Updated on May 4, 2024astrology

छठ माता की पूजा विधि समझाइये ?

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Updated on Nov 2, 2019

छठ पूजा का बहुत बड़ा और अपना ही एक महत्व है । यह मुख्यता बिहारियों का त्यौहार होता है और जो बहुत ही महत्वपूर्ण होता है । दीवाली के बाद यह त्यौहार आता है । इस दिन घर में साफ़ सफाई करते हैं और सात्विक भोजन करने के बाद ही छठ पूजा शुरू हो जाती है । आज आपको छठ पूजा की विधि और पूजन के बारें में बताते हैं ।

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पूजा सामग्री :-
- प्रसाद रखने के लिए बांस की दो तीन बड़ी टोकरी
- बांस या पीतल के बने तीन सूपा, लोटा, थाली, गिलास
- वस्त्र साड़ी-कुर्ता पजामा
- चावल, लाल सिंदूर, धूप और बड़ा दीपक
- पानी वाला नारियल, गन्ना पत्ता लगा हुआ
- शकरकंदी
- नाशपाती और बड़ा वाला मीठा नींबू
- शहद,पान और साबुत सुपारी
- कपूर, कुमकुम, चन्दन, मिठाई
साथ में प्रसाद के रूप में ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पूड़ी, खजूर, सूजी का हलवा, चावल का बना लड्डू का बना हुआ है ।
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पूजा विधि :-
यह पूजा पूरी तरह भगवान सूर्य देव को समर्पित है । यह एक ऐसा व्रत होता है जो पुरुष और स्त्री दोनों करते हैं । यह व्रत का पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। व्रत के पहले दिन अर्थात कार्तिक की शुक्ल चतुर्थी को नहाए खाए होता है, जिसमें व्रत लेने वाले व्यक्ति आत्म शुद्धि के लिए केवल शुद्ध आहार का सेवन करते है। उसके अगले दिन खरना रखा जाता है, जिसमें पूजा करके शाम के समय गुड़ की खीर और पुड़ी बनाकर छठी माता को भोग लगाया जाता है। इस खीर का प्रसाद सबसे पहले व्रत वाले व्यक्ति को खिलाए जाता है और उसके बाद ब्राम्हणों और परिवार के लोगों को दिया जाता है ।
कार्तिक शुक्ल की छटवीं के दिन घर में बड़ी सफाई से कई तरह के पकवान बनाये जाते हैं, और सूर्यास्त के समय सारे पकवान को बांस के सुपे में भर कर अपने निकट के घाट पर ले जाते हैं । नदियों में गन्ने का घर जैसा बनाकर उन पर दीप भी जलाये जाते है। जो लोग व्रत लेते हैं वो सारे जल में स्नान कर इन डालों को अपने हाथों में उठाकर छठी माता और सूर्य को जल चढ़ाते हैं । सूर्यास्त होने के बाद अपने-अपने घर वापस आकर अपने परिवार के साथ रात भर सूर्य देवता का जागरण किया जाता है। इस जागरण में छठ माता के गीत गाये जाते हैं जिनका अपना एक अलग ही महत्व है। कार्तिक शुक्ल की सप्तमी को सूर्योदय से पहले ब्रम्ह मुहूर्त में सुबह पहले की तरह सुपे में पकवान, नारियल और फलदान रख नदी के किनारे पर सारे व्रत वाले लोग जमा होते है। इस दिन व्रत करने वाले व्यक्तियों को उगते हुए सूर्य को जल चढ़ाना होता है। अब इसके बाद छठ व्रत की कथा सुनी जाती है और इसके बाद प्रसाद बांटा जाता है ।

और पढ़े- छठ पूजा क्यों की जाती है ?

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Answered on Nov 22, 2023

दिवाली के 6 दिन बाद बिहारीयों के द्वारा एक विशेष पूजा की जाती है। जिसे छठ पूजा के नाम से जाना जाता है। छठ पूजा का पर्व लगातार तीन दिन तक चलता है इस पर्व में सूर्य देव की पूजा की जाती है। और फिर छठ मैया की भी आराधना की जाती है। तो चलिए आज हम आपको छठ पूजा की विधि बताते हैं।

