क्या भारत में बच्चे अपने माता-पिता से सही सामंजस्य नहीं बैठा पाते हैं, क्यों ? - letsdiskuss
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Rahul Mehra

System Analyst (Wipro) | पोस्ट किया |


क्या भारत में बच्चे अपने माता-पिता से सही सामंजस्य नहीं बैठा पाते हैं, क्यों ?


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Content Writer | पोस्ट किया


वैसे ऐसा साफ़-साफ़ नहीं कह सकते कि भारत में बच्चे अपने माता-पिता से सही सामंजस्य नहीं बैठा पाते है | परन्तु हाँ कही-कही ऐसा कहना सही भी है, क्योकि ऐसा तब होता है, जब माता-पिता और बच्चो के बीच सोच में गैप आता है, या कह सकते है कि उम्र का अंतर आता है | बच्चे जिस उम्र में होते है, जो जीवन वो जी रहे है, माँ-बाप उस उम्र से गुजर चुके है |
माता-पिता की उस उम्र के समय और बच्चों के उम्र के समय में ज़मीन आसमान का फर्क होता है | कुछ कारण है जिससे आज कल के बच्चे अपने माता पिता के साथ सही सामंजस्य नहीं बैठा पाते |

- उम्र में अंतर :-

माता-पिता की उम्र और बच्चो की उम्र में अंतर होना सबसे बड़ा कारण मान सकते है, जिससे की दोनों के बीच सही सामंजस्य नहीं हो पाता | इसके लिए दोनों को एक दूसरे को समझना होगा | अब बच्चे तो माता-पिता की तरह नहीं सोच सकते क्योकि बच्चों में उतनी समझ नहीं होती, इसलिए माता-पिता को ही अपने बच्चों की तरह सोचने की कोशिश करना चाहिए |

- दोस्तों की संगती :-

सामंजस्य न बैठ पाना माता-पिता और बच्चों के बीच इसका एक कारण संगती भी मान सकते है | बच्चे जिस माहौल में रहते है, जैसे दोस्तों के साथ रहते है, उनका रहन-सहन भी उनकी तरह होता है | अगर बच्चों की संगती किसी अच्छे इंसान से है, तो बच्चा अच्छा ही सीखता है, और अगर बच्चे की संगती किसी ग़लत इंसान से है तो बच्चा बुरी चीज़ें ही सीखता है | कही न कही बच्चे की संगती माता-पिता और उनके बीच दूरी ला देती है |

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- वक़्त की कमी :-

आज कल के समय में माता-पिता हो या बच्चे किसी के पास अधिक समय नहीं है | वर्तमान समय में लोग पैसे कमाने की भागमभाग में लगे है | किसी को किसी के लिए समय नहीं ऐसे में जब माता-पिता अपने काम में होते है तब वो अपने बच्चों को समय नहीं दे पाते और जब बच्चे काम करने लगते है तब वो अपने माता-पिता को समय नहीं दे पाते | बस यही दोनों के बीच सामंजस्य नहीं बैठ पाता |

- पैसे खर्च करना :-

माता पिता हमेशा यही सोचते हैं, कि वो अपने बच्चों पर जितना पैसा खर्च कर रहें हैं, बच्चे उतना अच्छा काम नहीं कर पा रहे हैं | माता-पिता को हमेशा ऐसा लगता हैं, कि जितनी परेशानी उन्होंने देखी उतने उनके बच्चों को न मिले और वो इसके लिए इतनी मेहनत कर रहे हैं, पर उनके बच्चे उन्हें अच्छा रिपॉन्स नहीं दे रहें हैं |

- उम्मीदें थोपना :-

माता-पिता अक्सर अपने बच्चों पर अपनी उमीदें थोपते रहते हैं, उन्हें लगता हैं जितनी मेहनत कर के माता-पिता अपने बच्चों के लिए कमाते हैं, उतनी ही मेहनत उनका बच्चा करें | परन्तु ऐसा कई बार नहीं हो पाता और बच्चों और माता पिता के बीच सामंजस्य में कमी आ जाती हैं |

- नई सोच को स्वीकार नहीं कर पाना :-

जैसा कि माता-पिता और बच्चों के उम्र में अंतर होता हैं, और यह अंतर जब सोच में आ जाता हैं, तब अक्सर माता-पिता और बच्चों के बीच सही सामंजस्य नहीं बन पाता | माता-पिता अपनी सोच बच्चो पर चलाते हैं, और बच्चे अपनी सोच माता-पिता पर , जो कि दोनों को सही नहीं लगती |


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