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Updated on Mar 11, 2026education

भारतीय संविधान में कुल कितनी धाराएं हैं?

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Answered on Mar 11, 2026

भारतीय संविधान की संरचना को समझना थोड़ा पेचीदा हो सकता है क्योंकि इसमें 'अनुच्छेद' (Articles) और 'धारा' (Sections) के बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है। अक्सर लोग सामान्य बोलचाल में इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से भारतीय संविधान में 'अनुच्छेद' होते हैं, धाराएं नहीं।

संविधान की वर्तमान स्थिति और विस्तार:

  • मूल संविधान (1950): जब 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ, तब इसमें कुल 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं।
  • वर्तमान स्थिति (2026): समय-समय पर होने वाले संशोधनों (Amendments) के कारण अब अनुच्छेदों की संख्या बढ़कर लगभग 470 से अधिक हो गई है। हालांकि, मूल अनुच्छेदों की संख्या अभी भी 395 ही मानी जाती है, क्योंकि नए अनुच्छेदों को (जैसे 21A, 51A) के रूप में जोड़ा गया है। वर्तमान में इसमें 25 भाग और 12 अनुसूचियां हैं।
  • अनुच्छेद बनाम धारा: 'धारा' शब्द का प्रयोग आमतौर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) या भारतीय दंड संहिता (IPC) जैसे कानूनों में किया जाता है, जबकि देश के सर्वोच्च कानून 'संविधान' के लिए 'अनुच्छेद' शब्द का प्रयोग होता है।

निष्कर्ष: यदि आपसे कोई पूछे कि संविधान में कितनी धाराएं हैं, तो सही उत्तर होगा कि संविधान में 395 मुख्य अनुच्छेद हैं, जो संशोधनों के बाद उप-खंडों सहित 470+ हो चुके हैं। यह दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है।

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ABOUT THE AUTHORRajesh Yadav

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Updated on Dec 24, 2025

भारतीय संविधान का निर्माणः

कैबिनेट मिशन योजना में भारतीय संविधान के निर्माण हेतु परोक्ष निर्वाचन के आधार पर एक संविधान सभा के निर्माण का प्रावधान था। इस योजना के अनुसार चुनाव हुए और संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन 9 दिसंबर, 1946 को डॉ. सच्चिदानंद की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सभा ने जो संविधान बनाया उसे 26 नवंबर, 1940 को अंतिम रूप से स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद यह संविधान 26 जनवरी, 1950 को भारत में लागू कर दिया गया।

वर्तमान मेः

वर्तमान में 448 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां जिसे 25 भागों में बांटा गया है (विभाजित) किया है। निर्माण के समय 395 अनुच्छेद 8 अनुसूचियां थी और 22 भागों में विभाजित था। भारत का संविधान पूरे संसार में सबसे विशाल अर्थात सबसे बड़ा संविधान कहलाता है।

42 वें संविधान संशोधन द्वारा इसमें ‘समाजवादी’ तथा ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘राष्ट्र की एकता’ शब्द बढ़ाए गए |

‘हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य बनाने के लिए, और इसके सब नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार अभिव्यक्ति, धर्म निवेश वास व पूजा की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता प्राप्त करने के लिए, और इसमें व्यक्ति की गरिमा का ध्यान रखने वाला और राष्ट्र की एकता बनाए रखने वाला बंधुत्व बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपने इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 को ई. संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

भारतीय संविधान की विशेषताएः

  • निर्मित, लिखित तथा सर्वाधिक व्यापक संविधान है।
  • लोकप्रभुत्व के सिद्धांत पर आधारित संविधान है।
  • यह लोकतांत्रिक, समाजवादी तथा धर्म-निरपेक्ष संविधान है।
  • संसदात्मक शासन व्यवस्था को अपनाया गया है।
  • लचीलापन तथा कठोरता का समन्वय है।
  • एकात्मक लक्षणों सहित सघात्मक शासन है।
  • संसद की सर्वोच्चता तथा न्यायिक सर्वोच्चता में समन्वय।
  • मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों का प्रावधान है।
  • राज्य के नीति निर्देशक तत्वों को संविधान में शामिल करके शासन से अपेक्षा की गई है कि वे कानून बनाते समय इसको प्रमुखता देंगे।
  • वयस्क मताधिकार का आरंभ किया गया है।
  • अल्पसंख्यक तथा पिछड़े वर्ग के कल्याण की विशेष व्यवस्था की गई है।
  • संपूर्ण देश के नागरिकों के लिए एकल नागरिकता की व्यवस्था की गई है। इसमें स्वतंत्र तथा शक्तिशाली न्यायपालिका की व्यवस्था को अपनाया गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा विश्वशांति के आदर्श को मान्यता दी गई।
  • सामाजिक समानता स्थापित करने के लिए अनेक अनुच्छेदों को संविधान में सम्मिलित किया गया है।

