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Updated on May 30, 2026news-current-topics

संविधान के अनुसार कौन बड़ा है प्रधानमंत्री या राज्यपाल और क्यों?

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Updated on May 30, 2026

भारत के संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री और राज्यपाल दोनों की भूमिका अलग-अलग है, इसलिए सीधे तौर पर यह कहना कि कौन “बड़ा” है, सही नहीं होगा। दोनों के अधिकार, कार्य और जिम्मेदारियाँ अलग-अलग स्तर पर तय की गई हैं।

भारत में शासन प्रणाली संघीय (Federal) है, जिसमें दो स्तर की सरकारें होती हैं—केंद्र सरकार और राज्य सरकार। केंद्र सरकार का प्रमुख प्रधानमंत्री होता है, जबकि राज्य सरकार का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होता है।

प्रधानमंत्री देश की केंद्र सरकार का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) के साथ मिलकर पूरे देश की नीतियाँ बनाते हैं, कानून लागू करवाते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर निर्णय लेते हैं। विदेश नीति, रक्षा, आर्थिक नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे बड़े विषयों की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के पास होती है। इसलिए प्रधानमंत्री का प्रभाव पूरे भारत पर होता है।

दूसरी ओर, राज्यपाल किसी राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जिसे राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। राज्यपाल का मुख्य कार्य राज्य में संविधान के अनुसार शासन व्यवस्था को बनाए रखना है। वे राज्य सरकार के कार्यों की निगरानी करते हैं और मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करते हैं। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल के पास विवेकाधीन (discretionary) अधिकार भी होते हैं।

अगर तुलना करें तो:

  • प्रधानमंत्री केंद्र सरकार का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है।
  • राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख (nominal head) होता है।

इसलिए शक्ति और प्रभाव के स्तर पर प्रधानमंत्री अधिक शक्तिशाली माना जाता है, क्योंकि वह पूरे देश की नीतियों और प्रशासन का नेतृत्व करता है। राज्यपाल की भूमिका अधिकतर संवैधानिक और औपचारिक होती है, और वह राज्य सरकार के कामकाज को संविधान के दायरे में बनाए रखने का कार्य करता है।

निष्कर्ष रूप में, संविधान के अनुसार दोनों की भूमिकाएँ अलग-अलग हैं, लेकिन प्रशासनिक और कार्यकारी शक्ति के आधार पर प्रधानमंत्री अधिक शक्तिशाली होता है, जबकि राज्यपाल राज्य स्तर पर संवैधानिक प्रमुख की भूमिका निभाता है।

यहां एक और रोमांचक चर्चा पढ़ें: भारत का संविधान किसने लिखा और इसमें कितनी धाराएँ हैं?
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Updated on May 27, 2026

सबसे पहले इस बात को समझना जरुरी है की देश के राज्यपाल और प्रधानमंत्री में क्या अंतर है उसके बाद ही हम यह समझ पायेंगें की दोनों में से किसका ओहदा बड़ा व ज्यादा जरुरी है |

राज्यपाल : किसी भी राज्यपाल की नियुक्ति राज्यों में होती है और यह केंद्र प्रशासित प्रदेशों में उपराज्यपाल की नियुक्ति होती है भारत में 9 केंद्र शासित राज्य हैं जिनमें से 3 केंद्र शासित राज्यों में उपराज्यपाल का पद है वह 3 केंद्र शासित राज्य निम्न है अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह ,दिल्ली और पुडुचेरी बाकी चार केंद्र शासित राज्यों में प्रशासक होते हैं,, वहां पर उप राज्यपाल का पद नहीं होता है वह 4 केंद्र शासित राज्य है। चंडीगढ़ , दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली, लक्ष्यदीप। राज्य की कार्यपालिका का प्रमुख राज्यपाल (गवर्नर) होता है, जो मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करता है। कुछ मामलों में राज्यपाल को विवेकाधिकार दिया गया है, ऐसे मामले में वह मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना भी कार्य करता है।
 
प्रधानमंत्री : यह भारतीय संघ के शासन का प्रमुख का पद है। भारतीय संविधान के अनुसार, प्रधानमन्त्री केंद्र सरकार के मंत्रिपरिषद् का प्रमुख और राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार माना जाता है। वह भारत सरकार के कार्यपालिका का प्रमुख होता है और सरकार के कार्यों के प्रति संसद को जवाबदेह होता है। भारत की संसदीय राजनैतिक प्रणाली के अनुसार राष्ट्रप्रमुख और शासनप्रमुख के पद को पूर्णतः विभक्त रखा गया है। सैद्धांतिक रूप में संविधान भारत के राष्ट्रपति को देश का राष्ट्रप्रमुख घोषित करता है और सैद्धांतिक रूप में, शासनतंत्र की सारी शक्तियों को राष्ट्रपति पर निहित करता है। तथा संविधान यह भी निर्दिष्ट करता है कि राष्ट्रपति इन अधिकारों का प्रयोग अपने अधीनस्थ अधिकारीयों की सलाह पर करेगा |
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The Curious Introvert
Answered on Jan 22, 2020
भारत गणराज्य के प्रधानमन्त्री (सामान्य वर्तनी:प्रधानमंत्री) का पद भारतीय संघ के शासन प्रमुख का पद है। भारतीय संविधान के अनुसार, प्रधानमन्त्री केंद्र सरकार के मंत्रिपरिषद् का प्रमुख और राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार होता है। वह भारत सरकार के कार्यपालिका का प्रमुख होता है और सरकार के कार्यों के प्रति संसद को जवाबदेह होता है। भारत की संसदीय राजनैतिक प्रणाली में राष्ट्रप्रमुख और शासनप्रमुख के पद को पूर्णतः विभक्त रखा गया है। सैद्धांतिक रूप में संविधान भारत के राष्ट्रपति को देश का राष्ट्रप्रमुख घोषित करता है और सैद्धांतिक रूप में, शासनतंत्र की सारी शक्तियों को राष्ट्रपति पर निहित करता है। तथा संविधान यह भी निर्दिष्ट करता है कि राष्ट्रपति इन अधिकारों का प्रयोग अपने अधीनस्थ अधकारियों की सलाह पर करेगा।[2] संविधान द्वारा राष्ट्रपति के सारे कार्यकारी अधिकारों को प्रयोग करने की शक्ति, लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित, प्रधानमन्त्री को दी गयी है।[3] संविधान अपने भाग ५ के विभिन्न अनुच्छेदों में प्रधानमन्त्री पद के संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों को निर्धारित करता है।
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