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Vandna dahiya· 3 years ago
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रोटी किस गैस के करण फूलती हैं?

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Answered on11/16/23

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताएंगे की रोटी किस गैस के कारण फूलती है। तो आपने देखा होगा कि जब भी आप अपने घर में रोटी बनाते हैं तो वह फूल जाती है वह इसलिए होता है क्योंकि इसमें कार्बन डाइऑक्साइड गैस होती है जिसके कारण रोटी फूलती है। जब आप आटे को गूथते

हैं तो उसमें प्रोटीन की एक परत बन जाती है और उस परत को ग्लूटेन कहा जाता है ग्लूटेन कार्बन डाइऑक्साइड गैस को निकालने से रोकती है जिसके कारण कार्बन डाइऑक्साइड गैस नहीं निकल पाती और रोटी फूलती है गेहूं के आटे में ग्लूटेन अधिक पाया जाता है इसलिए गेहूं के आटे की रोटी फूल जाती है। और वह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगती है। और हमारे भारत देश के हर घर में रोटी बड़े चाव से खाई जाती है। और रोटी खाने से काफी देर तक भूख नहीं लगती है।Article image

A
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Answered on11/16/23

हर भारतीय घरों में आपको रोटी खाने के लिए मिल जाएगी। केवल भारतीय घरों में ही क्यों अब तो हर जगह रोटी बनने लगी है। क्योंकि रोटी और सब्जी खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगती है। यदि आपके घर में रोटी बनती होगी तो आपने देखा होगा कि जब हम रोटी को तवे से उतार कर गैस में सेकते हैं तो रोटी फूल जाती है। और लोगों को लगता है कि यह किसी जादू की वजह से फूल रही है लेकिन मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं की रोटी का फूलना कोई जादू नहीं है। इसके पीछे का एक वैज्ञानिक कारण है। आटा में कार्बन डाइऑक्साइड गैस पाई जाती है इसी वजह से रोटी फूलने लगती है। जो की देखने में बहुत ही ज्यादा अच्छी लगती है। जानकारी अच्छी लगी हो तो आंसर को लाइक अवश्य करें।

Letsdiskuss

A
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Answered on11/16/23

दोस्तों आप ने बचपन से लेकर आज तक आपने हमेशा देखा होगा कि घर में पकाई जाने वाली रोटियों को तवा पर सेंकने के बाद जैसे ही चूल्हे पर रखते हैं तो वह फट से फूल जाती है. क्या आपने कभी सोचा नहीं कि आखिर यह कैसे हो जाता है. बेलन से गोल रोटी बनाने के बाद अचानक तवा पर फूल कैसे जाती है,चलिए हम इस बारे में जानने की कोशिश करते हैं, रोटियां के फूलने का मुख्य कारण है कार्बन डाइऑक्साइड, क्योंकि यह गैस के साथ रोटी में भर जाती है कार्बन डाइऑक्साइड जिसकी वजह से हमारी रोटी फूलती है,और इसे हम ऐसे भी पढ़ सकते हैं जैसे की ग्लूटेन अपने अंदर की तरफ कार्बन डाईऑक्साइड गैस कों सोख लेती है। और ज़ब हम रोटी बेलकर तवे मे सेकते है तो रोटी कार्बन डाईऑक्साइड गैस के कारण फूलती है। यदि आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया है तो इसे लाइक कीजिए ताकि हम आपको और भी आर्टिकल लाते रहे।Article image

S
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Answered on11/16/23

आइए दोस्तों आज हम आपको बताते हैं कि रोटी किस गैस की वजह से फूलती है।आपने देखा होगा कि जब भी आप अपने घर में रोटी बनाते हैं।क्योंकि इसमें कार्बन डाइऑक्साइड गैस होती है जिसके कारण रोटी फूलती है। जब हम आटे को पानी के साथ गूथते हैं तो उसमें प्रोटीन एक परत बन जाती है और उस परत को ग्लूटेन कहा जाता है। गेहूं में शामिल प्रोटीन से एक लचीली परत बन जाती है। इसे लासा या ग्लूटेन कहते हैं और इसकी खासियत यह होती है।हमारे भारत देश के हर घर में रोटी बड़े चाव से खाई जाती है। और रोटी खाने से काफी देर तक भूख नहीं लगती है।जिसके कारण कार्बन डाइऑक्साइड गैस नहीं निकल पाती और रोटी फूल जाती है गेहूं के आटे में ग्लूटेन की मात्रा अधिक पाई जाती है। इसी कारण गेहूं के आटे की रोटी जल्दी फूल जाती है।Article image

