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श्याम कश्यप · 8 साल पहले
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पशुपतिनाथ मन्दिर के बारें में बताइये ?

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अपडेट किया गया10/23/26

पशुपतिनाथ मंदिर प्रसिद्ध मंदिरों मे से एक माना जाता है | यह नेपाल के काठमांडू के बागमती नदी के किनारे स्थित है | यहाँ शिव का स्वरूप चार मुख वाले शिवलिंग के रूप मे विध्यमान है | पूर्व मुख को तत्पुरुष , पश्चिम दिशा वाले मुख को सघोजात ,उत्तर मुख को वामदेव या अर्धनारीश्वर और दक्षिण मुख को अघोरा कहते है | और ऊपर कि ओर पांचवाँ मुख ईशान कहा जाता है| माना जाता है कि चारों वेदों के बुनयादी सिद्धांत यही से निकले थे | माना जाता है कि यह लिंग वेदों कि रचना के पहले ही स्थापित हो गया था | इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाए प्रचलित है |

पशुपतिनाथ कि कथा -

पांडवों द्वारा कुरुक्षेत्र मे अपने भाइयों कि हत्या करने कि वजह से पांडव बहुत दुखी थे | वह इस गोत्रवध से बहुत निराश थे | इस अपराध से दोषमुक्त होने के लिए पांडवों ने शिव कि खोज करना प्रारंभ कर दिया | लेकिन शिव ऐसा नहीं चाहते थे वह पांडवों को इतनी आसानी से मुक्ति नहीं देना चाहते थे | इसलिए शिव जी ने पांडवों से बचने के लिए उनको अपने पास आता देखकर एक बैल का रूप धारण कर लिया | पांडवों ने भेद जान लिया के शिव उनसे बच रहे है इसलिए उन्होंने बैल का पीछे दौड़ना शुरू कर दिया | इस भाग दौड़ मे शिव जो बैल रूप मे थे जमीन मे समा गए लेकिन जब फिर से अवतरित हुए तो उनके शरीर के टुकड़े हो चुके थे और कई जगह बिखर गए | बैल का सिर नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर मे गिरा | इसलिए इस जगह को खास माना जाता है ओर यहाँ शिव का केवल मस्तक ही विध्यमान है | बैल का कूबड़ केदारनाथ मे गिरा , दोनों टाँगे तुंगनाथ मे जा कर गिरी | तुंगनाथ मंदिर केदारनाथ मंदिर के रास्ते मे पड़ता है | मध्य -महेश्वर मे बैल का नाभि वाला हिस्सा गिरा यह हिमालय के भारतीय इलाके मे आता है | यह सबसे शक्तिशाली लिंग मे से एक है इसे मणिपुरक लिंग कहते है | भगवान शिव कि जटाए जहां गिरी थी उस स्थान को कलपेश्वर महादेव के नाम से जानते है यहाँ पूरे वर्ष भर भगवान शिव कि जटाओ के रूप मे पूजा कि जाती है | ऐसे भगवन शिव के पूरे शरीर के दुकड़े भिखर गए थे |

पशुपतिनाथ नाथ मंदिर मे केवल हिन्दू धर्म के लोग ही आ सकते है | मंदिर परिसर मे जूते चप्पल , चमड़े से बने पर्स , बेल्ट या अन्य कोई भी वस्तु या सामान ले जाने कि अनुमति नहीं है | गैर हिन्दुओ या मुस्लिमों के लिए मंदिर मे प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित है | वह केवल बाहर से मंदिर परिसर को देख सकतेहै | भगवान शिव के शिवलिंग को केवल भट्ट पुजारी ही छु सकते है | अन्य कोई भी शिवलिंग को नहीं छु सकता |

