होली रंगो का त्योहार है। इसे सभी लोग पूरे हर्षोउल्लास के साथ मनाते हैं। आपने मथुरा और वृन्दावन की होली के बारे में तो सुना ही होगा। आखिर यहाँ की होली इतनी खास क्यो होती हैं? आइये इस लेख के द्वारा हम आपको इसकी खासियत से अवगत करायेंगे । मथुरा में हम सभी के प्रिय और आराध्य देव श्री कृष्ण का जन्म स्थान है। यह त्योहार इसलिए भी इतना खास है, क्योकि यह श्री कृष्ण का प्रिय त्योहार है। मथुरा और वृन्दावन में होली अलग अलग तरीको से मनाई जाती हैं जैसे :-
लठमार होली :- लठमार होली, होली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमे बरसाना की महिलाओ द्वारा नंदगाँव के पुरुषो को पिटा जाता हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार कृष्ण ने अपनी मैया से पूछा था कि वह इतने काले और बरसाना की राधा इतनी गोरी क्यु है। इस पर मैया ने हँसते हुए उन्हे राधा जी रंग लगा कर उनके गोरे रंग को ढक देने की बात कही। श्री कृष्ण ने अपने साथियो के साथ नन्दगाँव से लेकर बरसान तक सभी गोपियो और राधा जी को रंग लगाया। राधा जी बहुत क्रोधित हुई और प्रतिशोध लिया । तभी से यह प्रथा प्रचलित है के नंदगाँव के पुरुषो को बरसाना की महिलाओ द्वारा पिटा जाता हैं। इसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है।
.jpeg)
फुलो की होली :-होली से ठीक पहले एकादशी के दिन वृन्दावन के बांके बिहारी मंदीर में एक अनोखी होली मनाई जाती है। यह फूलो के साथ मनाई जाती है। इसलिए इसका नाम फूलो वाली होली पड़ा।
.jpeg)
विधवा होली :-भारत में विधवाओ को बहुत से चीजो से वंचित रखा जाता था। और उन्हे अक्सर अलगाव का सामना करना पड़ता था। वह कभी होली नही खेल सकती थी। लेकिन कुछ सालों पहले वृन्दावन की विधवाओ ने इस परम्परा को तोड़ते हुए इस त्योहार को मनाया।
.jpeg)









