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Medha singh kapoor· 6 years ago
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अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है?

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भारत में वैसे तो सारे त्यौहार मनाए जाते हैं उन्हीं में से एक है अक्षय तृतीया का त्यौहार और इस त्योहार को मनाने के पीछे का कारण यह है कि यह दिन बहुत ही शुभ होता है इस दिन आप कुछ सामान खरीद सकते हैं शादी ब्याह कर सकते हैं। क्योंकि यह दिन बहुत ही शुभ होता है। अक्षय तृतीया को आखा तीज भी कहते हैं इस त्यौहार को भारतीय महीने वैशाख के शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है भारतीय पौराणिक के अनुसार इस दिन हम जितना अधिक दान करते हैं उसका 4 गुना वापस लौट कर हमारे पास आता है। इसलिए इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है।Article image

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Krishna Patel
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Answered on01/25/22
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हमारे भारत में धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के अनुसार संस्कृति भी अगल है| सभी देशों में अलग अलग त्यौहार अलग ढंग से मनाये जाते हैं| सभी धर्मों के अपने खास त्यौहार होते हैं, जिन्हें मानाने का उनका अपना अलग तरीका होता है और अपना ही उत्साह होता है| अगर बात हिन्दू धर्म की करें तो हिन्दू धर्म में हर महीने कोई न कोई पर्व जरुर होता है| लगभग सभी पुरे वर्ष कोई न कोई त्यौहार जरुर मनाये जाते हैं|


(इमेज - वेब दुनिया)


महीने को तिथियों के हिसाब से विभाजित किया गया है और हर महीने में 15 – 15 की दो तिथि होती है, जिसमें कई सारे पर्व आते हैं| जैसे वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को ही देख लिजिये| यह ऐसी तिथि मानी जाती है जिसे बहुत ही सौभाग्यशाली कहा जाता है| इस तिथि को तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है|


इसके पीछे भी बहुत सारी मान्यता कही जाती है| इस त्यौहार से बहुत सारी कहानियाँ जुड़ी हुईं हैं| अक्षय तृतीया को भगवान परशुराम के जन्म दिन के रूप में भी मनाया जाता है| नर और नारायण के अवतार के लिए भी इस त्यौहार को मनाया जाता है| मान्यता है कि इस तिथि के बाद से ही त्रेता युग का आरम्भ हुआ था जिस युग में भगवान राम इस धरती में मनुष्य के रूप में जन्मे थे|


इस दिन जो व्रत लेता है, दान करता है उसको मनचाहा फल मिलता है| उसके भण्डार भरे रहते हैं, लक्ष्मी जी उसके घर सदेव बनी रहती है| क्योंकि यह ऐसा व्रत है कि इसका फल हमेशा के लिए होता है, इस व्रत का फल कभी कम नहीं होता, कभी नष्ट नहीं होता इसलिये इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है|


इस दिन सोने की कोई भी चीज़ खरीदना बहुत शुभ माना जाता है| मान्यता है कि इस दिन सोना खरीदने से घर में समृद्धि आती है और इस दिन कुछ न कुछ दान जरुर करें|


इस साल 26 अप्रैल 2020 को अक्षय तृतीया पड़ रही है| पूजा मुहूर्त – सुबह 05:48 से दोपहर 12:19 मिनट तक|


सोना खरीदने का शुभ महूर्त : सुबह 05:48 से दोपहर 13:22 तक



Answered by
P
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Answered on04/13/20
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अक्षय तृतीया, जिसे अक्ती या अखा तीज के नाम से भी जाना जाता है, हिंदुओं और जैनियों का एक वार्षिक बसंत उत्सव है। यह वैशाख महीने के ब्राइट हाफ (शुक्ल पक्ष) की तीसरी तीथ (चंद्र दिन) को पड़ता है। यह भारत और नेपाल में हिंदुओं और जैनों द्वारा क्षेत्रीय रूप से एक शुभ समय के रूप में मनाया जाता है, "संयुक्त समृद्धि के तीसरे दिन" के रूप में।
त्योहार की तारीख बदलती रहती है और इसे हिंदू हिंदू कैलेंडर के अनुसार निर्धारित किया जाता है, और ग्रेगोरियन कैलेंडर में हर साल अप्रैल या मई में पड़ता है।

संस्कृत में, "अक्षय" (अक्षय) शब्द का अर्थ "समृद्धि, आशा, आनंद, सफलता" के अर्थ में "पैसा, कभी समाप्त नहीं होता" है, जबकि तृतीया का अर्थ "तीसरा" है। यह हिंदू कैलेंडर में वैशाख के वसंत महीने के "तीसरे चंद्र दिवस" ​​के नाम पर रखा गया है, जिस दिन इसे मनाया जाता है


भारत के कई क्षेत्रों में नए उपक्रम, विवाह, सोने या अन्य संपत्ति जैसे महंगे निवेश और किसी भी नई शुरुआत के लिए दिन को शुभ माना जाता है। यह उन प्रियजनों के स्मरण का दिन भी है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। यह दिन महिलाओं, विवाहित या अविवाहितों के लिए क्षेत्रीय रूप से महत्वपूर्ण है, जो अपने जीवन में पुरुषों की भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं या भविष्य में जिस व्यक्ति से उनकी सगाई होती है। प्रार्थना के बाद, वे अंकुरित चने (अंकुरित अनाज), ताजे फल और भारतीय मिठाई वितरित करते हैं। यदि अक्षय तृतीया सोमवार (रोहिणी) को पड़ती है, तो यह त्योहार और भी अधिक शुभ माना जाता है। इस दिन उपवास, दान और दूसरों की मदद करना एक अन्य उत्सव की प्रथा है




Answered by
A
Awni rai Author
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Answered on04/13/20
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