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अपडेट किया गया06/05/26

Pashupatinath Temple नेपाल का एक अत्यंत प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू मंदिर माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और बागमती नदी के किनारे स्थित है। Pashupatinath को UNESCO World Heritage Site का दर्जा भी प्राप्त है। मंदिर की architecture, धार्मिक महत्व और spiritual atmosphere दुनियाभर के भक्तों और tourists को आकर्षित करते हैं। विशेष रूप से महाशिवरात्रि के समय यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर अत्यंत प्राचीन माना जाता है। यहां होने वाली पूजा, आरती और traditional rituals Nepal की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। यह South Asia के सबसे प्रसिद्ध Shiva temples में शामिल है।

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Madhav Sharma is a professional astrologer with over 6 years of practice in Vedic astrology. He holds a Jyotish Visharad certification from the Indian Council of Astrological Sciences (ICAS), New Delhi — one of India's most recognised credentials in the field — and has studied under senior practitioners with decades of lineage in classical Vedic traditions. His content covers Vedic astrology, birth chart analysis, planetary transits, kundli matching, horoscope predictions, and the practical application of astrological principles in daily life. His work has been published on platforms including AstroSage, GaneshaSpeaks, and Boldsky Astrology, where he writes for readers seeking guidance grounded in classical astrological texts and consistent interpretive practice. Over six years, Madhav has conducted 2,000+ individual consultations and published 200+ articles on astrology, covering everything from beginner guides to in-depth analyses of rare planetary combinations. He is a practising member of the Indian Astrology Federation and has been a featured voice at astrology conferences and spiritual wellness events across India. Across all his writing, his approach remains consistent — classical knowledge, disciplined interpretation, and content that respects both the tradition of Vedic astrology and the intelligence of the reader.

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अपडेट किया गया06/01/26

नेपाल में पशुपतिनाथ का मंदिर काठमांडू के पास देवपाटन गांव में बागमती नदी के किनारे पर है। मंदिर में भगवान शिव की एक पांच मुंह वाली मूर्ति स्थापित की गयी है। भगवान शिव मुख के दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला और बाएं हाथ में कमंदल लिए हुये है। मान्यता के अनुसार पशुपतिनाथ मंदिर का ज्योतिर्लिंग पारस पत्थर के समान माना जाता है।

पशुपतिनाथ का मंदिर प्रतिदिन 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक खुला रहता है। पशुपतिनाथ जी का मंदिर केवल दोपहर के समय और शाम के 5 बजे मंदिर के पट बंद रहते है। मंदिर में जाने का सबसे उत्तम समय सुबह और शाम क़ो 6बजे का होता है। पुरे मंदिर का भ्रमण करने के लिए 1-2घंटे का समय लगता है।Letsdiskuss

 

 

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जवाब दिया गया10/28/23

दोस्तों चलिए आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि पशुपतिनाथ मंदिर में क्या है यदि आपको नहीं पता तो आप इस आर्टिकल को जरूर पढ़ें।

पशुपतिनाथ जी का मंदिर नेपाल के काठमांडू के पास देव पाटन गांव में बागमती नदी के किनारे पर स्थित है। मंदिर में भगवान शिव की एक पांच मुख वाली मूर्ति स्थित है।और पशुपतिनाथ का मंदिर प्रतिदिन 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक खुला रहता है। और पशुपतिनाथ जी का मंदिर केवल दोपहर के समय और शाम के 5 बजे मंदिर के पट बंद रहते है। पशुपतिनाथ जी को केदारनाथ का आधा भाग भी माना जाता है।और पशुपतिनाथ मंदिर का शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पशुपति नाथ जी का मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदीर उत्तर-पश्चिम दिशा में बागमती नाम की एक नदी के किनारे एक देवपाटन गांव में स्थित हैं, यह मंदिर देखने में अति सुंदर दिखती है तो इस मंदिर को देखने के लिए लोग बहुत दूर-दूर से आते हैं।