छठ पूजा की विधि:-

जो व्यक्ति छठ पूजा करता है उसे छठ पूजा वाले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद हमें अपने मन में छठ व्रत का संकल्प लेना चाहिए।इसके बाद सूर्य देव और छठी मैया का ध्यान करना चाहिए।और अन्न के सेवन से बचना चाहिए।छठ के पहले दिन संध्या के समय सूय को अर्घ्य देने का विधान है जिसे संध्याकाली अर्घ्य भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में डूबते सूर्य को अर्घ्य दिए जाने का विधान है।और फिर छठ पूजा वाले दिन सूर्यास्त होने से पहले छठ घाट पर पहुंच जाना चाहिए और फिर से स्नान करना चाहिए।और फिर इसके बाद सूर्य भगवान को अर्ध्य देने के लिए बस का प्रयोग करना चाहिए। इस प्रकार आपकी पूजा संपन्न हो जाती है।

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Answered on Nov 23, 2023

हिंदू धर्म में हर व्रत और त्योहारो का अलग ही महत्व है। हम सभी मिलकर हर व्रत को भी एक त्योहारो की तरह ही मनाते हैं चाहे वह करवाचौथ हो, हरतालका तीज हो या फिर छठ की पूजा हो।छठ पर्व को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। इसमे सूर्य देव के साथ छठी मैया की भी पूजा की जाती हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में कई तरह के प्रसाद बनते हैं। पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना और बाकी दो दिन छठ पूजा की जाती हैं। खरना के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है।

छठ व्रत की शुरुआत कैसे करे :-छठ देवी भगवान सूर्य देव की बहन है। छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की अराधना की जाती हैं। छठी मैया का ध्यान करते हुए लोग माँ गंगा, यमुना या किसी भी नदी के किनारे इस पूजा को करते है तथा नदी में ही स्नान करते है यह बहुत जरूरी है। इस व्रत को करने से पहले घर को अच्छे से साफ किया जाता हैं। चार दिन तक शुद्ध शाकाहारी भोजन बनाया जाता हैं। खरना के पश्चात तीसरे दिन सूर्य को संध्या अर्ध्य देकर चौथे दिन उदियमान सूर्य को उषा अर्ध्य देकर व्रत संपन्न करते है।

अनुष्ठान विधि :-सर्वप्रथम सूर्योदय से पहले उठे। किसी भी नदी, तालाब या झील में स्नान करे। स्नान के बाद नदी के किनारे खड़े होकर सूर्यदेव को सूर्योदय के समय नमन करे तथा पूजन करे। शुद्ध घी का दीपक जलाये तथा पुष्प अर्पित करे छठ पूजा में सात प्रकार के फूल, चंदन, तिल , चावल, आदि से युक्त जल को सूर्य को अर्पण करे और छठ व्रत का संकल्प लें। पुरा दिन निर्जला रहे और ध्यान करते रहे। सूर्यास्त के समय घाट पर पहुँच कर फिर से संध्या सूर्य की पूजन कर अर्ध्य दे और पूजन पूरा कर सूर्य देव और छठी मैया से मनवांछित फल की कामना करते हुए व्रत पूर्ण करे। Article image

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Answered on Nov 23, 2023

दोस्तों क्या आप जानते है कि छठ माता की पूजा विधि क्या है।छठ पूजा के नाम से जाना जाता है। छठ पूजा का पर्व लगातार तीन दिन तक चलता है इस पर्व में सूर्य देव की पूजा की जाती है। और फिर छठ मैया की भी आराधना की जाती है।जो व्यक्ति छठ पूजा करता है उसे छठ पूजा वाले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद हमें अपने मन में छठ व्रत का संकल्प लेना चाहिए।छठ पूजा को लेकर विशेष नियम होते हैं और इन नियमों का पालन करते हुए यह त्‍योहार पूरे हर्ष और उल्‍लास के साथ मनाया जाता है।

छठ पूजा की साम्रगी -

  • नई साड़ी
  • बांस की दो बड़ी-बड़ी टोकरियां
  • दूध और जल के लिए एक ग्लास
  • एक लोटा और थाली, चम्‍मच
  • 5 गन्ने पत्ते लगे हुए
  • शकरकंदी और सुथनी
  • पान और सुपारी
  • हल्दी
  • शकरकंदी
  • - नाशपाती और बड़ा वाला मीठा नींबू
  • - शहद,पान और साबुत सुपारी
  • - कपूर, कुमकुम, चन्दन, मिठाई।

