माइटोकॉन्ड्रिया किसी भी कोशिका के अंदर पाया जा सकता है,जिसका मुख्य कार्य कोशिका के अंदर हर हिस्से में ऊर्जा पहुंचाना होता है, इसी वजह से माइटोकांड्रिया को कोशिका का पावर हाउस भी कहते है।
माइटोकॉण्ड्रिया की खोज सर्वप्रथम 1890 ई. में अल्टमेन नामक वैज्ञानिक द्वारा की गयी थी। अल्टमेन ने इसे बायोब्लास्ट तथा बेण्डा ने माइटोकॉण्डिया कहा गया था,जीवाणु तथा नील हरित शैवाल को छोड़कर शेष सभी सजीव पादप तथा जंतु कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य में अनियमित रूप से बिखरे हुए दोहरी झिल्ली आबंध कोशिकांगों क़ो माइटोकॉण्ड्रिया कहते हैं। कोशिका के अंदर सूक्ष्मदर्शी की मदद से देखने में यह गोल, लम्बे या अण्डाकार रूप मे दिखायी देते हैं।