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जवाब दिया गया07/11/18
हिमालय की गोद में बसा हुआ एक छोटा देश नेपाल | जहां की हसीं वादियां मन को मोह लेती हैं | मानो धरती में स्वर्ग हो | नेपाल की खूबसूरती की जितनी तारीफ की जाये कम हैं | अब आते हैं आपके सवाल पर ,आप नेपाल के कुछ दिचस्प तथ्य जानना चाहते हैं |
जितना खूबसूरत नेपाल हैं उतने ही दिलचस्प और आकर्षक इसके तथ्य हैं :-
- सबसे पहले आपको बताते हैं नेपाल के "Flag" के बारें में ,नेपाल का "Flag " का आकार और देश के "Flag" से अलग हैं | सभी देश के "Flag "(झंडा) वर्गाकार होते हैं जबकि नेपाल का झंडा सबसे अलग हैं |
- नेपाल पुरे साउथ एशिया में सबसे पुराण देश हैं ,जिसमे 123 language बोली जाती हैं |
- नेपाल का सबसे अच्छा अभिनन्दन करने का तरीका होता हैं | सभी देशों में हाथ मिलकर या गले मिलकर अभिनन्दन करते हैं, पर नेपाल में दोनों हाथ जोड़कर अभिनन्दन किया जाता हैं |
- नेपाल भक्ति-भावना में काफी प्रसिद्द हैं | यहां महाशिवरात्रि बहुत धूम-धाम से मनाई जाती हैं |
- नेपाल एक हिन्दू राष्ट्रीय हैं ,यहां 81.3% हिन्दू रहते हैं,और विश्व की 10 सबसे ऊँची पर्वत चोटियों में से 8 नेपाल में ही हैं |
- आपको बता दें कि पहले के समय में नेपाल में अंतिम हिन्दू साम्राज्य था। बुद्ध धर्म के संस्थापक सिद्धार्थ गौतम जिनको लोग गौतम बुद्ध के नाम से जानते हैं उनका जन्म भी दक्षिणी नेपाल के लुंबिनी में हुआ।
- नेपाली लोगो को गुरखा के नाम से भी जाना जाता हैं और नेपाल प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध में वे अपनी वीरता के लिए जाने जाते हैं |
- नेपाल की संस्कृति कुछ तिब्बत और भारत से मिलती-जुलती हैं | यहाँ का पहनावा और यहां की भाषा और यहाँ का भोजन तिब्बत और भारत से मिलता जुलता हैं |
- नेपाल का मुख्य खाना चने की दाल, चावल जिसको भात कहते हैं, तरकारी(सब्जी) और अचार हैं । इस प्रकार का खाना सुबह एवं रात दोनों समय खाया जाता हैं ।
- खाने में चिवड़ा (पोहा) और चाय का भी चलन हैं,और मांस-मछली तथा अंडा भी यहाँ विशेष रूप से खाया जाता हैं ।
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जवाब दिया गया10/27/23

आज हम आपको बताते हैं पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में-

पशुपतिनाथ जी का मंदिर नेपाल के काठमांडू के पास देव पाटन गांव में बागमती नदी के किनारे पर स्थित है।मंदिर में भगवान शिव की एक पांच मुख वाली मूर्ति स्थित है। पशुपतिनाथ विग्रह मे चारों दिशाओं में एक एक मुख और एक मुख ऊपर की ओर है।प्रत्येक मुख्य दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला और बाएं हाथ में कमंदल मौजूद है। मान्यता के अनुसार पशुपति नाथ मंदिर का ज्योतिर्लिंग पारस पत्थर के समान है। पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। पशुपतिनाथ मंदिर प्रतिदिन 4:00 से रात्रि 9:00 तक खुला रहता है।पशुपतिनाथ मंदिर जी का मंदिर केवल दोपहर के समय और शाम के 5:00 मंदिर के पट बंद रहते हैं। शिवजी का मुख तो बाहर था परंतु उनका देह केदारनाथ पहुंच गया इसलिए पशुपति को केदारनाथ का आधा भाग माना जाता है। शिवजी को अपने असली रूप में आना ही पड़ा और पांडवों ने शिव से मांगी और शिव ने उन्हें माफ किया।लेख की तस्वीर

Poonam Patel
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जवाब दिया गया04/06/23

