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Vikas joshi· 8 years ago
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दहेज़ लेन-देन के जिम्मेदार कौन है,लड़की वाली या लड़के वाले ?

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Updated on06/05/26

दहेज़ प्रथा एक सामाजिक समस्या मानी जाती है और इसके लिए केवल एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं माना जाता। कई मामलों में लड़के वाले दहेज़ की मांग करते हैं, जबकि कुछ परिवार सामाजिक दबाव, प्रतिष्ठा या परंपरा के कारण स्वयं भी दहेज़ देने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसी वजह से यह समस्या समाज में लंबे समय तक बनी रहती है।

भारत में दहेज़ लेना और देना दोनों कानूनन अपराध हैं। दहेज़ प्रथा कई परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव डालती है तथा कई गंभीर सामाजिक समस्याओं को जन्म देती है। वास्तव में, इस समस्या को खत्म करने के लिए पूरे समाज की सोच और व्यवहार में बदलाव जरूरी माना जाता है।

और पढ़ें : भारत में दहेज प्रथा का इतिहास क्या है? दहेज के बारे में छिपे हुए तथ्य क्या हैं जो आपको पता होना चाहिए?

P
Reporting what matters — with 12 years of ground-level journalism behind every story.
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Pari Deshmukh is a journalist with over 12 years of experience covering current affairs across print and digital media in India. She holds a Master's degree in Journalism and Mass Communication from Pune University, bringing both academic grounding and extensive field experience to her reporting. Over her career, Pari has reported on national politics, policy developments, social issues, and breaking news events across India. Her work has appeared on platforms including The Print, Scroll.in, and Hindustan Times Digital, where she has built a reputation for factual, balanced, and timely reporting on stories that shape public discourse. With 12+ years in the field, she has covered major national events, conducted ground-level investigations, and interviewed policymakers, civil society leaders, and public figures. Her journalism is driven by one standard — verified facts reported without distortion, regardless of the pressure or pace of the news cycle. She has participated in press panels at the Ramnath Goenka Excellence in Journalism Awards and is a member of the Press Club of India. Her reporting continues to serve readers who need current affairs coverage they can trust.

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Answered on06/07/22

हमारे भारत देश में आज भी दहेज की परंपरा चली आ रही है। यह परंपरा कई युगों से चली आ रही है। जब बेटी जन्म लेती है तो तभी माता-पिता को लगने लगता है कि वे एक बोझ बनकर आई है। क्योंकि जब उसकी शादी होगी तो लड़कों वालों के लिए ढेर सारा पैसे देना होगा नहीं तो उनकी बेटी की शादी नहीं होगी। इस तरह हमारे भारत देश में दहेज लेना और दहेज देना दोनों ही कानूनन जुर्म है जो व्यक्ति दहेज लेता है या फिर दहेज देता है उसके तहत धारा 498ए जो कि पति और उसके रिश्तेदार द्वारा संपत्ति और महंगे गहने मांगने पर शिकायत कर सकते हैं।Article image

Krishna Patel
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Answered on06/07/22

मेरे ख्याल से तो दहेज़ लेने और दहेज़ देने वाले दोनों क़ानून जुर्म है। लेकिन दहेज देने के लिए हर माता-पिता मजबूर होते है, क्योंकि आज के समय मे पढ़े -लिखें होते हुये भी लोग शादी मे लड़की वालो से दहेज़ की मांग करते है, लड़की वालो को दहेज़ के लिए डराते धमकाते है कि यदि अपने शादी मे दहेज़ नहीं दिया तो हम बीच मे ही शादी तोड़ देंगे आपकी लड़की शादी नहीं करेंगे ऐसी धमाकियो से डर कर उनकी दहेज़ की मांग मजबूरन पूरा करना पड़ता है।Article image

S
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Mp

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Answered on08/09/23

दहेज लेने -देने के लिए लडके वाले और लड़कियां वाले दोनों जिम्मेदार है,ज़ब शादी के लिए लडके वाले लड़की के घर जाते है और लड़की वालो से दहेज की मांग करते है तो लडके वालो की मांग क़ो पूरा कर देते है जिसके कारण लडके वालो क़ो और ज्यादा बढ़वा मिल जाता है।और आगे चलकर शादी के बाद लड़की के ऊपर प्रेशर बनाते है और उसके पिता से दहेज़ की मांग करने लगते है और ज़ब लड़की के पिता लडके की मांग पूरी नहीं करते है तो लड़की क़ो मारते पीटते है।Article image

