Abhishek kant
Abhishek kant· 17 दिन पहले
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आपके हिसाब से मुंशी प्रेमचंद की सबसे फेमस कहानी कौन सी है?

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ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया10/08/26

मुंशी प्रेमचंद्र का असली नाम धनपट राय श्रीवास्तव था | इनका जन्म 31 जुलाई 1880 मे लमही गाँव जो वाराणसी के उत्तरप्रदेश मे स्थित है , हुआ था | इनकी माता का नाम आनंदी देवी ओर पिता का नाम अजायबराय था | अजायबराय डाकघर मे मुंशी का कार्य करते थे | प्रेमचंद्र जी जब छोटे थे तभी उनके माता पिता का का देहांत हो गया था पहले 7 वर्ष मे माता का तथा 16 वर्ष कि आयु मे पिता का | प्रेमचंद्र का बचपन बड़ी कठिनाइयों के साथ बीता |

मुंशी प्रेमचंद्र को हिन्दी ओर उर्दू भाषा का अच्छा ज्ञान था | उन्होंने सबसे पहले उर्दू ओर फारसी भाषा का चयन कर अपनी शिक्षा कि शुरुआत कि | धीरे धीरे वह आगे बढ़े ओर बी . ए कि डिग्री हासिल कि | पढ़ाई के साथ साथ उन्होंने नौकरी भी कि जिससे उनका खर्चा भी चल सके | वह एक शिक्षक के रूप मे कार्यरत रहे | इसके बाद उन्होंने स्कूल इंस्पेक्टर कि नौकरी करी |

प्रेमचंद जी का पहला विवाह 15 वर्ष कि आयु मे उनके पिता ने कर दिया था परंतु उम्र मे बड़ी ओर स्वभाव मे कटु होने के कारण उनके परिवार के साथ उसका तालमेल ना बना जिसकी वजह से वह घर छोड़कर अपने मायके चली गई ओर वापस प्रेमचंद्र के पास नहीं लौटी |

शिवरानी नाम कि लड़की से प्रेमचंद्र जी ने दूसरा विवाह किया | शिवरानी बाल विधवा लड़की थी | उस समय विधवा से विवाह करना समाज से विद्रोह समान था | मुंशी प्रेमचंद्र जी ने उनके पिता को पत्र भेज कर शादी का प्रस्ताव भेजा ओर विवाह किया | उन्होंने समाज को एक नयी दिशा प्रदान कि |

प्रेमचंद्र ने 13 वर्ष कि उम्र मे अपना पहला नाटक लिखा था | उन्होंने शुरुवात मे नाबाबराय नाम से लिखना शुरू किया | फिर उनके दोस्त के कहने पर उन्होंने अपना नाम प्रेमचंद किया | 1914 से 1915 के बीच से उन्होंने हिन्दी भाषा का प्रयोग करना शुरू किया इसके पहले के उनके सारे लेख उर्दू भाषा मे ही थे |

उन्होंने अपनी पूरे जीवनकाल मे 350 से भी ज्यादा कहानियाँ ओर रचनाएँ लिखी | जिसमे सबसे ज्यादा प्रसिद्ध कफ़न , पुस कि रात , ईदगाह , दो बैलों कि कथा , नमक का दरोगा है |

इसमे मेरे हिसाब से सबसे प्रसिद्ध ईदगाह लगती है | इसमे दादी अमीना ओर उसके पोते हामिद कि कहानी का व्याख्यान किया गया है | हामिद का अपनी दादी अमीना कि चिंता ,उनकी परवाह कि कहानी है |

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ऊपर दिए गए सवाल का जवाब
जवाब दिया गया10/12/26

अगर मुझसे पूछा जाए कि प्रेमचंद की सबसे फेमस कहानी कौन सी है, तो मेरा जवाब होगा "ईदगाह"। हालाँकि यह सवाल जितना आसान दिखता है, उतना है नहीं। प्रेमचंद ने तीन सौ के आसपास कहानियाँ लिखी हैं, और "कफ़न", "पूस की रात", "बड़े घर की बेटी", "नमक का दारोगा" और "पंच परमेश्वर" जैसी कहानियाँ भी उतनी ही चर्चित हैं। "सबसे" कहना हमेशा थोड़ा जोखिम भरा होता है, इसलिए मैं अपने तर्क के साथ बताता हूँ कि मैं "ईदगाह" को क्यों चुनता हूँ।

Munshi Premchand

ईदगाह की कहानी

यह कहानी हामिद नाम के चार-पाँच साल के एक बच्चे की है, जो अपनी दादी अमीना के साथ रहता है। माँ-बाप दुनिया में नहीं हैं। ईद के दिन गाँव के बच्चे मेले में जाते हैं। कोई मिठाई खरीदता है, कोई खिलौने, कोई झूले का मज़ा लेता है। हामिद के पास सिर्फ़ तीन पैसे हैं।

वह न मिठाई खाता है, न खिलौने लेता है। वह एक चिमटा खरीदता है। वजह यह कि रोटियाँ सेंकते समय दादी का हाथ तवे से जल जाता है। दोस्त उसका मज़ाक उड़ाते हैं, पर हामिद अपने तर्कों से चिमटे को सबसे बेहतर साबित कर देता है। घर पहुँचकर जब दादी चिमटा देखती हैं, तो पहले डाँटती हैं, फिर उनकी आँखों से आँसू बह निकलते हैं और वे हामिद को दुआएँ देती हैं।

मैं इसे ही क्यों चुनता हूँ?

पहली वजह, पहुँच। यह कहानी स्कूल की किताबों में पढ़ाई जाती रही है, इसलिए करोड़ों लोगों ने इसे बचपन में पढ़ा है। इतनी बड़ी पाठक संख्या किसी दूसरी कहानी की शायद ही हो।

दूसरी वजह, भावना। हामिद का त्याग बनावटी नहीं लगता। प्रेमचंद ने कहीं भाषण नहीं दिया कि "त्याग अच्छी चीज़ है।" उन्होंने बस एक बच्चे को दिखाया, और बाकी काम पाठक के दिल ने कर दिया।

तीसरी वजह, सार्वभौमिकता। कहानी में ईद है, पर संदेश किसी एक धर्म तक सीमित नहीं। प्यार, ज़िम्मेदारी और समझदारी की बात हर घर की है।

एक ईमानदार दूसरा पक्ष

अब एक बात साफ़ कहनी ज़रूरी है। अगर "सबसे महान" की बात हो, तो कई आलोचक "कफ़न" को प्रेमचंद की सबसे गहरी और साहित्यिक रूप से सबसे मज़बूत कहानी मानते हैं। उसमें घीसू और माधव की ऐसी बेरहम तस्वीर है, जो गरीबी और व्यवस्था पर सीधा सवाल उठाती है। वह पढ़कर मन भारी हो जाता है, और शायद इसी वजह से वह स्कूलों में उतनी लोकप्रिय नहीं। यानी लोकप्रियता में "ईदगाह" आगे है, और साहित्यिक गहराई में बहस "कफ़न" की तरफ़ झुकती है। और अगर उपन्यास की बात करें, तो "गोदान" प्रेमचंद की पहचान है, पर आपने कहानी पूछी है, इसलिए वह अलग विषय है।

मेरे हिसाब से "ईदगाह" इसलिए जीतती है कि वह सबसे ज़्यादा लोगों के दिल तक पहुँची है। प्रेमचंद की ताक़त यही थी कि वे आम आदमी की भाषा में उसकी ही ज़िंदगी लिखते थे। हामिद का चिमटा आज भी उतना ही असरदार है जितना सौ साल पहले था।

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