मौलिक अधिकारः

मौलिक अधिकार वे अधिकार है जिनका संविधान में उल्लेख कर उन्हें नागरिकों के लिए सुरक्षित बना दिया जाता है। संविधान ने भारतीय नागरिकों को निम्न मौलिक अधिकार प्रदान किए थे, किंतु 44 वें संविधान संशोधन से संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं रह गया है। अब संपत्ति का अधिकार केवल कानूनी अधिकार है।

  • समानता का अधिकार,
  • स्वतंत्रता का अधिकार,
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार,
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार,
  • संस्कृति तथा शिक्षा संबंधी अधिकार,
  • संवैधानिक उपचारों का अधिकार,

भारत का संविधान

देश के सार्वजनिक हित एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार मौलिक अधिकारों पर युक्तिसंगत प्रतिबंध लगा सकती है।

मौलिक कर्तव्यः

संविधान के 42 वें संशोधन द्वारा मौलिक अधिकारों के अध्याय में कुछ कर्तव्य को जोड़ा गया जिसमें मूल कर्तव्यों की व्यवस्था की गई है वह इस प्रकार है—

  • भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करें।
  • स्वाधीनता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को सहृदय से संजोए रखें और उनका पालन करें।
  • भारतीय राज्य की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें।
  • देश की रक्षा करना और आवश्यकता होने पर राष्ट्रीय सेवा के लिए तैयार रहना।
  • भारत के सभी लोगों में समानता तथा समान भाई-चारे की भावना का विकास करें।
  • भारत के संबंधित संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे,
  • प्राकृतिक वातावरण की जिसके अंतर्गत वन, जलाशय, नदी और अन्य जीव आते हैं, रक्षा करें।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद, अन्वेषण तथा सुधार की भावना का विकास करें। सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करें और हिंसा से दूर रहें व्यक्तिगत और सामूहिक कार्यों के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने का निरंतर प्रयास करें।
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Answered on Nov 18, 2023

भारतीय संविधान में कुल धाराए की संख्या वर्तमान समय में 448 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियां हैं, और 25 भागों में विभाजित है।हम धाराओं की बात करें तो धाराएं भारतीय दंड संहिता में होती है, जिसे आईपीसी की धाराएं कहा जाता है।केंद्र सरकार ने जब स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश को स्वीकार करते हुए 42 वें संविधान संशोधन 1976 को लागू किया तब संविधान के अनुच्छेद 51 में एक नया अनुच्छेद 51 जोड़ा गया l और 10 मूल कर्तव्य संविधान में स्थापित किए गए lभारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को बंद कर तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। भारतीय संविधान को बनने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा।संविधान लिखते समय इसमें मूलभूत रूप से 395 अनुच्छेद या धाराएं 22 भाग तथा 8 अनुसूचियां थी। मूल अनुच्छेद की संख्या आज भी इतनी ही है।Article image

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Answered on Nov 17, 2023

जब हमारे संविधान की रचना हुई थी तब इसमें 395 अनुच्छेद या धाराएं थी l मूल अनुच्छेद की संख्या संविधान में आज भी इतनी ही है l परंतु समय- समय पर होने वाले संशोधनों के कारण आज कुल अनुच्छेदों की संख्या 448 हो गई है l लेकिन यह मूल अनुच्छेद ही विस्तार रूप से स्थापित किए गए हैं l

उदाहरण के लिए केंद्र सरकार ने जब स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश को स्वीकार करते हुए 42 वें संविधान संशोधन 1976 को लागू किया तब संविधान के अनुच्छेद 51 में एक नया अनुच्छेद 51 जोड़ा गया l और 10 मूल कर्तव्य संविधान में स्थापित किए गए l

इसी प्रकार मूलत संविधान में 22 भाग व 8 अनुसूचियां थी आजसंख्या क्रमशः 25 व 12 है l 26 नवंबर को भारत का संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है l Article image

