार द्वारा किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को स्वतंत्रता देने के लिए एक उपयुक्त योजना तैयार करना था। मिशन में तीन सदस्य शामिल थे - लॉर्ड पेथिक लॉरेंस, सर स्टैफोर्ड क्रिप्स और ए.वी. अलेक्जेंडर। ये तीनों ब्रिटिश कैबिनेट के प्रमुख सदस्य थे।

मिशन की आवश्यकता:

1.द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई थी। ऐसे में भारत जैसे विशाल उपनिवेश को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा था।
2.भारत में स्वतंत्रता आंदोलन तेज हो रहा था। 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन इसका एक प्रमुख उदाहरण था।
3.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच मतभेद बढ़ रहे थे। इन दोनों प्रमुख दलों के बीच सहमति बनाना जरूरी था।
4.अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत को स्वतंत्रता देने का दबाव बढ़ रहा था।

कैबिनेट मिशन की प्रमुख योजनाएँ:

1.संघीय योजना: इस योजना के अनुसार, भारत को तीन भागों में बाँटा जाना था - पूर्वोत्तर और पश्चिमोत्तर के मुस्लिम बहुल क्षेत्र तथा शेष हिंदू बहुल क्षेत्र। इन तीनों क्षेत्रों को मिलाकर एक संघीय सरकार बनानी थी।
2.अंतरिम सरकार: जब तक नई संविधान सभा का गठन नहीं हो जाता, तब तक एक अंतरिम सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
3.संविधान सभा: एक नई संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव रखा गया जो स्वतंत्र भारत का संविधान तैयार करेगी।
4.रियासतों का भविष्य: देशी रियासतों को यह अधिकार दिया गया कि वे चाहें तो भारतीय संघ में शामिल हो सकती हैं या स्वतंत्र रह सकती हैं।

 

कैबिनेट मिशन भारत में क्यों आया था ?


मिशन
के परिणाम और प्रभाव:
1.कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने शुरुआत में इस योजना को स्वीकार किया। हालाँकि, बाद में मुस्लिम लीग ने इसे अस्वीकार कर दिया।
2.मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त 1946 को "प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस" मनाया, जिससे सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे।
3.अंतरिम सरकार का गठन हुआ जिसमें जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने।
4.कैबिनेट मिशन की असफलता के बाद, ब्रिटिश सरकार ने भारत को विभाजित करने का निर्णय लिया।
5. इस मिशन की असफलता ने अंततः 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन की नींव रखी।

कैबिनेट मिशन की समीक्षा:
कैबिनेट मिशन एक महत्वाकांक्षी प्रयास था जो भारत को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा था। हालाँकि, यह अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल नहीं हो सका। इसके पीछे कई कारण थे:

1.मुस्लिम लीग की अड़ियल रवैया: मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ने अलग पाकिस्तान की माँग पर जोर दिया। वे किसी भी ऐसी योजना को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे जो उनकी इस माँग को पूरा न करे।

2.कांग्रेस की अनिच्छा: कांग्रेस भी पूरी तरह से इस योजना के पक्ष में नहीं थी। उन्हें लगता था कि यह योजना देश के विभाजन की ओर ले जा सकती है।

3. ब्रिटिश सरकार की दोहरी नीति: ब्रिटिश सरकार एक तरफ तो भारत को स्वतंत्रता देना चाहती थी, लेकिन दूसरी तरफ वह अपने हितों की भी रक्षा करना चाहती थी।

4. समय की कमी: मिशन के पास भारत की जटिल समस्याओं को समझने और उनका समाधान निकालने के लिए पर्याप्त समय नहीं था।

कैबिनेट मिशन का ऐतिहासिक महत्व:
हालाँकि कैबिनेट मिशन अपने मूल उद्देश्य में असफल रहा, फिर भी इसका भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है:

1.यह भारत को स्वतंत्रता देने की दिशा में ब्रिटिश सरकार का पहला गंभीर प्रयास था।
2.इस मिशन ने भारत के विभाजन की संभावना को स्पष्ट कर दिया।
3.इसने भारतीय नेताओं को एक साथ लाने और उनके बीच वार्ता कराने का प्रयास किया।
4.मिशन की असफलता ने ब्रिटिश सरकार को यह एहसास करा दिया कि अब भारत में उनका शासन लंबे समय तक नहीं चल सकता।
5.इस मिशन के बाद ही ब्रिटिश सरकार ने लॉर्ड माउंटबेटन को भारत का अंतिम वायसराय नियुक्त किया, जिन्होंने अंततः भारत के विभाजन की प्रक्रिया को अंजाम दिया।

कैबिनेट मिशन भारत में क्यों आया था ?