Kanchan  Patel
Multi-Niche Content Researcher
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Answered on10/20/23

राष्ट्रगान को गाने में लगने वाला समय, इसे गाए जाने की गति, राष्ट्रगान के संस्करण और छंदों को जोड़ने या हटाने जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। किसी देश के राष्ट्रगान की आमतौर पर एक मानक अवधि होती है, और इसे उचित समय सीमा के भीतर गाना परंपरा और सम्मान का विषय है। राष्ट्रगान गाने के लिए यहां कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं:

1.सम्मानजनक अवधि: राष्ट्रगान गाना एक प्रतीकात्मक और गंभीर कार्य है, और इसे सम्मान और गरिमा के साथ किया जाना चाहिए। अधिकांश राष्ट्रगान कुछ ही मिनटों में गाए जा सकते हैं।

2.मानक छंद: कई राष्ट्रगानों का एक मानक संस्करण होता है जिसमें विशिष्ट संख्या में छंद और एक कोरस शामिल होता है। इन छंदों और कोरस को गाने में आम तौर पर कुछ मिनट लगते हैं।

3.आधिकारिक दिशानिर्देश: कुछ देशों में, राष्ट्रगान के उचित गायन के संबंध में आधिकारिक दिशानिर्देश हैं। ये दिशानिर्देश गाए जाने वाले छंदों की संख्या और इसे जिस गति से निष्पादित किया जाना चाहिए उसे निर्दिष्ट कर सकते हैं।

4. प्रथागत गति: स्पष्ट उच्चारण और अभिव्यक्ति की अनुमति देने के लिए राष्ट्रगान आमतौर पर मध्यम गति से गाए जाते हैं। बहुत जल्दी गाने से राष्ट्रगान की गंभीरता से समझौता हो सकता है।

5.विशेष अवसर: राष्ट्रीय छुट्टियों या आधिकारिक कार्यक्रमों जैसे विशेष अवसरों पर, अक्सर राष्ट्रगान का पूरा संस्करण गाया जाता है, जिससे इसकी अवधि बढ़ सकती है। हालाँकि, इसे आमतौर पर एक उचित समय सीमा के भीतर गाया जाता है।

हालाँकि राष्ट्रगान गाने के लिए कोई निश्चित अधिकतम समय नहीं है, लेकिन इस कार्य को श्रद्धा के साथ करना और राष्ट्रगान के गायन के संबंध में सांस्कृतिक और आधिकारिक रीति-रिवाजों का पालन करना महत्वपूर्ण है। अवधि के बजाय देशभक्ति और प्रतीकात्मक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

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Answered on11/20/23

आज हम आपको बताएंगे। कि रोटी किस गैस के कारण फूलती है। दरअसल रोटी का फूल जाना कार्बन डाइऑक्साइड गैस के कारण रोटी फूल जाती है। क्‍या आपने कभी सोचा है कि वो कौन सी वजह है जो रोटी फूलने के बाद दो परतों में बंट जाती है जबकि बेलते वक्‍त रोटी एक ही परत में बनाई जाती है। अब यह कोई जादू तो है नहीं, तो चलिए आपको बताते हैं कि इस प्रक्रिया के पीछे की क्‍या है असल वजह। असल में बात तो यह है रोटी फूलने का में कारण यह है कि जब हम गेहूं के आटे को गूंथते हैं। तो गेहूं में शामिल प्रोटीन के कारण उसमें एक लचीली परत बन जाती है। इसे लासा कहते हैं। इसकी खासियत यह होती है कि वह अपने अंदर कार्बन डाइऑक्साइड गैस सोख लेती है और इसी कारण रोटी फूल जाती है।Letsdiskuss

S
Knowledge Obsessed Mind
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Answered on12/18/22

