पशुपतिनाथ मंदिर प्रसिद्ध मंदिरों मे से एक माना जाता है | यह नेपाल के काठमांडू के बागमती नदी के किनारे स्थित है | यहाँ शिव का स्वरूप चार मुख वाले शिवलिंग के रूप मे विध्यमान है | पूर्व मुख को तत्पुरुष , पश्चिम दिशा वाले मुख को सघोजात ,उत्तर मुख को वामदेव या अर्धनारीश्वर और दक्षिण मुख को अघोरा कहते है | और ऊपर कि ओर पांचवाँ मुख ईशान कहा जाता है| माना जाता है कि चारों वेदों के बुनयादी सिद्धांत यही से निकले थे | माना जाता है कि यह लिंग वेदों कि रचना के पहले ही स्थापित हो गया था | इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाए प्रचलित है |
पशुपतिनाथ कि कथा -
पांडवों द्वारा कुरुक्षेत्र मे अपने भाइयों कि हत्या करने कि वजह से पांडव बहुत दुखी थे | वह इस गोत्रवध से बहुत निराश थे | इस अपराध से दोषमुक्त होने के लिए पांडवों ने शिव कि खोज करना प्रारंभ कर दिया | लेकिन शिव ऐसा नहीं चाहते थे वह पांडवों को इतनी आसानी से मुक्ति नहीं देना चाहते थे | इसलिए शिव जी ने पांडवों से बचने के लिए उनको अपने पास आता देखकर एक बैल का रूप धारण कर लिया | पांडवों ने भेद जान लिया के शिव उनसे बच रहे है इसलिए उन्होंने बैल का पीछे दौड़ना शुरू कर दिया | इस भाग दौड़ मे शिव जो बैल रूप मे थे जमीन मे समा गए लेकिन जब फिर से अवतरित हुए तो उनके शरीर के टुकड़े हो चुके थे और कई जगह बिखर गए | बैल का सिर नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर मे गिरा | इसलिए इस जगह को खास माना जाता है ओर यहाँ शिव का केवल मस्तक ही विध्यमान है | बैल का कूबड़ केदारनाथ मे गिरा , दोनों टाँगे तुंगनाथ मे जा कर गिरी | तुंगनाथ मंदिर केदारनाथ मंदिर के रास्ते मे पड़ता है | मध्य -महेश्वर मे बैल का नाभि वाला हिस्सा गिरा यह हिमालय के भारतीय इलाके मे आता है | यह सबसे शक्तिशाली लिंग मे से एक है इसे मणिपुरक लिंग कहते है | भगवान शिव कि जटाए जहां गिरी थी उस स्थान को कलपेश्वर महादेव के नाम से जानते है यहाँ पूरे वर्ष भर भगवान शिव कि जटाओ के रूप मे पूजा कि जाती है | ऐसे भगवन शिव के पूरे शरीर के दुकड़े भिखर गए थे |
पशुपतिनाथ नाथ मंदिर मे केवल हिन्दू धर्म के लोग ही आ सकते है | मंदिर परिसर मे जूते चप्पल , चमड़े से बने पर्स , बेल्ट या अन्य कोई भी वस्तु या सामान ले जाने कि अनुमति नहीं है | गैर हिन्दुओ या मुस्लिमों के लिए मंदिर मे प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित है | वह केवल बाहर से मंदिर परिसर को देख सकतेहै | भगवान शिव के शिवलिंग को केवल भट्ट पुजारी ही छु सकते है | अन्य कोई भी शिवलिंग को नहीं छु सकता |