 

मिशन की आवश्यकता:
कैबिनेट मिशन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय था। यह मिशन भले ही अपने मूल उद्देश्य में सफल नहीं हो सका, लेकिन इसने भारत की स्वतंत्रता की प्रक्रिया को तेज कर दिया।

इस मिशन की असफलता ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत का विभाजन अब अनिवार्य हो गया है। इस तरह, कैबिनेट मिशन ने भारत के इतिहास की दिशा को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया और आधुनिक भारत के निर्माण में एक अहम भूमिका निभाई।.

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ABOUT THE AUTHORHimani Sharma

Himani Sharma is a subject matter expert and content writer with over 6 years of experience covering travel, government schemes, and personal development across digital platforms in India. She holds a Master's degree in Social Sciences from Banaras Hindu University (BHU), an academic background that informs the research depth and analytical approach she brings to every topic she covers. Her content spans domestic and international travel guides, breakdowns of central and state government welfare schemes, and practical personal development resources for Indian readers navigating career, finance, and everyday life decisions. Her work has appeared on platforms including Nativeplanet, Sarkari Result Blog, and UrbanClap Stories, where she has built a reputation for content that is thoroughly researched, clearly structured, and genuinely useful. Over six years, Himani has published 200+ articles across her subject areas, developing a methodical content approach — verified sources, evidence-based arguments, and writing that serves the reader's actual information need rather than just ranking for keywords. Her subject matter grounding gives her a consistent edge in producing content that holds up to professional scrutiny across three distinct but equally research-intensive categories. Across all her writing, her standard remains the same — research first, clarity always, and content that serves the reader rather than just filling a page.

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Answered on Jul 18, 2024

कैबिनेट मिशन भारत क्यों आया था:-

दोस्तों जैसा आप सब जानते हैं की 1947 से पहले देश में ब्रिटिश सरकार का राज था एवं देश की सत्ता का बागडोर भी ब्रिटिश सरकार ही संभालती थी लेकिन आजादी के ठीक पहले मार्च 1946 में कैबिनेट मिशन को अंग्रेजों द्वारा भारत भेजा गया था। उस समय भारतीय कांग्रेस दल और मुस्लिम लीग में बंटवारे को लेकर बहस छिड़ी हुई थी। मुस्लिम लीग अपनी एक अलग देश पाकिस्तान की मांग कर रही थी।

ऐतिहासिक सूत्रों के मुताबिक दूसरे विश्व युद्ध के समाप्ति के बाद जब ब्रिटेन में क्लाइमेट इटली के नेतृत्व में लेबर पार्टी की नई सरकार बनी तब उन्होंने भारत के लोगों को एकजुट रखने और सभी स्थायी समस्याओं के समाधान करने के लिए एक तीन सदस्य संसदीय समिति का गठन किया और इसे भारत भेजा। इस संसदीय समिति में तीन सदस्य शामिल थे।

 

कैबिनेट मिशन भारत में क्यों आया था ?

 

जिनमे भारत सचिव लॉर्ड पैथिक, व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष सर स्टेफोर्ड क्रिप्स और सैन्य सदस्य ए. वी अलेक्जेंडर का नाम सामने आता है। सूत्रों के मुताबिक पैथिक लॉरेंस को ही इस संसदीय समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। इस तीन सदस्य संसदीय समिति को ही कैबिनेट मिशन के नाम से जाना जाता है।

 

कैबिनेट मिशन के भारत आने की मुख्य वजह थी कि कैबिनेट मिशन भारत के संविधान निर्माण करने के तरीके पर सुझाव रखना चाहता था। यह एक ऐसी संसद की स्थापना करना चाहता था जिससे भारत के लगभग सभी बड़े दलों का समर्थन प्राप्त हो एवं भारत के सभी राजनीतिक पार्टियों और देसी रियासतों के साथ बातचीत करके एक सहमति तैयार करके एक संविधान सभा का गठन करना भी कैबिनेट मिशन का उद्देश्य था।