जब भी हम रोटी बनाते हैं तो देखते हैं कि रोटी को तवे से उतारने के बाद गैस में रखने से रोटी तुरंत फूल जाती है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है इसके पीछे का क्या कारण है दरअसल रोटी फूलने की मुख्य वजह कार्बन डाइऑक्साइड गैस है। असल में होता है यह है कि जब हम आटे में पानी मिलाकर गुथते है तब गेहूं में शामिल प्रोटीन से एक लचीली परत बन जाती है। इसे लासा या ग्लूटेन कहते हैं और इसकी खासियत यह होती है कि वह अपने अंदर कार्बन डाइऑक्साइड सोख लेती है।Article image

Poonam Patel
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Answered on12/19/22

कार्बन डाईऑक्‍साइड गैस एक ऐसी गैस होती है जिसके कारण हमारे द्वारा बनाई गई रोटी फूलती है। क्योकि जब हम रोटी बनाने के लिए गेहूं का आटे में पानी मिलाकर उसे गूंथते हैं, तब गेहूं के गूथे हुए आटे में प्रोटीन की एक लचीली या शॉट परत बनती है जिसे लासा या ग्‍लूटेन कहते हैं और जिसकी वजह से यह अपने अंदर कार्बन डाईऑक्‍साइड सोख लेती है और रोटी फूलने लगती है। वैसे तो चूल्हे का खाना सबसे स्वादिष्ट खाना होता है क्योंकि उसमें किसी भी प्रकार की गैस नहीं होती है।Article image

preeti  patel
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Answered on10/15/22

दोस्तों आपने अपने घर में रोटी बनते देखा ही होगा जब रोटी बनती है तो वह रोटी फूल क्यों जाती है। पर क्या आप जानते हैं कि रोटी क्यों फूलती है उसमें कौन सी गैस होती है यदि आप नहीं जानते तो हम आपको बताएंगे। रोटी में कार्बन डाइऑक्साइड गैस होती है। जिसके कारण रोटी फूलती है। जब हम आटे को पानी के साथ गूथते हैं तो उसमें प्रोटीन एक परत बन जाती है और उस परत को ग्लूटेन कहा जाता है। ग्लूटेन रोटी से कार्बन डाइऑक्साइड गैस कोArticle image निकलने से रोकती है। जिसके कारण कार्बन डाइऑक्साइड गैस नहीं निकल पाती और रोटी फूल जाती है गेहूं के आटे में ग्लूटेन की मात्रा अधिक पाई जाती है। इसी कारण गेहूं के आटे की रोटी जल्दी फूल जाती है।

V
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Updated on05/29/26

मानव जीवन में शिक्षा का उतना ही महत्व है, जितना वर्तमान समय में जीवन को जीने का | मानव जीवन में इंसान का शिक्षित होना जरुरी है, मगर ये बात जब तक सभी लोग नहीं मान लेते तब तक ऐसे कैसे कहा जा सकता है कि मानव जीवन में शिक्षा का क्या महत्व है ?

आज भी कई जगह ऐसी है जहाँ बच्चों को नहीं पढ़ाया जाता | कई जगह तो बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल हैं ही नहीं और अगर कहीं हैं, भी तो वहाँ सही शिक्षक नहीं किसी भी प्रकार का मैनेजमेंट नहीं | उस पर कहीं तो ये हाल कि लोग सिर्फ लड़कों को पढ़ाते हैं, लड़कियों को नहीं | अगर ऐसा ही चलेगा तो आप ही बताइये कि मानव जीवन में शिक्षा का क्या महत्व रह जाएगा |
 
Letsdiskuss
 
शिक्षा का महत्व होना सिर्फ पढ़ना या कुछ सीखना नहीं होता बल्कि शिक्षा के विचार को उसकी अच्छाई को अपने जीवन में लाना भी होता है | मुझे तो नहीं लगता कि आज के समय में शिक्षा का कोई महत्व रह गया है | इसके भी कुछ कारण हैं, जिसके आधार पर शिक्षा आज के समय में न तो व्यवस्थित है और न ही किसी काम की |
 