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Answered on10/09/21

एलोवेरा का उपयोग कई बीमारियों को ठीक करने मे किया जाता है जैसे :-बबासीर के रोग पर करते है एलोवेरा के अंदर के गुदे को निकल कर रुई मे लगाकर अपने प्राइवेट पार्ट्स यानि जहा बबासीर हो वहां पर रोज़ाना लगाने से काफ़ी हद तक बबासीर के मरीजों को आराम मिलता है। इसके अलावा जिन व्यक्तियो को पीलिया हो जाती है उन व्यक्तियो को भी एलोवेरा का गुदा निकालकर पीसकर आँखों के नीचे लगाया जाता है और नाक मे डालने से पीलिया काफ़ी हद तक ठीक होने की संभवना होती है। जिन व्यक्तियो को शुगर बीमारी हो जाती है तो डॉक्टर भी एलोवेरा का सेवन करने का सलाह देता है रोजाना शुभ एलोवेरा को काट कर गुदा को खाते है तो यह शुगर को कण्ट्रोल करने मे मदद करता है।

Letsdiskuss

इसके अलावा एलोवेरा का उपयोग चेहरे मे फोड़िया हो जाने पर आप नीबू एलोवेरा का का पेस्ट बना कर एक डिब्बी मे रख लीजिये और सोते समय रोज फेस मे लगा कर सुबह साफ पानी से धो ले 1 महीने तक लगातार उपयोग करने से आपके फेस से सारी फोड़िया ठीक हो जाएगी।

और पढ़े- रात मे एलोवेरा जेल कैसे लगाए?

S
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Mp

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Updated on05/28/26

दहेज़ लेना व देना दोनों ही कानूनन जुर्म है, परन्तु आज भी कई ऐसे परिवार हैं व लोग हैं जो परम्परा के नाम पर दहेज़ लेते हैं व देते हैं | भारत में बच्ची के जन्म से ही माता पिता को यह चिंता सताने लगती है की अब उसकी शादी के लिए धन जमा करना है | यह मानसिकता हर परिवार की नहीं हो सकती परन्तु देश की आधी से ज्यादा जनसख्या इसी मानसिकता से विकृत है | विकृत इसलिए है क्योंकि जहां एक तरफ बेटा इन उम्मीदों से बड़ा किया जाता है की वह बड़ा होकर परिवार का सहारा बनेगा वहीं बेटी को यह समझा बुझा कर बड़ा किया जाता है की उसे दूसरे घर जाना है |

दहेज़ के लेन देन में गलती तो दोनों ही पक्षों की होती है जो दहेज़ ले रहा हो उसकी भी और जो दे रहा हो उसकी भी परन्तु समझने की बात यह है की अत्यधिक गलती किसकी है और क्यों है | मेरी नज़र में अत्यधिक गलती लड़की के माता पिता की है | मांगने वाले की सोच बदलने के लिए देने वाले को अपनी सोच बदलना ज्यादा ज़रूरी है | यदि माता पिता अपनी बेटी को जन्म से ही यह सोचकर बड़ा करे की उन्हें उसे उसके खुद के पैरों पर खड़ा करना है , दहेज़ की जगह उसकी शिक्षा और सपनो को पूरा करने के लिए पैसे जमा करें और किसी ओर के घर को संवारने के सपने दिखने के पूर्व उसकी खुद की ज़िन्दगी संवारने का ज्ञान उसे दे तो बेटी क्या नहीं कर सकती | अगर वह अपने खुद के पैरों पर खड़ी होगी तो उसको अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए किसी और के सहारे की जरूरत नहीं होगी और न ही लड़के वालो को यह सोचकर दहेज देना पड़ेगा की वह आपकी बेटी की जरूरतें व ख्वाहिशे तभी पूरी कर पाएंगे जब आप उन्हें पैसे देंगे | भारत में दहेज़ देने के बाद भी हर दिन एक लड़की मौत के मुँह में जाती है |तो यह सोचना की बेटी दहेज़ देकर खुश रहेगी , पूर्णतया गलत है
 
दहेज़ लेना व माँगना एक मानसिक विकृति है ओर यदि आपसे कोई यह कहे की उन्होंने अपने बेटे पर इतना पैसा लगाया तो आपका फ़र्ज़ बनता है दहेज़ देने का , या वह आपकी बेटी को अपने घर रखेंगे उसका दहेज़ , तो सबसे सही यही होगा की आप उन्हें दरवाजे का रास्ता दिखा दें |

 

S
Media Trends Researcher
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