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ABOUT THE AUTHORkajal Yadav

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Answered on Nov 17, 2023

आपकी बेहतर जानकारी के लिए बता दे की भारतीय संविधान में कुल धाराए की संख्या वर्तमान समय में 448 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियां हैं, और 25 भागों में विभाजित है। भारतीय संविधान को शुरुआत में 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभक्त किया गया था। और इसके साथ ही शुरुआत में इसमें आठ अनुसूचियां भी थी। भारतीय दंड संहिता (IPC) में धाराओं की संख्या 511 है। इससे पहले भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। भारतीय संविधान 2 वर्ष 11 माह और 18 दिनों में बनकर तैयार हुआ था।

संविधान की परिभाषा:--

संविधान एक मौलिक कानून है जो किसी देश का संचालन करने,सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा तथा कार्य निर्धारण करने एवं नागरिकों के हितों का संरक्षण करने के लिए नियम दर्शाता है।

26 नवंबर भारत को संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया था,जबकि 26 जनवरी के दिन भारत में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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Updated on Jun 10, 2021

भारत का संविधान, जिसे भारत के नाम से भी जाना जाता है, राज्यों का एक संघ है। यह सरकार की संसदीय प्रणाली के साथ एक संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है। गणतंत्र भारत के संविधान के संदर्भ में शासित है जिसे 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा पेश किया गया था और यह 26 जनवरी, 1950 को पुरे भारत में लागू हुआ था। संविधान में सरकार के संसदीय स्वरूप का प्रावधान किया गया है, जो कुछ एकात्मक राज्यों की संरचना में संघीय है। विशेषताएं। संघ की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख भारत का प्रथम आदमी (राष्ट्रपति) होता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार, संघ की परिषद में राष्ट्रपति और दो सदन होते हैं जिन्हें राज्यों की परिषद (राज्य सभा) और लोक सभा (लोकसभा) के रूप में जाना जाता है। संविधान का अनुच्छेद 74 (1) प्रदान करता है कि राष्ट्रपति की सहायता और सलाह देने के लिए प्रधान मंत्री के साथ मंत्रिपरिषद होगी, जो सलाह के अनुसार अपने कार्यों का उपयोग करेगा। वास्तविक कार्यकारी शक्ति इस प्रकार प्रधान मंत्री के साथ मंत्रिपरिषद में निहित है, जिसके प्रमुख हैं।

भारत में दुनिया का सबसे लंबा संविधान 448 अनुच्छेद, 25 भागों और 12 अनुसूचियों के साथ है। भारत का संविधान नागरिकों और सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली और अपनाई जाने वाली संहिता, प्रक्रियाओं, अधिकारों, कर्तव्यों, नियमों और विनियमों का सीमांकन है। बी. आर. अम्बेडकर मुख्य वास्तुकार थे और "भारतीय संविधान के जनक" के रूप में जाने जाते थे। संविधान 26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था जिसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रारंभ के समय, इसमें 225 लेख 22 भागों और 8 अनुसूचियों में थे। अब तक संविधान में 104 संशोधन किए जा चुके हैं। भारतीय संविधान के हिस्सों, और अनुसूचियों के साथ-साथ कुछ लेखों की विस्तार से जाँच करें।

भारतीय संविधान के अंग

शुरू में, भारतीय संविधान के 22 भाग थे। बाद में, संशोधन के साथ और सारे भाग जोड़े गए जो IVA, IXA, IXB और XIVA है । भारतीय संविधान के कुछ हिस्सों पर एक नज़र डालें।

भाग 1

संघ और उसके क्षेत्र

अनुच्छेद

1. संघ का नाम और क्षेत्र।

2. नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना।

3. नए राज्य बनाने का अधिकार और राज्यों के , सीमाओं या नामों के बदलाव का अधिकार ।

4. 1 और 4 संशोधन के लिए प्रदान करने के लिए अनुच्छेद दो और तीन के तहत बनाए गए कानून

अनुसूचियां और पूरक, आकस्मिक और परिणामी मामले।

भाग द्वितीय

नागरिकता

5. संविधान के प्रारंभ में नागरिकता

6. कुछ ऐसे व्यक्तियों की नागरिकता के अधिकार जो भारत से पाकिस्तान चले गए हैं।

7. कुछ प्रवासियों की नागरिकता के अधिकार।

8. भारत के बाहर दूसरे देशो में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों के नागरिकता का अधिकार।

9. किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की स्वेच्छा से नागरिक होना।

10. नागरिकता के अधिकारों की निरंतरता।

11. संसद के द्वारा नागरिकता के अधिकार को बदलने का कानून ।

भाग 3

मौलिक अधिकार

12. परिभाषा।

13. मौलिक अधिकारों के असंगत या अपमानित करने वाले कानून।

समानता का अधिकार

14. कानून के समक्ष समानता।

15. धर्म, जाति, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को अपराध माना जायेगा ।

16. सार्वजनिक रोजगार के लिए समानता का अवसर ।

17. अस्पृश्यता का उन्मूलन।

18. उपाधियों का उन्मूलन।

स्वतंत्रता का अधिकार

19. बोलने की स्वतंत्रता, आदि के बारे में कुछ अधिकारों का संरक्षण।

20. अपराधों के लिए सजा के संबंध में अधिकार ।

21. जीवन की सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता।

भारतीय संविधान की धाराए

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ABOUT THE AUTHORshweta rajput

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Answered on Jun 10, 2021

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भारतीय संविधान में धाराओं को अनुच्छेद के रूप में जाना जाता है। भारतीय संविधान को शुरुवात में 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभक्त किया गया और इसके साथ ही शुरुवात में इसमें 8 अनुसूचियां भी थीं । लेकिन वर्तमान में भारतीय भारतीय संविधान में 470 अनुच्छेद है जोकि 25 भागो में विभक्त हैं इसके साथ ही 12 अनुसूचियों का प्रावधान हमारे संविधान में है ।

हम धाराओं की बात करें तो धाराएं भारतीय दंड संहिता में होती है, जिसे आईपीसी की धाराएं कहा जाता है, लेकिन भारतीय संविधान के आर्टिकल को अनुच्छेद कहा जाता है जिन अनुच्छेदों को अधिकांश लोग धाराओं के रूप में जानते हैं। भारतीय दंड संहिता( आईपीसी )में धाराओं की संख्या 511 है।
भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को बंद कर तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। भारतीय संविधान को बनने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा। भारतीय संविधान को बनाने में सबसे बड़ा योगदान डॉ भीमराव अंबेडकर का था जिन्हें बाद में संविधान सभा की प्रारूप समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया तो वही संविधान सभा का अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद को बनाया गया जो कि स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने।
भारतीय संविधान हमारी स्वतंत्रता की रक्षा करता है, इसमें अनेको नियम व कानून है जिससे सभी भारतीयों को आंतरिक व बाहरी सुरक्षा प्रदान हो सके। इसीलिए भारतीय संविधान में 8 मौलिक अधिकारों सहित 11 मौलिक कर्तव्यों का भी उल्लेख मिलता है जिससे यह स्पष्ट होता है कि हमें भारतीय संविधान स्वतंत्रता तो देता ही है साथ ही हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा भी करता है। संविधान ने हमें मौलिक अधिकार प्रदान किए हैं हमें किसी भी इस जगह पर अपनी बात रखने का अधिकार है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम अपने अधिकारों का गलत प्रयोग करें इसीलिए हमारे संविधान में 11 मौलिक कर्तव्यों का भी उल्लेख किया गया है जिसे हर भारतीय नागरिक के ऊपर लागू किया गया है।
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है, इसीलिए भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र भी कहा जाता है, इसके साथ ही भारत ही एक ऐसा देश है जिसका सबसे बड़ा लिखित संविधान भी है।

और पढ़े- भारतीय संविधान में 18-28 तक की धारा क्या है?

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ABOUT THE AUTHORNikhil Kumar

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Updated on Apr 4, 2021

भारतीय सविधान में कुल धाराएं की संख्या वर्तमान समय में, 448 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 25 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं, सविधान से सम्बंधित महत्वपूर्ण सवाल यहाँ से पढ़ा जा सकता है जो विशेषकर प्रश्न उत्तर पर आधारित है.

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ABOUT THE AUTHORDisha Sharma

This is Disha Sharma From India. I\'m basically from Bihar but currently residing at Shubash Nagar in Delhi (India). I\'m a Content Writer and I work as a content writer in Focusonlearn company which provides Educational information about courses and careers in only Hindi.

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