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पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार बहुत खास क्यों होता है?

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Updated on May 30, 2026

लोहड़ी पंजाब का एक प्रमुख और बहुत ही लोकप्रिय त्यौहार है, जो हर साल 13 जनवरी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार मुख्य रूप से सर्दियों के अंत और रबी की फसलों की कटाई के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। पंजाब में लोहड़ी को खास इसलिए माना जाता है क्योंकि यह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं है, बल्कि यह किसानों की मेहनत, प्रकृति और खुशहाली से जुड़ा हुआ उत्सव है।

लोहड़ी का सबसे महत्वपूर्ण कारण कृषि संस्कृति से जुड़ा होना है। पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ गेहूं, सरसों और गन्ने जैसी फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। लोहड़ी के समय खेतों में गेहूं की फसल पककर तैयार होती है, इसलिए किसान इस दिन आग जलाकर प्रकृति और भगवान का धन्यवाद करते हैं। आग के चारों ओर लोग घूमकर तिल, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली अर्पित करते हैं।

लोहड़ी को खुशियों और मेल-जोल का त्यौहार भी माना जाता है। इस दिन परिवार, दोस्त और पड़ोसी एक साथ इकट्ठा होकर लोकगीत गाते हैं, भांगड़ा और गिद्दा करते हैं। ढोल की थाप पर नाच-गाना इस त्योहार को और भी रंगीन बना देता है। यह समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करता है।

इस त्यौहार का एक और खास पहलू नए जन्मे बच्चों और नवविवाहित जोड़ों से जुड़ा है। जिन घरों में नया बच्चा जन्म लेता है या शादी होती है, वहाँ पहली लोहड़ी बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। यह खुशी और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

इसके अलावा लोहड़ी सर्दियों के मौसम में शरीर को गर्म रखने वाले खाद्य पदार्थों जैसे तिल, गुड़ और मूंगफली के सेवन का भी प्रतीक है। ये चीजें स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होती हैं और शरीर को ऊर्जा देती हैं।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि पंजाब में लोहड़ी इसलिए बहुत खास है क्योंकि यह कृषि, संस्कृति, परिवारिक एकता और खुशहाली का प्रतीक है। यह त्यौहार न केवल किसानों की मेहनत का सम्मान करता है, बल्कि समाज में प्रेम और उत्साह भी फैलाता है।

यहां एक और रोमांचक चर्चा पढ़ें: बसंत पंचमी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है ?

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Updated on Nov 3, 2025

पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार बहुत ही खास होता है। वैसे तो यह त्यौहार देश के कई राज्‍यों जैसे हरियाणा, हिमाचल, दिल्‍ली व जम्‍मू-कश्‍मीर में भी मनाया जाता है, परन्तु पंजाब में इस त्यौहार की मान्यता सबसे खास और सबसे उत्साह वाली है। इस त्यौहार को पंजाब में नई फसलों के साथ जोड़कर भी देखा जाता है। लोहड़ी के समय समय गेहूं व सरसों की फसल अंतिम चरण में होती है, इसके चलते लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है । इस साल लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जा रही है । नए विवाहित जोड़े के लिए यह त्यौहार बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है । लोग इस दिन जलने वाली अग्नि में आहुति देकर अपने जीवन में सुख समृद्धि की कामना करते हैं । लोहड़ी , हिन्दू धर्म के मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाने वाले त्यौहार है ।

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(इमेज -गूगल )

जैसा कि लोहड़ी को मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है, मान्यता के अनुसार इसका संबंध सूर्य के मकर राशि से होता है। नए साल की शुरुआत से ही लोहड़ी की तैयारियां शुरू हो जाती है। यह त्यौहार नए साल में भी एक नए ताजगी और उमंग लेकर आता है। लोहड़ी के बाद रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। लोहड़ी के बाद मौसम में कुछ बदलाव देखने को मिलता है। लोहड़ी इतना प्रसिद्ध और लोकप्रिय त्यौहार है कि यह पूरे विश्व भर में मनाया जाता है , लोहड़ी के दिन सभी लोग गले मिल कर इस त्यौहार की बधाई देते हैं ।

लोहड़ी से जुडी कहानी :

मान्य के अनुसार द्वापर युग में भगवान विष्णु ने जब श्री कृष्ण का अवतार लिया तब कंस ने छोटे से बाल कृष्ण को मारने के लिए प्रतिदिन कई प्रयास किये। एक समय जब लोग मकर संक्रांति के पूजन में व्यस्त थे तब कंस ने श्री कृष्ण को मारने के लिए लोहित नाम की राक्षसी को भेजा जिसको कृष्णा ने खेल-खेल में ही मार डाला। उस दिन से लोहित नाम की राक्षसी के नाम पर लोहड़ी उत्सव नाम रखा गया और यह त्यौहार मनाया जाने लगा । इस त्यौहार में अग्नि में तिल, मूंगफली, मुरमुरे की आहुति दी जाती है और साथ ही अपने जीवन में सुख समृद्धि की कामना की जाती है ।

यह है लोहड़ी की मान्यता और पूजा , जो कि मानव जीवन में सुख के आगमन के साथ मनाया जाता है ।

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