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Aditya Singla

Marketing Manager (Nestle) | पोस्ट किया |


बैर मिटाने के लिए होली के त्योहार को ही क्यों चुना गया है? क्या इसके पीछे कोई किंवदंती है?


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| पोस्ट किया


होली का त्यौहार जो बड़े ही हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है | इस बार होली 18 मार्च को आने वाली है | लोग होली मनाते हैं परन्तु आज हम आपको बैर मिटाने के लिए होली के त्योहार को ही क्यों चुना गया बताते हैं | जैसा कि होली का त्यौहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है , इस दिन होलिका दहन किया जाता है | यह पर्व दो दिनों का होता है, जिसमें एक रात पहले 'होलिका दहन' और दूसरे दिन रंगों की होली खेली जाती है | जिसे 'धुरड्डी', 'धुलेंडी', 'धुरखेल' या 'धूलिवंदन' भी कहा जाता है | होली का त्यौहार सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि मुस्लिम भी मनाते हैं | 
- अकबर का जोधाबाई के साथ और जहांगीर का नूरजहां के साथ होली खेलना इस बात का विवरण इतिहास में किया गया है |
- होली को प्रेम का त्यौहार भी माना जाता है क्योंकि ऐसा मानते है इस दिन लोग आपसी रंजिशें मिटा कर एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाते है |
- होली फाल्गुन महीने में आने के कारण कई लोग इसे फाल्गुनी के नाम से भी जानते है |
- अब तक आपने केवल सुना होगा की त्योहारों पर जात - पात रंग भेद सब भुला कर एक दूसरे को गले लगा कर हर ख़ुशी मनानी चाहिए लेकिन इस बात को साबित किया राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह ने जहाँ पर होली से जुड़े गीतों के अलग ही रंग देखने को मिलते है |
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