Asked 7 years ago

योग से मानसिक विकारों को कैसे दूर करें ?

Health & Beauty#योग#yoga for mental health#yoga for mental health in hindi#yoga for health
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दोस्तों इस पोस्ट में हम योग से मानसिक विकारों को कैसे दूर करें के बारे में जानेंगे। यदि शरीर मजबूत है तो मस्तिष्क भी मजबूत होगा यह जरूरी नहीं है। मजबूत शरीर वाले लोगों का भी मस्तिष्क मजबूत नहीं होता है। जो व्यायाम आप जिम जाकर करते हैं उसे केवल शरीर ही मजबूत बनता है ना कि मस्तिष्क मजबूत होता है। योग करने से मन और मस्तिष्क मजबूत होते हैं और लोग इससे मानसिक रूप से भी मजबूत होते है। योग करने से शरीर लचीला बनता है। योग करने से मन तरोताजा रहता है। योग करने से कोई मानसिक तनाव नहीं होता है बल्कि योग शरीर के लिए और मस्तिष्क के लिए बहुत अच्छा होता है। योगासन के द्वारा मानसिक विकारों को दूर किया जा सकता है।

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Answered By Vandna dahiya

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Answered on11/24/22
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योग के मानसिक विकारों को कैसे दूर करें योग के अभ्यास से मानसिक रोगों को शांत किया जा सकता है वैज्ञानिक आधार यह कहता है कि सांसो के रिदम से शरीर के भीतरी अनुशासन है कि जिस प्रकार से क्रोध की अवस्था सांसे अलग प्रकार की होती है। मन खुश रहने लगेगा, मन का बोझ हटे गा और सकारात्मक वैचारिक क्षमता बढ़ जाएगी।Article image यह सभी लाभ के योग से अभ्यास से आप आ सकते हैं।

Poonam Patel

Answered By Poonam Patel

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Answered on11/24/22
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हम आपको आज बताएंगे कि आप योग के द्वारा अपनी मानसिक तनाव को कैसे कम कर सकते हैं। दोस्तों यह बात बिल्कुल सत्य है कि हम युग के द्वारा तनाव से मुक्ति पा सकते हैं ऐसे में आप रोजाना सुबह और शाम के समय योग करें ताकि आपका मन बिल्कुल शांत रहे क्योंकि वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है कि यदि आप रोजाना योग करते हैं तो आपको मानसिक से जुड़ी किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होगी भागवत गीता में भी बताया गया है कि मानसिक विकारों को दूर करने के लिए योगासन करना चाहिए।Article image

Krishna Patel

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योग के अभ्यास से मानसिक रोगों को शांत किया जा सकता है | वैज्ञानिक आधार यह कहता है कि साँसों के रिदम से शरीर के भीतरी अंगो में अनुशासन है, ठीक जिस प्रकार से क्रोध की अवस्था में साँसे अलग प्रकार से होती हैं |


भोजन करते हुए, निद्रा, हास्य सब अवस्थाओं में साँसे अलग-अलग प्रकार से चलती हैं | जब श्वास का संतुलन आने लगता है और साँसो पर मन टिकाकर शरीर के भीतरी अंगो में जब विश्राम आने लगता है, तो मानसिक अवस्था भी स्वस्थ होने लगती है |

श्रीमद्भागवत में भी कहा गया है सम दुःख सुःख स्वस्थः अर्थात जब सुख और दुःख की अवस्था को समान मानकर अभ्यास जीवनशैली में उतारा जाए तो वो मानसिक स्वास्थ की अवस्था होती है | इस प्रकार के अभ्यास से साँसो के रिदम पर मन को टिकाकर जब मानसिक अवस्था को शांत करने का प्रयास किया जाता है तो मानसिक स्वास्थ की पराकाष्ठा प्राप्त होती होती है |

मन खुश रहने लगेगा, मन का बोझ हटेगा और सकारात्मक वैचारिक क्षमता बढ़ जायगी | यह सभी लाभ योग के अभ्यास से आप पा सकते हैं |



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Answered By Anil Yogacharya

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I am always there for improvement in \" YOUR \" physical mental and spiritual Health with YOGA

Answered on10/17/18
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