हमें हमेशा किताबों को अपने जीवन में अधिक महत्व देना चाहिए क्योंकि किताबें पढ़ने से ही हमें हर प्रकार का ज्ञान प्राप्त होता है और हम अपने इस समाज को अच्छे से जान सकते हैं। हमें अपने जीवन में किताबों को पढ़ने से सभ्यता और संस्कृति का विकास उत्पन्न होता है। किताब पढ़ने से व्यक्ति के विचार सकारात्मक होते हैं। व्यक्ति अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए अनेक प्रकार की किताबों को पड़ता है जैसे - हिंदी, संस्कृत, मैथ, साइंस, एग्रीकल्चर, गीता, पुराण आदि।
हमें किताबें क्यों पढ़नी चाहिए?
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किताबें पढ़ने से हमें ज्ञान मिलता है,हमें हमेशा अपने जीवन मे किताबें पढ़ना चाहिए। किताब पढ़ने से कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ता है, हम किताब स्पीड के साथ पढ़ना शुरू कर देते है तो हम स्कूल मे या फिर कही पर भी मंच मे पुरे कॉन्फिडेंस के साथ भाषण दे सकते है, भाषण देते समय किसी भी प्रकार की कोई हिचकिहाट नहीं होगी।
इसके अलावा किताब पढ़ने से हम अकेलपान बिल्कुल महसूस नहीं करते है, बल्कि तनाव मुक्त हो जाता है हमें किसी भी प्रकार की कोई चिंता नहीं रहती है।
किताब पढ़ना बहुत ही अच्छी आदत है। किताब एक ऐसी वस्तु है जिससे आप दुनिया की सारी खुशी, गम, दुनिया की सारी दौलत, दुनिया के किसी भी स्थान पर इकट्ठा कर सकते हैं. किताबें पढ़ने से वह सब कुछ पता चलता है जो बीत चुका होता है जब हमारा जन्म भी नहीं हुआ होगा तब के बारे में उसकी जानकारी हम किताब से ले सकते हैं। किताब पढ़ने से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं अलग-अलग भाषाओं में किताब लिखी रहती है हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, उर्दू, तमिल इसलिए हम अलग-अलग भाषाओं को भी सीख सकते हैं. और यदि हम कहीं घूमने दूसरे दे जाते हैं तो यह सब हमारे लिए बहुत उपयोगी होता है।
किताबे पढ़ना एक ब्रेन एक्सरसाइज की तरह काम करती है। किताबें पढ़ने से ना केवल हमारी याददाश्त में सुधार होता है, बल्कि हर एक चीज पर अटेंशन रखने की क्षमता भी बढ़ती जाती है, किताबें पढ़ने से ब्रेन को सीक्वेंस में सोचने में हेल्प मिलती है, और इस तरह से दिमाग के अटेंशन स्पैन को बढ़ाने में भी मदद करता है,यानि कि हम ज्यादा समय तक किसी भी चीज पर अच्छी तरह से फोकस कर पाते हैं, और और फोकस करके उस चीज क़ो अच्छी तरह से कर पाते है।
- हम इस ग्रह पर रहने वाली सबसे आरामदायक पीढ़ी हैं। बकवास यह है कि हम निश्चित रूप से सबसे ज्यादा खुश नहीं हैं। या सबसे प्यार, या सबसे शांतिपूर्ण।
- आपका भाग्य आपके द्वारा अनजाने में लिखा गया है। यदि आपके भौतिक शरीर में निपुणता है, तो आपके जीवन का पन्द्रह से बीस प्रतिशत हिस्सा और भाग्य आपके हाथों में होगा। यदि आपके मन में निपुणता है, तो आपके जीवन का पचास से साठ प्रतिशत प्रतिशत और भाग्य आपके हाथों में होगा। यदि आप अपने जीवन की ऊर्जाओं पर महारत हासिल करते हैं, तो आपके जीवन और भाग्य का सौ प्रतिशत आपके हाथों में होगा।
- अपने भाग्य को बनाने का मतलब यह नहीं है कि आपको दुनिया की हर स्थिति को नियंत्रित करना होगा। अपने भाग्य का निर्माण आपकी भलाई और आपके परम स्वभाव की ओर लगातार बढ़ रहा है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जीवन की सामग्री आपके आसपास क्या है। इसका सीधा सा मतलब है कि अपने आप को इस तरह से बनाना, कि आपके आस-पास की जो भी घटनाएँ और परिस्थितियाँ हैं, आप उनके द्वारा कुचल न जाएँ; आप उनकी सवारी करें।
- पांच मिनट के लिए अकेले बैठें और देखें कि आपका जीवन कैसा होगा यदि आप इस दुनिया में बिल्कुल अकेले थे। अगर आपके साथ तुलना करने के लिए कोई भी या कुछ भी नहीं था, तो आप वास्तव में लंबे समय तक क्या करेंगे? अगर कोई बाहरी प्रशंसा या आलोचना नहीं होती तो आपके लिए वास्तव में क्या मायने रखता है? यदि आप हर दिन ऐसा करते हैं, तो आप संचित कर्म के नेस के बजाय उस समय की लालसा के साथ संरेखित हो जाएंगे जो आप मानते हैं कि आप हैं।