आपकी इच्छा है कि हम आपको पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में बताएं तो चलिए हम आपको पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में बताते हैं। पशुपतिनाथ जी का मंदिर नेपाल के काठमांडू के पास देवपाटन गांव में बागमती नदी के किनारे पर स्थित है। पशुपतिनाथ मंदिर का शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पशुपति नाथ जी का मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। पशुपति नाथ जी के मंदिर के खुलने का समय शाम 4:00 बजे से लेकर रात्रि 9:00 बजे तक का है इसी समय के अंदर पशुपतिनाथ मंदिर घूमने जा सकते हैं। पशुपतिनाथ मंदिर बहुत ही विशाल मंदिर है।

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Krishna Patel
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अपडेट किया गया06/05/26
इस धरती में एक स्वर्ग और वो हैं, "नेपाल" जैसा कि हमारे पहले एक जवाब में आपको बताया हैं, कि नेपाल में क्या खास बात हैं, और आपके इस सवाल में आप पशुपतिनाथ मंदिर के बारें में जानना चाहते हैं, और सबसे खास बात, कि यह भी नेपाल में ही हैं |
 
अब आपके सवाल के जवाब पर आते हैं -
आपको बता दें, कि पशुपतिनाथ मंदिर धरती के इस स्वर्ग नेपाल की राजधानी काठमांडू से तीन किलोमीटर कि दूरी से उत्तर-पश्चिम दिशा में बागमती नाम की एक नदी के किनारे एक देवपाटन गांव में स्थित हैं, और यह एक हिंदू मंदिर हैं |
 
नेपाल के एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र अर्थात एक ऐसा राष्ट जहां धर्म को लेकर कभी कोई पक्षपात न हो, ऐसा राष्ट्र बनने से पहले पशुपतिनाथ मंदिर, भगवान पशुपतिनाथ का मुख्य निवास माना जाता था। पशुपतिनाथ में आस्था और विश्वाश रखने वालों जो मुख्य रूप से हिन्दू हैं, को मंदिर परिसर में प्रवेश करने की अनुमति हैं, और गैर हिंदू को इसे बाहर से ही बागमती नदी के दूसरे किनारे से देखने की अनुमति हैं |
 
यह मंदिर शिव का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता हैं | नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर की ऐसी मान्यता हैं, कि इस मंदिर में आज भी शिव जी मौजूद हैं | आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पशुपतिनाथ मंदिर के शिव को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं, और इन्हें केदारनाथ मंदिर का आधा भाग माना जाता हैं ।
 
पौराणिक कथा के अनुसार - जब कौरव पांडव का युद्ध हुआ, और पांडवों के द्वारा अपने ही भाइयों का रक्त बहाया हुआ देख शिव जी बहुत क्रोधित हुए | भगवान् श्री कृष्ण ने पांडवों को भगवान् शिव से माफ़ी मांगने के लिए कहा |
 
- पांडव शिव से माफ़ी मांगने निकल पड़े,गुप्त काशी में पांडवों को आता देख कर शिव जी वहाँ से लुप्त हो गए, और अन्य स्थान पर चले गए, आज उस स्थान को केदारनाथ कहा जाता हैं |
 
- पांडव वहां भी पहुंच गए , पांडवों को केदारनाथ आता हुआ देखा कर, भगवान् शिव भैंस का रूप लेकर भैंसों एक झुण्ड में खड़े हो गए |
 
- परन्तु पांडव ने उन्हें पहचान लिया, और तभी भगवान् शिव धरती में सामने लगे | तभी भीम ने अपनी ताकत से उनकी गर्दन पकड़ कर उन्हें धरती में रोक दिया |
 
- शिव जी को अपने असली रूप में आना ही पड़ा, और पांडवों ने शिव से माफ़ी मांगी और शिव ने उन्हें माफ़ किया |
 
-शिव जी का मुख तो बाहर था, परन्तु उनका देह केदार नाथ पहुँच गया | इसलिए पशुपति को केदारनाथ का आधा भाग माना जाता हैं |
 
आपके सवाल हमारे लिए अनमोल हैं |आप अपने सवाल हमारी वेबसाइट पर पूछ सकते हैं |
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