मुझे लगता है, कि वर्तमान समय में शिक्षा का कोई महत्व नहीं रह गया है, क्योकि जहाँ लड़का-लड़की में भेद हो आज भी वहाँ और शिक्षित समाज होने का कोई फायदा नहीं है |
M
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Answered on10/16/22

जब भी हम रोटी बनाते हैं तो देखते हैं कि रोटी को तबे से उतारने के बाद गैस में रखने से रोटी तुरंत फूल जाती है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है इसके पीछे का कारण क्या हो सकता है। आइये जानते हैं। दरअसल रोटी फूलने की मुख्य वजह है कार्बन डाइऑक्साइड गैस जब हम आटा को गुंथने के लिए पानी का इस्तेमाल करते हैं तो तब गेहूं में शामिल करते हैं तब गेहूं में प्रोटीन की एक लचीली परत बन जाती है जिसे ग्लूटेन कहते हैं। और इसकी खासियत यह होती है कि यह अपने अंदर CO2 सोख लेता है। इस वजह से रोटियां फूलने लगती है।Letsdiskuss

और पढ़े- एक दिन कितनी रोटी खानी चाहिए?

Krishna Patel
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Answered on10/14/22

हम ज़ब भी आटा गूथ कर थोड़ी देर के लिए रख देते है तो उसमे ऊपर से प्रोटीन की एक परत जम जाती है, जिसको हम लासा या ग्लूटेन भी कहते है। ग्लूटेन अपने अंदर की तरफ कार्बन डाईऑक्साइड गैस कों सोख लेती है। और ज़ब हम रोटी बेलकर तवे मे सेकते है तो रोटी कार्बन डाईऑक्साइड गैस के कारण फूलती है। क्योंकि रोटी के अंदर ग्लूटेन जो कार्बन डाईऑक्साइड गैस सोख लेती है वही गैस रोटी के फूलने के कारण बाहर निकलकर फ़ैल जाती है।Article image

S
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Mp

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Answered on03/19/26

जब हम रोटी बनाते हैं, तो वह सिकते समय फूल जाती है। इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण होता है।

रोटी कार्बन डाइऑक्साइड गैस के कारण फूलती है।आटे को गूंथते समय उसमें थोड़ी हवा फंस जाती है और गर्मी मिलने पर यह गैस फैलने लगती है। साथ ही, आटे में मौजूद नमी गर्म होकर भाप (steam) में बदल जाती है, जो रोटी को अंदर से फुलाने में मदद करती है।

जब रोटी दोनों तरफ से सिकती है, तो बीच में भाप और गैस जमा होकर उसे गुब्बारे की तरह फुला देती है। यही कारण है कि अच्छी तरह से गूंथी और सही तरीके से सेंकी गई रोटी ज्यादा अच्छी तरह फूलती है।रोटी के फूलने की प्रक्रिया गर्मी, भाप और गैस के फैलाव का परिणाम होती है।

Tara Verma
Ten years in the classroom, shaping minds — bringing the same clarity and purpose to every piece she writes about education.
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Tara Verma is a practising teacher and education content writer with over 10 years of classroom experience across primary and secondary levels. She holds a Master's degree in Education (M.Ed.) from Delhi University and a Bachelor of Education (B.Ed.) from Jamia Millia Islamia — qualifications that ground her writing in both pedagogical theory and the day-to-day realities of teaching in India. Her content covers exam preparation strategies, learning methodologies, curriculum guidance, student mental health, career counselling for students, and the evolving state of school and higher education in India. Her work has appeared on platforms including TeacherVision India, Jagran Josh, and Careers360, where she writes for students, parents, and fellow educators who need content built on actual teaching experience — not theory alone. Over a decade of working directly with students across age groups and learning levels has given Tara a practical understanding of how education content should be written — clearly, accessibly, and with genuine awareness of the challenges students and teachers face on the ground. She has taught 1,000+ students, contributed to school curriculum development initiatives, and published 250+ articles on education across digital platforms. She is an active member of the National Council of Teachers of English (NCTE) India. Across all her writing, every recommendation is classroom-tested, every insight comes from direct teaching experience, and every article is held to the same standard she applies in her own classroom — accuracy, clarity, and genuine usefulness for the reader.

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