इसके अलावा यह भारतीय नेताओं और ब्रिटिश सरकार के बीच एक अंतरिम सरकार का गठन करना चाहता था जो स्वतंत्रता के पश्चात देश की प्रशासन व्यवस्था को संभाल सके। सरल शब्दों में कहे तो कैबिनेट मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता के लिए एक योजना तैयार करना तथा ठीक ढंग से विचार विमर्श करके एक ऐसा संविधान निर्माण करना था जो पूरे देश के हित में हो और स्वतंत्रता के पश्चात देश की सत्ता सही सरकार के हाथ में जा सके एवं भविष्य में देश चलाने में एवं कानून व्यवस्था के लिए आम जनता या राजनीतिक पार्टियों को संघर्ष न करना पड़े।

 

कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव एवं परिणामः-

कैबिनेट मिशन ने कई सारे प्रस्ताव रखें एवं कहा की भारत के प्रत्येक प्रांत को संविधान सभा में प्रतिनिधि भेजने होंगे एवं यह प्रतिनिधि उसे प्रांत के जनसंख्या के अनुपात पर निर्भर करेगा। यानी कि प्रत्येक 10 लाख की जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि को संविधान सभा में भेजना प्रत्येक प्रांत के लिए अनिवार्य होगा। इसके अलावा संविधान सभा में कुल कितने सदस्य होंगे एवं कितने ब्रिटिश भारतीय प्रांत से निर्वाचित होंगे यह सब भी कैबिनेट मिशन में बताया गया। इसके अलावा कैबिनेट मिशन ने मुस्लिम लीग की मांग जो की एक देश का बंटवारा यानी कि पाकिस्तान देश का निर्माण करना था उसे भी अस्वीकार कर दिया था क्योंकि कैबिनेट मिशन के सदस्यों का मानना था कि अगर भारत विभाजन करके पाकिस्तान देश का निर्माण किया गया तो एक बहुत बड़ी गैर मुस्लिम जनसंख्या पाकिस्तान चली जाएगी और एक बड़ी मुस्लिम आबादी भारत में रह जाएगी तो फिर सांप्रदायिक मुद्दे हल नहीं हो पाएंगे। इसलिए उन्होंने बंटवारे की मांग को खारिज किया। फिर भी मोहम्मद अली जिन्ना के जिद्द के कारण बटवारा हुआ।

 

कैबिनेट मिशन भारत में क्यों आया था ?

 

कैबिनेट मिशन के परिणाम स्वरुप ही जब 1946 में संविधान सभा के गठन के लिए विधान मंडलों में निर्वाचन हुआ एवं कांग्रेस को 296 में से 208 सीटों पर जीत मिली तो मुस्लिम लीग यह जीत बर्दाश्त नहीं कर पाई एवं 16 अगस्त 1946 को जवाहरलाल नेहरू को अंतरिम सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किए जाने पर मुस्लिम लीग ने प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस शुरू कर दिया था।

जिसके आधार पर पूरे भारत में सांप्रदायिक दंगों की आग लग गई और बड़ी संख्या में हिंदू, मुसलमान तथा अन्य जाति के लोग मारे गए। यही कारण है कि मौलाना अब्दुल कलाम आजाद ने अपने लेख में 16 अगस्त को भारत के लिए "काला दिवस" घोषित किया था।

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Himani Sharma is a subject matter expert and content writer with over 6 years of experience covering travel, government schemes, and personal development across digital platforms in India. She holds a Master's degree in Social Sciences from Banaras Hindu University (BHU), an academic background that informs the research depth and analytical approach she brings to every topic she covers. Her content spans domestic and international travel guides, breakdowns of central and state government welfare schemes, and practical personal development resources for Indian readers navigating career, finance, and everyday life decisions. Her work has appeared on platforms including Nativeplanet, Sarkari Result Blog, and UrbanClap Stories, where she has built a reputation for content that is thoroughly researched, clearly structured, and genuinely useful. Over six years, Himani has published 200+ articles across her subject areas, developing a methodical content approach — verified sources, evidence-based arguments, and writing that serves the reader's actual information need rather than just ranking for keywords. Her subject matter grounding gives her a consistent edge in producing content that holds up to professional scrutiny across three distinct but equally research-intensive categories. Across all her writing, her standard remains the same — research first, clarity always, and content that serves the reader rather than just filling a page.

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