Updated on12/24/25
भूगोल में हर स्थल का एक स्वरूप नियत किया जाता है जो की उसकी पहचान होती है। अपने भूस्वरूप को देखते हुए हर स्थल को भौगोलिक भाषा में अलग अलग स्वरुप में देखा जाता है। जिस स्थल के एक और जमीन और बाकी तीन और पानी हो उसे महाद्वीप कहा जाता है। अगर भारत के भौगोलिक स्थान को देखा जाए तो इसके तीन और जल सीमा और एक और जमीन सीमा है इस लिए उसे महाद्वीप कहा जाना उचित हो सकता है।
उपमहाद्वीप उस स्थान को कहा जाता है की जिस की तीन और जमीन हो एक और पानी हो पर वो महाद्वीप से विस्तार के नजरिये से छोटा हो। भारत का भौगोलिक स्थान इस व्याख्या में फिट बैठता है। विविध देशो के भारत से अलग होने की वजह से इस की सीमाए मर्यादित है और वो महाद्वीप नहीं कहा जा सकता। ऐसी स्थिति में भूगोलशास्त्री उसे महाद्वीप कहते है जो की भारत के लिए पूर्ण रूप से योग्य है। इस क्षेत्र में सांस्कृतिक वैविध्य, और जीव वैविध्य एवं भूगोलीय वैविध्य देखा जा सकता है जिस के चलते उसे उपमहाद्वीप कहना पूर्णत: उचित है। अगर बाकी के देश जैसे की भूटान, नेपाल, श्री लंका, बांग्लादेश और मालदीव्स अगर भारत में होते तो उसे सिर्फ महाद्वीप कहा जा सकता था।
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