पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार बहुत खास क्यों होता है - Letsdiskuss
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पोस्ट किया 13 Jan, 2020 |

पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार बहुत खास क्यों होता है

bappa d

Blogger | पोस्ट किया 21 Jan, 2020

लोहड़ी का त्योहार हर साल उत्तर भारत में 13 जनवरी को मनाया जाता है। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में मकर संक्रांति से पहले की शाम को लोहड़ी का त्योहार नई फसल के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। पंजाब में नववधू और बच्चे की पहली लोहड़ी बहुत खास मानी जाती है। लोहड़ी की रात खुली जगह पर लड़कियों में पवित्र अग्नि लगाते हैं और परिवार व आस-पड़ोस के लोग लोकगीत गाते हुए नए धान के लावे के साथ खील, मक्का, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली आदि उस पवित्र अग्नि को अर्पित कर परिक्रमा करते हैं। 

Pandit Ayush

Blogger | | अपडेटेड 13 Jan, 2020

पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार बहुत ही खास होता है। वैसे तो यह त्यौहार देश के कई राज्‍यों जैसे हरियाणा, हिमाचल, दिल्‍ली व जम्‍मू-कश्‍मीर में भी मनाया जाता है, परन्तु पंजाब में इस त्यौहार की मान्यता सबसे खास और सबसे उत्साह वाली है। इस त्यौहार को पंजाब में नई फसलों के साथ जोड़कर भी देखा जाता है। लोहड़ी के समय समय गेहूं व सरसों की फसल अंतिम चरण में होती है, इसके चलते लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है । इस साल लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जा रही है । नए विवाहित जोड़े के लिए यह त्यौहार बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है । लोग इस दिन जलने वाली अग्नि में आहुति देकर अपने जीवन में सुख समृद्धि की कामना करते हैं । लोहड़ी , हिन्दू धर्म के मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाने वाले त्यौहार है ।


(इमेज -गूगल )

जैसा कि लोहड़ी को मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है, मान्यता के अनुसार इसका संबंध सूर्य के मकर राशि से होता है। नए साल की शुरुआत से ही लोहड़ी की तैयारियां शुरू हो जाती है। यह त्यौहार नए साल में भी एक नए ताजगी और उमंग लेकर आता है। लोहड़ी के बाद रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। लोहड़ी के बाद मौसम में कुछ बदलाव देखने को मिलता है। लोहड़ी इतना प्रसिद्ध और लोकप्रिय त्यौहार है कि यह पूरे विश्व भर में मनाया जाता है , लोहड़ी के दिन सभी लोग गले मिल कर इस त्यौहार की बधाई देते हैं ।


लोहड़ी से जुडी कहानी : 

मान्य के अनुसार द्वापर युग में भगवान विष्णु ने जब श्री कृष्ण का अवतार लिया तब कंस ने छोटे से बाल कृष्ण को मारने के लिए प्रतिदिन कई प्रयास किये। एक समय जब लोग मकर संक्रांति के पूजन में व्यस्त थे तब कंस ने श्री कृष्ण को मारने के लिए लोहित नाम की राक्षसी को भेजा जिसको कृष्णा ने खेल-खेल में ही मार डाला। उस दिन से लोहित नाम की राक्षसी के नाम पर लोहड़ी उत्सव नाम रखा गया और यह त्यौहार मनाया जाने लगा । इस त्यौहार में अग्नि में तिल, मूंगफली, मुरमुरे की आहुति दी जाती है और साथ ही अपने जीवन में सुख समृद्धि की कामना की जाती है ।

यह है लोहड़ी की मान्यता और पूजा , जो कि मानव जीवन में सुख के आगमन के साथ मनाया जाता है ।