असल में हमारे सर के घूमने का संबंध हमारे कान से होता है l हमारे कान सुनने के साथ शरीर का संतुलन भी करते हैं हमारे कान का बाहरी हिस्सा आवाज को हमारे कान के आंतरिक अंगों तक पहुंचाता है और आंतरिक है आवाज को विद्युत सिग्नल में बदलकर दिमाग तक भेजता है l आंतरिक काम की संरचना टेढ़ी-मेढ़ी होती है l जिसमें अनियमित आकार की नलिकाएं होती हैं इन नलिकाओं में लिक्विड भरा रहता है l यह द्रव हमारे शरीर को नियंत्रित बनाए रखने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है l
इसलिए जब हम गोल-गोल घूमते हैं तो हमारे कानों में मौजूद द्रव भी घूमने लगता है गोल गोल घूमने के बाद जब हम अचानक रुक जाते हैं तब यह है द्रव कुछ देर तक घूमता रहता है l जिसके कारण हमारा सर चकराने लगता है l और जब थोड़ी देर में यह द्रव घूमना बंद हो जाता है तब हम सामान्य अवस्था में आ जाते हैं l और हमें चक्कर नहीं आता है l