छठ पूजा की विधि -

छठ पर्व की पूजा में सूर्य भगवान और छठी माता की पूजा की जाता है। व्यक्ति छठ पूजा करता है उसे छठ पूजा वाले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद हमें अपने मन में छठ व्रत का संकल्प लेना चाहिए।इसके बाद सूर्य देव और छठी मैया का ध्यान करना चाहिए।और अन्न के सेवन से बचना चाहिए।छठ के पहले दिन संध्या के समय सूय को अर्घ्य देने का विधान है इस खीर का प्रसाद सबसे पहले व्रत वाले व्यक्ति को खिलाए जाता है और उसके बाद ब्राम्हणों और परिवार के लोगों को दिया जाता है ।Article image

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Answered on Nov 23, 2023

दिवाली के 6 दिन बाद बिहारीयों के द्वारा एक विशेष पूजा की जाती है। यह पूजा बिहारी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। जिसे छठ पूजा के नाम से जाना जाता है। छठ पूजा का पर्व लगातार तीन दिन तक चलता है इस पर्व में सूर्य देव की पूजा की जाती है। और फिर छठ मैया की भी आराधना की जाती है। तो चलिए आज हम आपको छठ पूजा की विधि बताते हैं।

कार्तिक शुक्ल की छटवीं के दिन घर में बड़ी सफाई से कई तरह के पकवान बनाया जाता हैं, और सूर्यास्त के समय सारे पकवान को बांस के सुपे में भर कर अपने निकट के घाट पर ले जाते हैं । और नदियों में गन्ने का घर जैसा बनाकर उन पर दीप भी जलाये जाते है। जो लोग व्रत लेते हैं वो सारे जल में स्नान कर इन डालों को अपने हाथों में उठाकर छठी माता और सूर्य को जल चढ़ाते हैं । सूर्यास्त के बाद अपने-अपने घर आते हैं और घर वापस आकर अपने परिवार के साथ रात भर सूर्य देवता का ध्यान किया जाता है।Article image

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Answered on May 3, 2024

आप छठ माता की पूजा विधि जानना चाहते हैं तो चलिए हम आपको विस्तार से इसकी जानकारी देते हैं:-

दोस्तों मैं आपको बता दूं कि छठ का पर्व बिहार, उत्तर प्रदेश, और झारखंड में सबसे अधिक उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से सूर्य देव  और छठी मैया का आशीर्वाद प्राप्त होता है। और जो छठ का व्रत पूरी श्रद्धा भाव के साथ करता है उसकी हर मनोकामना सूर्य देव पूरी करते हैं।  यदि आप भी छठ व्रत करना चाहते हैं तो चलिए आज हम आपको छठ व्रत करने की पूरी विधि बताते हैं।

 

सबसे पहले मैं आपको बताने वाली हूं कि छठ पूजा के लिए कौन-कौन सी सामग्रियों की आवश्यकता पड़ती है:-

दोस्तों छठ पूजा करने के लिए बांस की टोकरी, सूप, नारियल,अक्षत, पत्ते लगे गन्ने, सिंदूर, दीप,धूप, थाली, नए वस्त्र, लोटा ,नारियल पानी भरा,अदरक का हरा पौधा, फल, कलश,पान, सुपारी,कुमकुम आदि।

 

चलिए अब हम आपको छठ पूजा की विधि बताते हैं:-

दोस्तों यदि आप छठ पूजा करना चाहते हैं तो सबसे पहले छठ पूजा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठे इसके बाद स्नान करें, स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प ले, संकल्प लेते वक्त सूर्य देव और छठी मैया का ध्यान करें, जो व्यक्ति छठ पूजा व्रत करता है उसे उस दिन अन्य ग्रहण नहीं करना होता। मैं आपको बता दूं की छत के पहले दिन संध्या काली अर्ध्य होता है जिसमें डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है। इसलिए छत वाले दिन सूर्यास्त होने से पहले घाट पर पहुंचे और वहां स्नान करने के बाद सूर्य को पूरी निष्ठा के साथ अर्ध्य दे। दोस्तों मैं आपको बता दूं कि इस दिन सूर्य देव को  अर्ध्य देने के लिए बस या पीतल की टोकरी का ही उपयोग करें। दोस्तों छठ पूजा के दिन और रात भर निर्जला व्रत रखा जाता है और अगले दिन सुबह उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करें। और सूर्य देव को अर्ध्य देते वक्त मन ही मन में उनसे अपनी मनोकामना कहे।

 

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