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Anushka

Apr 28, 2026news-current-topics

चंडीगढ़ मेयर चुनाव को सुप्रीम कोर्ट ने क्यों बताया- लोकतंत्र का मज़ाक ?

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Apr 27, 2026

चंडीगढ़ मेयर चुनाव का मामला भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे चौंकाने वाले मामलों में से एक था। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने इसे "लोकतंत्र का मजाक" (Mockery of Democracy) इसलिए कहा क्योंकि चुनाव अधिकारी की हरकतें कैमरे पर साफ पकड़ी गई थीं।

यहाँ वो 3 मुख्य कारण हैं जिनकी वजह से कोर्ट ने इतनी सख्त टिप्पणी की:

1. बैलेट पेपर के साथ छेड़छाड़ (कैमरे पर लाइव)

चुनाव का सबसे विवादित हिस्सा वो वीडियो था, जिसमें पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) अनिल मसीह बैलेट पेपर पर पेन से कुछ निशान बनाते हुए देखे गए।

  • कोर्ट ने गौर किया कि वे निशान उन बैलेट पेपर्स पर लगाए गए जो विपक्षी गठबंधन (AAP और कांग्रेस) के पक्ष में थे।

  • इन निशानों के आधार पर अधिकारी ने उन वोटों को 'अवैध' घोषित कर दिया ताकि बीजेपी उम्मीदवार जीत सके।

2. बहुमत को पलटना

संख्या बल के हिसाब से AAP और कांग्रेस गठबंधन के पास 20 वोट थे, जबकि बीजेपी के पास 16 वोट

  • अधिकारी ने गठबंधन के 8 वोटों को रद्द कर दिया, जिससे उनके वोट 12 रह गए और बीजेपी के 16 वोटों को बहुमत मानकर विजेता घोषित कर दिया।

  • कोर्ट ने कहा कि यह जनादेश की सरेआम चोरी है।

3. चुनाव अधिकारी का आचरण

सुप्रीम कोर्ट इस बात से सबसे ज्यादा नाराज था कि एक संवैधानिक प्रक्रिया के लिए नियुक्त अधिकारी निष्पक्ष रहने के बजाय किसी एक पार्टी के "एजेंट" की तरह काम कर रहा था।

  • कोर्ट ने कहा कि अधिकारी कैमरे की तरफ इसलिए देख रहा था जैसे किसी बात का डर हो या वह कुछ छिपा रहा हो।

  • चीफ जस्टिस ने यहाँ तक कहा, "इस अधिकारी पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।"


नतीजा क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई, बल्कि भारतीय इतिहास में पहली बार:

  • चंडीगढ़ मेयर चुनाव के परिणाम को रद्द कर दिया।

  • चुनाव दोबारा कराने के बजाय, उन्हीं पुराने बैलेट पेपर्स की दोबारा गिनती का आदेश दिया (रद्द किए गए 8 वोटों को सही मानते हुए)।

  • अंततः, AAP के कुलदीप कुमार को विजेता घोषित किया गया।

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